प्र1.
स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलते-जुलते भाव वाली पंक्तियों को रेखा खींचकर जोड़िए— स्तंभ 1: 1. कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा। 2. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर। 3. मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी। 4. बिना स्नेह विद्युत-दिये जल रहे जो बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा। स्तंभ 2: 1. विश्व की भलाई का ध्यान रखे बिना प्रगति करने से कोई लाभ नहीं होगा। 2. विश्व में सुख-शांति क्यों कम होती जा रही है? 3. विश्व की समस्याओं से एक न एक दिन छुटकारा अवश्य मिलेगा। 4. दूसरों के सुख-चैन के लिए प्रयास करते रहिए।
उत्तर
सही मिलान — 1 → 3, 2 → 4, 3 → 2, 4 → 1। यहाँ एक भी जोड़ी आमने-सामने नहीं बैठती।
| स्तंभ 1 (कविता की पंक्ति) | मिलान | स्तंभ 2 (भाव) | क्यों यही जोड़ी बनी |
|---|---|---|---|
| 1. कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा। | → 3 | विश्व की समस्याओं से एक न एक दिन छुटकारा अवश्य मिलेगा। | ‘तिमिर’ = समस्याएँ, ‘किनारा मिलना’ = छुटकारा मिलना। दोनों में ‘कभी न कभी’ वाली आशा है। |
| 2. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर। | → 4 | दूसरों के सुख-चैन के लिए प्रयास करते रहिए। | ‘स्नेह भर-भर दिये जलाना’ = प्रेम से दूसरों के लिए काम करते रहना। दोनों में ‘करते रहो’ का आदेश है। |
| 3. मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी। | → 2 | विश्व में सुख-शांति क्यों कम होती जा रही है? | दोनों प्रश्न हैं और दोनों में वही ‘क्यों’ है। ‘दिन में अमावस’ = सब कुछ होते हुए भी सुख-शांति का घटना। |
| 4. बिना स्नेह विद्युत-दिये जल रहे जो बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा। | → 1 | विश्व की भलाई का ध्यान रखे बिना प्रगति करने से कोई लाभ नहीं होगा। | ‘विद्युत-दिये’ = विज्ञान की प्रगति, ‘बिना स्नेह’ = भलाई का ध्यान रखे बिना, ‘पथ न मिलना’ = कोई लाभ न होना। |
मिलान का आसान रास्ता: पहले वाक्य का प्रकार देखिए। स्तंभ 1 की तीसरी पंक्ति प्रश्नवाचक है (‘क्यों’) और स्तंभ 2 में भी केवल एक ही प्रश्न है (‘क्यों कम होती जा रही है?’) — यह जोड़ी बिना सोचे बन जाती है। इसी तरह स्तंभ 1 की दूसरी और चौथी पंक्ति आदेश हैं। ऐसे प्रकार मिलाने से आधा काम पहले ही निपट जाता है।
ध्यान रखिए: यहाँ शब्द नहीं, भाव मिलाने हैं। इसीलिए स्तंभ 2 में ‘दीपक’ या ‘तिमिर’ जैसे शब्द नहीं आए — वहाँ वही बात सीधी भाषा में लिखी है। कविता पढ़ते समय यह आदत बहुत काम आती है: हर पंक्ति को मन में सीधी भाषा में एक बार कह लीजिए।