कक्षा ६ हिंदी अध्याय 6 मेरी माँ के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
यह पाठ कोई कहानी नहीं, आत्मकथा का अंश है। लिखने वाले हैं रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ — वही क्रांतिकारी जिन्होंने ‘सरफ़रोशी की तमन्ना’ जैसा तराना लिखा और जिन्हें मात्र तीस वर्ष की आयु में अंग्रेज़ सरकार ने फाँसी दे दी। यह आत्मकथा उन्होंने जेल में चोरी-छिपे लिखी और छिपाकर बाहर भिजवाई थी; साथियों ने इसे ‘निज जीवन की एक छटा’ नाम से छपवाया। पाठ के आरंभ में भगत सिंह की कही बात दी गई है — “श्री रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ बड़े होनहार नौजवान थे… यदि किसी और देश या किसी और समय पैदा हुए होते तो सेनाध्यक्ष बनते।” इसी से पता चलता है कि बिस्मिल का व्यक्तित्व कितना बड़ा था। माँ का चित्र — ग्यारह वर्ष की उम्र में ब्याह कर शाहजहाँपुर आईं, तब वे नितांत अशिक्षित थीं। पहले घर-गृहस्थी सँभालना सीखा, फिर बेटे के जन्म के पाँच-सात साल बाद स्वयं हिंदी पढ़ना शुरू किया — मुहल्ले की पढ़ी-लिखी सहेलियों से अक्षर-बोध करके। आगे चलकर वे
त्वरित पुनरावृत्ति
| पाठ का शब्द | पाठ में अर्थ | कहाँ आया है | अपना एक वाक्य |
|---|---|---|---|
| आधिपत्य | कब्ज़ा, शासन, हुकूमत | “उस समय भारत पर अंग्रेज़ों का आधिपत्य था।” | कभी इस किले पर मराठों का आधिपत्य था। |
| आत्मकथा | अपने ही हाथों लिखी अपने जीवन की कहानी | “यहाँ प्रस्तुत है उसी आत्मकथा का एक अंश।” | गांधीजी की आत्मकथा का नाम ‘सत्य के प्रयोग’ है। |
| अक्षर-बोध | अक्षरों की पहचान, वर्णमाला का ज्ञान | “माताजी उनसे अक्षर-बोध करतीं।” | दादी ने पाँच साल की उम्र में ही मुझे अक्षर-बोध करा दिया था। |
| नितांत | बिल्कुल, पूरी तरह | “वह नितांत अशिक्षित एक ग्रामीण कन्या के समान थीं।” | यह बात नितांत असत्य है। |
| दृढ़ता | मज़बूती, अपनी बात पर टिके रहने का गुण | “मेरे जीवन में वह दृढ़ता उत्पन्न की।” | उसने दृढ़ता से कहा कि वह झूठ नहीं बोलेगा। |
| वकालतनामा | वह काग़ज़ जिस पर हस्ताक्षर करके मुकदमा लड़ने के लिए वकील नियुक्त किया जाता है | “पिताजी के हस्ताक्षर वकालतनामे पर कर दूँ।” | मुवक्किल ने वकालतनामे पर अपने दस्तख़त किए। |
| मेजिनी | इटली का देशभक्त नेता, जिसे उसकी माँ ने पग-पग पर सहारा दिया | “जैसी मेजिनी को उनकी माता ने की थी।” | मेजिनी की तरह अनेक नेताओं को उनकी माताओं ने गढ़ा है। |
| प्राणहानि / प्राणदंड | किसी की जान लेना / मृत्युदंड देना | “किसी की प्राणहानि न हो… अपने शत्रु को भी कभी प्राणदंड न देना।” | माँ का आदेश था कि लड़ाई हो, पर प्राणहानि न हो। |
| उऋण | कर्ज़ से मुक्त, ऋण चुका देने वाला | “सारे जीवन प्रयत्न करूँ तो भी तुमसे उऋण नहीं हो सकता।” | माता-पिता के ऋण से कोई उऋण नहीं हो सकता। |
| अवर्णनीय | जिसका वर्णन शब्दों में न किया जा सके | “…वह अवर्णनीय है।” | पहली बार समुद्र देखने का सुख अवर्णनीय था। |
| ताड़ना | डाँटना, सुधारने के लिए दंड देना | “तुम्हें यदि मुझे ताड़ना भी देनी हुई…” | गुरुजी की हल्की-सी ताड़ना भी हमें सुधार देती थी। |
| मंगलमयी | कल्याण करने वाली, शुभ | “तुम्हारी मंगलमयी मूर्ति का ध्यान आ जाता है।” | माँ की मंगलमयी छाया सिर पर हो तो डर कैसा। |
| कोख कलंकित न करना | माँ का नाम न डुबोना, माँ को लज्जित न होने देना | “उसने तुम्हारी कोख कलंकित न की।” | अच्छा काम करके ही हम माँ की कोख का मान रखते हैं। |
अभ्यास
- मेरी समझ से
- पंक्तियों पर चर्चा
- मिलकर करें मिलान
- सोच-विचार के लिए
- आत्मकथा की रचना
- शब्द-प्रयोग तरह-तरह के
- आपकी बात
- पुस्तकालय या इंटरनेट से
- शब्दों की बात
- आज की पहेली
- झरोखे से
- खोजबीन के लिए