प्र1.
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए— “दिये और तूफ़ान की यह कहानी / चली आ रही और चलती रहेगी, / जली जो प्रथम बार लौ दीप की / स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी॥ / रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि / कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा॥”
उत्तर
पहले कठिन शब्द — लौ = दीपक की ज्वाला; स्वर्ण = सोना; धरा = धरती; निशा = रात; सवेरा = सुबह।
सीधा अर्थ — दीपक और तूफ़ान की यह लड़ाई बहुत पुरानी है और आगे भी चलती रहेगी। दीपक की जो लौ सबसे पहली बार जली थी, वह सोने की तरह चमकती हुई आज भी जल रही है और आगे भी जलती रहेगी। यदि धरती पर एक भी दिया बचा रहा, तो किसी न किसी दिन रात का अंत होगा और सवेरा अवश्य आएगा।
भाव — कवि यहाँ दो चीज़ों को आमने-सामने खड़ा करता है — दीपक और तूफ़ान। दीपक यानी अच्छाई, आशा और भलाई; तूफ़ान यानी कठिनाई, बुराई और निराशा। दोनों की टक्कर हमेशा से होती आई है। पर कवि की बात का असली दम अंतिम दो पंक्तियों में है — जीत के लिए हज़ार दीपकों की ज़रूरत नहीं, एक दिया भी बचा रहे तो काफ़ी है। यानी दुनिया में एक भी भला आदमी बचा रहे, तो अच्छाई कभी नहीं हारेगी।
| पंक्ति | ऊपरी अर्थ | भीतरी अर्थ (प्रतीक) |
|---|---|---|
| दिये और तूफ़ान की यह कहानी चली आ रही… | हवा दीपक बुझाती है, मनुष्य फिर जलाता है | अच्छाई और बुराई का संघर्ष सदा से चला आ रहा है |
| जली जो प्रथम बार लौ दीप की, स्वर्ण-सी जल रही… | पहली बार जली लौ आज भी जल रही है | भलाई की भावना एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक जाती रही, बुझी नहीं |
| रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि… | एक दिया भी बचा रहे तो अँधेरा हारेगा | एक भी भला व्यक्ति बचा रहे तो संसार से निराशा मिट सकती है |
‘स्वर्ण-सी’ ही क्यों कहा: सोने की दो विशेषताएँ हैं — वह मैला नहीं होता और घटता नहीं। हज़ारों साल पुराना सोना भी वैसा ही चमकता है। कवि कहना चाहते हैं कि भलाई की वह पहली लौ भी न मैली हुई, न कम हुई — आज भी उतनी ही चमकीली है। यहाँ ‘सी’ लगाकर तुलना की गई है, इसलिए यह उपमा अलंकार है।
कक्षा में करने के लिए: इन पंक्तियों को दो समूहों में बाँटकर पढ़िए — एक समूह ‘तूफ़ान’ की तरह ज़ोर से, दूसरा ‘दीपक’ की तरह धीमे पर स्थिर स्वर में। सुनने पर आप स्वयं महसूस करेंगे कि धीमा स्वर भी अंत तक टिका रहता है — यही कविता का संदेश है।