प्र1.
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए— (क) “दिये और तूफ़ान की यह कहानी / चली आ रही और चलती रहेगी” — दीपक और तूफ़ान की यह कौन-सी कहानी हो सकती है जो सदा से चली आ रही है?
उत्तर
यह दीपक और तूफ़ान की लड़ाई की कहानी है — जो न कभी शुरू होते देखी गई, न कभी ख़त्म होते।
कहानी कुछ यों है: जिस दिन मनुष्य ने पहला दीप जलाया, उसी दिन से हवा उसे बुझाने लगी। दीपक बुझा, मनुष्य ने फिर जलाया। तूफ़ान और तेज़ आया, और भी दीप बुझे — “अनगिन तुम्हारे पवन ने बुझाए।” पर मनुष्य ने हार नहीं मानी, वह फिर-फिर जलाता रहा। यही कहानी युगों से चली आ रही है और आगे भी चलती रहेगी।
इसका असली अर्थ — यहाँ दीपक और तूफ़ान दो प्रतीक हैं:
| दीपक किसका प्रतीक | तूफ़ान किसका प्रतीक | तो कहानी क्या हुई |
|---|---|---|
| अच्छाई, भलाई | बुराई, अन्याय | अच्छाई और बुराई का संघर्ष — जो हर युग में चलता रहा है |
| आशा, हिम्मत | निराशा, डर | मनुष्य के मन के भीतर चलने वाली लड़ाई |
| ज्ञान, विवेक | अज्ञान, अंधविश्वास | ज्ञान का प्रकाश फैलाने वालों और उसे रोकने वालों की कहानी |
| सत्य के लिए खड़ा एक व्यक्ति | उसे रोकने वाली सारी ताक़तें | हर युग के सत्यवादी और सुधारक की कहानी |
कवि ने ‘कहानी’ शब्द क्यों चुना: ‘लड़ाई’ कहते तो केवल हिंसा का चित्र बनता। ‘कहानी’ कहने से दो बातें एक साथ आ जाती हैं — यह बहुत पुरानी है, और यह आगे भी सुनाई जाती रहेगी। कहानी वही चलती है जो लोगों को याद रह जाए। यानी दीपक की जीत हर बार याद रखी गई है, इसीलिए वह कहानी बन गई।
अपनी कल्पना जोड़िए: यही कहानी आप अपने आसपास भी देख सकते हैं — परीक्षा की घबराहट (तूफ़ान) और रोज़ की थोड़ी-थोड़ी पढ़ाई (दीपक); गाँव में फैली कोई अफ़वाह (तूफ़ान) और सच बोलने वाला एक व्यक्ति (दीपक)। समूह में हर सदस्य ऐसा एक-एक उदाहरण सोचकर बताए।