कक्षा ६ हिंदी अध्याय 5 रहीम के दोहे के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
पाठ में रहीम के सात दोहे दिए गए हैं। दोहा दो पंक्तियों का एक छोटा-सा छंद है, जिसमें बहुत बड़ी बात कह दी जाती है। रहीम के ये दोहे अवधी और ब्रजभाषा के रंग में रँगे हैं, इसलिए इनमें ‘तरुवर’, ‘सरवर’, ‘बिपति’, ‘जिह्वा’ जैसे पुराने रूप मिलते हैं। पहला दोहा — “रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि” — बड़े को देखकर छोटे को फेंक मत दो; जहाँ सुई का काम है वहाँ तलवार बेकार है। यानी हर छोटी-बड़ी चीज़ का अपना महत्व है । परोपकार पर दो दोहे हैं — पेड़ अपना फल नहीं खाता, सरोवर अपना पानी नहीं पीता; इसी तरह सज्जन धन दूसरों के काम के लिए जोड़ते हैं। और सच्चा मित्र वही है जो विपत्ति की कसौटी पर खरा उतरे। प्रेम और वाणी पर भी दो दोहे हैं — प्रेम का धागा झटके से मत तोड़ो, टूटने पर जुड़ भी जाए तो गाँठ पड़ जाती है; और बावली जीभ कुछ भी कह जाती है, पर मार कपाल (सिर) को खानी पड़ती है। “रहिमन पानी राखिये” वाले दोहे म
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| दोहे का शब्द | दोहे में अर्थ | आज का शब्द | आज की भाषा में वाक्य |
|---|---|---|---|
| लघु | छोटा, छोटी वस्तु | छोटा | छोटा-सा दीपक भी पूरे कमरे का अँधेरा मिटा देता है। |
| डारि (डारना) | फेंक देना, छोड़ देना | फेंकना, त्यागना | काम की चीज़ को बेकार समझकर फेंकिए मत। |
| तरुवर | पेड़, वृक्ष | वृक्ष | गाँव के बीचोबीच खड़ा वह वृक्ष सौ साल पुराना है। |
| सरवर | सरोवर, तालाब | सरोवर | सरोवर के किनारे बगुले पंक्ति बनाकर खड़े थे। |
| सुजान | सज्जन, समझदार और भला व्यक्ति | सज्जन | सज्जन व्यक्ति अपनी कमाई का कुछ भाग दूसरों पर लगाता है। |
| सँचहि (सँचना) | संचित करना, जोड़कर रखना | संचय करना | चींटी गर्मियों में अनाज का संचय कर लेती है। |
| छिटकाय | झटका देकर, झटककर | झटककर | गुस्से में उसने झटककर अपना हाथ छुड़ा लिया। |
| पानी | एक साथ तीन अर्थ — सम्मान, चमक और जल | सम्मान / चमक / जल | अपनी बात कहिए, पर किसी का पानी मत उतारिए। |
| बिपति, बिपदा | विपत्ति, संकट, मुसीबत | विपत्ति | विपत्ति में ही सच्चे मित्र की पहचान होती है। |
| जिह्वा बावरी | बावली जीभ — बिना सोचे बोल देने वाली जीभ | बेलगाम ज़ुबान | बेलगाम ज़ुबान बहुत-से बने काम बिगाड़ देती है। |
| कपाल | माथा, सिर | सिर, माथा | गिरते ही उसके माथे पर चोट आ गई। |
| कसौटी | वह काला पत्थर जिस पर घिसकर सोना परखा जाता है; परख | कसौटी | यह परीक्षा उसकी मेहनत की कसौटी थी। |
अभ्यास
- मेरी समझ से
- मिलकर करें मिलान
- पंक्तियों पर चर्चा
- सोच-विचार के लिए
- शब्द-संपदा
- शब्द एक अर्थ अनेक
- आपकी बात
- सरगम
- आज की पहेली
- खोजबीन के लिए