मल्हार अध्याय 6 खोजबीन के लिए

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
माँ से संबंधित पाँच रचनाएँ पुस्तकालय से खोजें और अपनी पत्रिका बनाएँ।
उत्तर

यह एक परियोजना है, जिसमें दो काम हैं — पहले पाँच रचनाएँ खोजना, फिर उन्हें सजाकर अपनी पत्रिका बनाना

क. रचनाएँ कैसे खोजें —

  • पुस्तकालय में हिंदी की कविता-संग्रह और बाल-साहित्य वाली अलमारी देखिए; अनुक्रमणिका (index) में ‘माँ’, ‘माता’, ‘जननी’ शब्द ढूँढ़िए।
  • अपनी पिछली कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकें पलटिए — उनमें भी माँ पर रचनाएँ मिल जाएँगी।
  • घर के बड़ों से पूछिए — लोकगीतों में माँ पर बहुत कुछ है जो किसी किताब में नहीं मिलता। एक लोकगीत ज़रूर शामिल कीजिए, वह आपकी पत्रिका की सबसे अनोखी चीज़ होगी।
  • हर रचना का कवि/लेखक का नाम और पुस्तक का नाम साथ में लिख लीजिए — बिना स्रोत के रचना अधूरी है।

ख. खोजने के लिए कुछ जानी-मानी रचनाएँ —

रचनारचनाकारक्यों पढ़ें
‘ऐ मातृभूमि!’रामप्रसाद ‘बिस्मिल’आपके इसी पाठ में ‘झरोखे से’ के अंतर्गत दी गई है — पत्रिका की शुरुआत इसी से कीजिए।
‘मातृभूमि’सोहनलाल द्विवेदीआपकी इसी पुस्तक मल्हार का पहला पाठ। धरती को माँ कहकर पुकारने वाली कविता।
‘माँ कह एक कहानी’मैथिलीशरण गुप्त‘यशोधरा’ से लिया गया प्रसिद्ध अंश — बालक राहुल माँ से कहानी सुनने की ज़िद करता है।
‘मेरी माँ’ (आत्मकथा-अंश)रामप्रसाद ‘बिस्मिल’आपका यही पाठ — गद्य में लिखी गई माँ की सबसे मार्मिक याद।
‘जो बीत गई’ / माँ पर लिखे गीतहरिवंशराय बच्चन, सुभद्राकुमारी चौहान, महादेवी वर्मा आदिइन कवियों के संग्रहों में माँ और ममता पर अनेक रचनाएँ मिलेंगी।
अपने क्षेत्र का कोई लोकगीत या लोरीलोक (अज्ञात)दादी-नानी से सुनकर लिखिए — इसे लिख लेने से एक बोलती हुई रचना बच जाती है।

ग. पत्रिका कैसे बनाएँ —

  1. नाम रखिए: पत्रिका को एक नाम दीजिए, जैसे ‘माँ’, ‘ममता’, ‘आँचल’ या ‘मेरी माँ’। ऊपर अपनी कक्षा और वर्ष लिखिए।
  2. अनुक्रमणिका: पहले पन्ने पर पाँचों रचनाओं के नाम और पृष्ठ-संख्या लिखिए।
  3. हर रचना के लिए एक पन्ना: ऊपर रचना का नाम और रचनाकार, बीच में रचना, और नीचे दो-तीन पंक्तियों में — “मुझे इसमें क्या अच्छा लगा”
  4. सजाइए: हाथ से बनाया चित्र, रंगीन बॉर्डर या कोई पुरानी तस्वीर लगाइए। कटिंग-चिपकाई से पन्ना जीवित हो उठता है।
  5. अपना पन्ना जोड़िए: अंत में एक पन्ना अपनी लिखी कविता या अपनी माँ पर लिखे दस वाक्यों का रखिए। यही पत्रिका का सबसे क़ीमती पन्ना होगा।
  6. अंतिम पन्ना — आभार: जिन लोगों ने रचनाएँ ढूँढ़ने में मदद की, उनका नाम लिखिए।
पत्रिका बनाने से क्या सीखते हैं: रचनाएँ पढ़ लेना एक बात है, उन्हें चुनना, क्रम में लगाना और अपनी टिप्पणी जोड़ना दूसरी बात। इसी दूसरी बात में असली पढ़ाई है — क्योंकि तब आपको तय करना पड़ता है कि कौन-सी रचना पहले आए और क्यों। यही काम एक संपादक करता है।
कक्षा के लिए सुझाव: सभी समूहों की पत्रिकाएँ एक दिन कक्षा में मेज़ पर सजाइए और सब एक-दूसरे की पत्रिका पढ़ें। हर पत्रिका के अंत में एक ख़ाली पन्ना रखिए, जिस पर पढ़ने वाले अपनी दो पंक्ति की टिप्पणी लिख सकें।
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