मल्हार अध्याय 7 कविता की रचना

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर / कभी तो धरा का अँधेरा मिटेगा।” इन पंक्तियों को अपने शिक्षक के साथ मिलकर लय सहित गाने या बोलने का प्रयास कीजिए। … (क) इस कविता को एक बार फिर से पढ़िए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस कविता की विशेषताओं की सूची बनाइए, जैसे इस कविता की पंक्तियों को 2–4, 2–4 के क्रम में बाँटा गया है आदि।
उत्तर

पहले वह करके देखिए जो पुस्तक कहती है — दोनों पंक्तियाँ ताली देकर बोलिए। आप पाएँगे कि दोनों में लगभग बराबर समय लगता है। यही इस कविता की सबसे बड़ी विशेषता है और बाक़ी विशेषताएँ इसी के आसपास बुनी हुई हैं।

कविता की विशेषताओं की सूची —

विशेषताकविता से उदाहरण
1. 2–4 का क्रम — दो पंक्तियों का एक छोटा खंड, फिर चार पंक्तियों का एक बड़ा खंड; यही क्रम अंत तक चलता है (2–4–2–4–2–4–2–4–2)।“जलाते चलो… मिटेगा।” (2) फिर “भले शक्ति विज्ञान… निशा-सी।” (4)
2. हर पंक्ति में लगभग समान समय — गाने या बोलने में सब पंक्तियाँ एक-सी लगती हैं, इसी से कविता गेय और प्रभावशाली बन जाती है।पूरी कविता में — ताली देकर परखा जा सकता है।
3. एक-सी तुक (अंत्यानुप्रास) — दो-पंक्ति वाले हर खंड की अंतिम पंक्ति ‘-एगा’ पर समाप्त होती है।मिटेगा – सकेगा – मिलेगा – मिलेगा – मिलेगा
4. ‘कभी तो’ की पुनरावृत्ति — आशा जगाने वाला यह जोड़ा तीन बार लौटता है।“कभी तो धरा का…”, “कभी तो तिमिर का…”, “कभी तो निशा को…”
5. उपमा अलंकार — ‘सा/सी/से’ लगाकर तुलना।पूर्णिमा-सी, निशा-सी, स्वर्ण-सी
6. प्रतीकों का प्रयोग — शब्द अपने सीधे अर्थ से आगे कुछ और कहते हैं।दीप = भलाई; तिमिर, निशा = दुख और बुराई; सवेरा = अच्छे दिन
7. संबोधन शैली — कवि पूरे समय ‘तुम’ से बात कर रहा है, इसलिए कविता सीधे पाठक से जुड़ जाती है।“तुम्हीं ने”, “जलाते चलो”, “बुझाओ इन्हें”
8. प्रेरणा देने वाली क्रियाएँ — आदेश-रूप में, इसलिए कविता पढ़कर कुछ करने का मन होता है।जलाते चलो, बहाते चलो, बुझाओ
9. अनुप्रास — एक ही वर्ण की आवृत्ति से पंक्ति में संगीत आ जाता है।ली आ रही और लती रहेगी”; “ली जोल रही और लती रहेगी”
10. तत्सम और काव्य-शब्दों की छटा — साधारण शब्दों की जगह भारी-भरकम सुंदर शब्द।तिमिर, सरित, निशा, धरा, ज्योति, स्वर्ण, शिला, साक्षी
11. विरोधी जोड़ों की भरमार — दो उलटी चीज़ें आमने-सामने रखकर बात कही गई है।दीप × तूफ़ान, अमावस × पूर्णिमा, निशा × सवेरा, जलना × बुझना
12. दो-पंक्ति वाले खंडों का अंत ‘॥’ से — यह चिह्न बताता है कि यहाँ एक भाव पूरा हो गया।“…यों न पथ मिल सकेगा॥”
‘समान समय’ का रहस्य क्या है: कविता की हर पंक्ति में मात्राओं की संख्या लगभग बराबर रखी जाती है। मात्रा यानी बोलने में लगने वाला समय — छोटी ध्वनि (जैसे ‘क’) में एक मात्रा, बड़ी ध्वनि (जैसे ‘का’) में दो। जब हर पंक्ति में मात्राएँ बराबर हों, तो सब पंक्तियाँ एक ही ताल पर गाई जा सकती हैं। इसी कारण यह कविता याद भी जल्दी हो जाती है।
प्र2.
(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर

यह समूह-कार्य है। इसमें अच्छा प्रदर्शन करने का तरीक़ा यह है —

  1. सूची को क्रम दीजिए: पहले वे विशेषताएँ जो सुनाई देती हैं (लय, तुक, पुनरावृत्ति), फिर वे जो दिखाई देती हैं (2–4 का क्रम), और अंत में वे जो समझ में आती हैं (प्रतीक, अलंकार)।
  2. हर विशेषता के साथ प्रमाण दीजिए: केवल “इसमें तुक है” मत कहिए — “मिटेगा, सकेगा, मिलेगा — देखिए, तीनों एक-सी तुक हैं” कहिए।
  3. सुनाकर दिखाइए: लय वाली बात केवल बोलकर नहीं समझाई जा सकती। समूह के दो साथी दो पंक्तियाँ ताली के साथ गाकर सुनाएँ — तब बात सबको तुरंत समझ आएगी।
  4. दूसरे समूहों की सूची से मिलाइए: जो बात आपकी सूची में नहीं है, उसे नोट कर लीजिए। अंत में कक्षा की एक साझा सूची श्यामपट्ट पर बन जाए — वही सबसे पूरी सूची होगी।
नमूना उत्तर (प्रस्तुति की शुरुआत ऐसे कीजिए):
“हमारे समूह को इस कविता में सबसे पहले यह दिखा कि इसकी पंक्तियाँ 2–4, 2–4 के क्रम में बँटी हैं — दो पंक्ति, फिर चार पंक्ति, और यही अंत तक चलता है। दूसरी बात यह कि हर दो-पंक्ति वाले खंड की अंतिम पंक्ति ‘-एगा’ पर ख़त्म होती है — मिटेगा, सकेगा, मिलेगा। तीसरी बात, ‘कभी तो’ पूरी कविता में तीन बार लौटता है और हर बार आशा और गहरी हो जाती है। और चौथी बात — पूरी कविता में कवि ‘तुम’ कहकर सीधे हमसे बात कर रहे हैं, इसीलिए यह कविता उपदेश नहीं लगती, बुलावा लगती है। अब हमारे दो साथी पहली दो पंक्तियाँ ताली के साथ गाकर सुनाएँगे।”
साझा करने से क्या मिलता है: एक समूह को लय दिखती है, दूसरे को प्रतीक, तीसरे को अनुप्रास। जब सब मिलकर बोलते हैं, तो एक ही कविता के दस दरवाज़े खुल जाते हैं — और यह अकेले पढ़ने से कभी नहीं हो पाता।
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