मल्हार अध्याय 4 सोच-विचार के लिए

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
कहानी को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित पंक्ति के विषय में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए। “दोनों के आँसुओं का उस भूमि की मिट्टी पर परस्पर मेल हो गया।” (क) किस-किस के आँसुओं का मेल हो गया था?
उत्तर

बाबा भारती और डाकू खड़्गसिंह — इन्हीं दोनों के आँसुओं का मेल हुआ था।

कहानी बताती है कि दोनों एक ही जगह पर रोए थे, बस समय अलग-अलग था —

कौनकबकहानी की पंक्ति
खड़्गसिंहरात के अँधेरे में, सुलतान को अस्तबल में बाँधकर फाटक बंद करने के बाद“इस समय उसकी आँखों में पश्चाताप के आँसू थे।” … “जहाँ बाहर निकलने के बाद खड़्गसिंह खड़ा होकर रोया था।”
बाबा भारतीअगले दिन तड़के, घोड़े से लिपटकर रोने के बाद जब वे अस्तबल से बाहर निकले“जब वह अस्तबल से बाहर निकले तो उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे। ये आँसू उसी भूमि पर ठीक उसी जगह गिर रहे थे…”
लेखक ने यह चित्र क्यों बनाया: दोनों आदमी कभी आमने-सामने बैठकर नहीं मिले, न किसी ने दूसरे से माफ़ी माँगी, न धन्यवाद कहा। उनका मिलन आँसुओं के रास्ते हुआ — वह भी अनजाने में। एक साधु और एक डाकू, दोनों के आँसू एक ही मिट्टी में मिल जाते हैं, इसका अर्थ है कि भीतर से दोनों अब एक जैसे साफ़ मन के हो चुके हैं। कहानी का यह अंत बिना एक भी उपदेश दिए सब कुछ कह देता है।
प्र2.
(ख) दोनों के आँसुओं में क्या अंतर था?
उत्तर

आँसू दोनों की आँखों से गिरे, पर उनके पीछे का भाव बिलकुल अलग था —

अंतर की बातखड़्गसिंह के आँसूबाबा भारती के आँसू
भावपश्चाताप और ग्लानि केहर्ष, कृतज्ञता और संतोष के
कारणउसे लगा कि उसने एक ऐसे व्यक्ति को ठगा जो घोड़े से भी ऊँचा सोचता है — “कैसे ऊँचे विचार हैं, कैसा पवित्र भाव है!”खोया हुआ सुलतान वापस मिल गया और साथ ही यह विश्वास भी कि “अब कोई गरीबों की सहायता से मुँह न मोड़ेगा।”
समयरात के अँधेरे में, चोरी-चोरी घोड़ा लौटाने के बादअगली सुबह, घोड़े के गले से लिपटकर रोने के बाद
क्या बदलाउसका चरित्र बदल गया — डाकू के भीतर का आदमी जाग उठाउनका विश्वास जीत गया — मनुष्यता पर उनका भरोसा सही सिद्ध हुआ
एक और सूक्ष्म अंतर: खड़्गसिंह के आँसू उसे हल्का करने वाले हैं — बोझ उतारने वाले। बाबा भारती के आँसू उन्हें भर देने वाले हैं — पाने की ख़ुशी के। एक आँसू पाप धोता है, दूसरा प्रेम बहाता है। और दिलचस्प बात यह कि दोनों ही आँसू एक ही घटना से पैदा हुए हैं।
लिखते समय यह ज़रूर जोड़िए: आँसू हमेशा दुख के नहीं होते। इस कहानी में एक भी आँसू दुख का नहीं है — एक पश्चाताप का है, दूसरा आनंद का। यही इस अंत की सुंदरता है।
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