प्र1.
कहानी को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित पंक्ति के विषय में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए। “दोनों के आँसुओं का उस भूमि की मिट्टी पर परस्पर मेल हो गया।” (क) किस-किस के आँसुओं का मेल हो गया था?
उत्तर
बाबा भारती और डाकू खड़्गसिंह — इन्हीं दोनों के आँसुओं का मेल हुआ था।
कहानी बताती है कि दोनों एक ही जगह पर रोए थे, बस समय अलग-अलग था —
| कौन | कब | कहानी की पंक्ति |
|---|---|---|
| खड़्गसिंह | रात के अँधेरे में, सुलतान को अस्तबल में बाँधकर फाटक बंद करने के बाद | “इस समय उसकी आँखों में पश्चाताप के आँसू थे।” … “जहाँ बाहर निकलने के बाद खड़्गसिंह खड़ा होकर रोया था।” |
| बाबा भारती | अगले दिन तड़के, घोड़े से लिपटकर रोने के बाद जब वे अस्तबल से बाहर निकले | “जब वह अस्तबल से बाहर निकले तो उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे। ये आँसू उसी भूमि पर ठीक उसी जगह गिर रहे थे…” |
लेखक ने यह चित्र क्यों बनाया: दोनों आदमी कभी आमने-सामने बैठकर नहीं मिले, न किसी ने दूसरे से माफ़ी माँगी, न धन्यवाद कहा। उनका मिलन आँसुओं के रास्ते हुआ — वह भी अनजाने में। एक साधु और एक डाकू, दोनों के आँसू एक ही मिट्टी में मिल जाते हैं, इसका अर्थ है कि भीतर से दोनों अब एक जैसे साफ़ मन के हो चुके हैं। कहानी का यह अंत बिना एक भी उपदेश दिए सब कुछ कह देता है।