मल्हार अध्याय 7 जलाते चलो के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-05

इस अध्याय के बारे में

कविता का नाम ‘जलाते चलो’ और कवि हैं द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी (1916–1998)। बाल साहित्य के चर्चित रचनाकारों में इनका नाम प्रमुखता से लिया जाता है। इनका लिखा गीत ‘हम सब सुमन एक उपवन के’ आज भी बहुत लोकप्रिय है। कविता किससे कही गई है — पूरी कविता में कवि ‘तुम’ कहकर मनुष्य को पुकारता है। वही मनुष्य, जिसने युगों पहले पहला दीप जलाकर अँधेरे को पहली चुनौती दी थी — “जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की, चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी।” मुख्य भाव — दीप जलाते चलो, यानी दूसरों की भलाई के काम करते चलो । तूफ़ान अनगिनत दीप बुझा चुका है, फिर भी हार दीप की नहीं हुई — क्योंकि बुझने वाला दीप भी अपनी ज्योति दूसरे को दे जाता है। प्रतीक — कविता में ‘दीप, ज्योति, लौ, सवेरा, पूर्णिमा’ अच्छाई, ज्ञान और आशा के प्रतीक हैं; ‘तिमिर, निशा, अमावस, तूफ़ान’ दुख, अज्ञान, बुराई और निराशा के। इसीलिए ‘निशा’ का अर्थ यहाँ केवल ‘रात’

  1. मेरी समझ से
  2. मिलकर करें मिलान
  3. पंक्तियों पर चर्चा
  4. सोच-विचार के लिए
  5. कविता की रचना
  6. मिलान
  7. अनुमान या कल्पना से
  8. शब्दों के रूप
  9. अर्थ की बात
  10. प्रतीक
  11. पंक्ति से पंक्ति
  12. सा/सी/से का प्रयोग
  13. आपकी बात
  14. अमावस्या और पूर्णिमा
  15. तिथिपत्र
  16. आज की पहेली
  17. खोजबीन के लिए
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