मल्हार अध्याय 5 रहीम के दोहे के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-05

इस अध्याय के बारे में

पाठ में रहीम के सात दोहे दिए गए हैं। दोहा दो पंक्तियों का एक छोटा-सा छंद है, जिसमें बहुत बड़ी बात कह दी जाती है। रहीम के ये दोहे अवधी और ब्रजभाषा के रंग में रँगे हैं, इसलिए इनमें ‘तरुवर’, ‘सरवर’, ‘बिपति’, ‘जिह्वा’ जैसे पुराने रूप मिलते हैं। पहला दोहा — “रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि” — बड़े को देखकर छोटे को फेंक मत दो; जहाँ सुई का काम है वहाँ तलवार बेकार है। यानी हर छोटी-बड़ी चीज़ का अपना महत्व है । परोपकार पर दो दोहे हैं — पेड़ अपना फल नहीं खाता, सरोवर अपना पानी नहीं पीता; इसी तरह सज्जन धन दूसरों के काम के लिए जोड़ते हैं। और सच्चा मित्र वही है जो विपत्ति की कसौटी पर खरा उतरे। प्रेम और वाणी पर भी दो दोहे हैं — प्रेम का धागा झटके से मत तोड़ो, टूटने पर जुड़ भी जाए तो गाँठ पड़ जाती है; और बावली जीभ कुछ भी कह जाती है, पर मार कपाल (सिर) को खानी पड़ती है। “रहिमन पानी राखिये” वाले दोहे म

  1. मेरी समझ से
  2. मिलकर करें मिलान
  3. पंक्तियों पर चर्चा
  4. सोच-विचार के लिए
  5. शब्द-संपदा
  6. शब्द एक अर्थ अनेक
  7. आपकी बात
  8. सरगम
  9. आज की पहेली
  10. खोजबीन के लिए
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ