मल्हार अध्याय 6 मेरी माँ के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
यह पाठ कोई कहानी नहीं, आत्मकथा का अंश है। लिखने वाले हैं रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ — वही क्रांतिकारी जिन्होंने ‘सरफ़रोशी की तमन्ना’ जैसा तराना लिखा और जिन्हें मात्र तीस वर्ष की आयु में अंग्रेज़ सरकार ने फाँसी दे दी। यह आत्मकथा उन्होंने जेल में चोरी-छिपे लिखी और छिपाकर बाहर भिजवाई थी; साथियों ने इसे ‘निज जीवन की एक छटा’ नाम से छपवाया। पाठ के आरंभ में भगत सिंह की कही बात दी गई है — “श्री रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ बड़े होनहार नौजवान थे… यदि किसी और देश या किसी और समय पैदा हुए होते तो सेनाध्यक्ष बनते।” इसी से पता चलता है कि बिस्मिल का व्यक्तित्व कितना बड़ा था। माँ का चित्र — ग्यारह वर्ष की उम्र में ब्याह कर शाहजहाँपुर आईं, तब वे नितांत अशिक्षित थीं। पहले घर-गृहस्थी सँभालना सीखा, फिर बेटे के जन्म के पाँच-सात साल बाद स्वयं हिंदी पढ़ना शुरू किया — मुहल्ले की पढ़ी-लिखी सहेलियों से अक्षर-बोध करके। आगे चलकर वे
अभ्यास
- मेरी समझ से
- पंक्तियों पर चर्चा
- मिलकर करें मिलान
- सोच-विचार के लिए
- आत्मकथा की रचना
- शब्द-प्रयोग तरह-तरह के
- आपकी बात
- पुस्तकालय या इंटरनेट से
- शब्दों की बात
- आज की पहेली
- झरोखे से
- खोजबीन के लिए