मल्हार अध्याय 7 अर्थ की बात

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) “जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर” — इस पंक्ति में ‘चलो’ के स्थान पर ‘रहो’ शब्द रखकर पढ़िए। इस शब्द के बदलने से पंक्ति के अर्थ में क्या अंतर आ रहा है? अपने समूह में चर्चा कीजिए।
उत्तर

दोनों पंक्तियाँ एक बार बोलकर देखिए —

“जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर”
“जलाते रहो ये दिये स्नेह भर-भर”

अर्थ बहुत बदल नहीं जाता, पर भाव बदल जाता है — और कविता में यही असली बात है।

शब्दउसमें क्या भाव हैकैसा चित्र बनता है
चलो (कवि का चुना हुआ)निरंतरता + गति, आगे बढ़ना, यात्राकोई रुका नहीं है — लोग चलते जा रहे हैं और चलते-चलते दीप जलाते जा रहे हैं। रास्ता आगे बढ़ता जाता है।
रहोकेवल निरंतरता, गति नहींकोई एक जगह खड़ा या बैठा है और वहीं दीप जलाता जा रहा है। काम तो चल रहा है, पर आगे कोई नहीं बढ़ रहा।

इसलिए ‘चलो’ ही उपयुक्त है — क्योंकि पूरी कविता एक यात्रा की कविता है। इसमें नदी है (“तिमिर की सरित”), नाव है (“बना दीप की नाव”), किनारा है (“कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा”) और आगे बढ़ने का आदेश भी है (“बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर”)। ‘रहो’ रख देने से यह पूरी यात्रा रुक जाती।

एक बात और: ‘चलो’ में साथ चलने का भाव भी है — जैसे कोई हाथ पकड़कर कह रहा हो, “आओ, चलते हैं।” ‘रहो’ में यह अपनापन नहीं, केवल आदेश है। कविता पाठक को साथ लेकर चलना चाहती है, इसलिए ‘चलो’ ही ठीक बैठता है।
ख़ुद करके देखिए: ‘बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर’ में भी ‘चलो’ की जगह ‘रहो’ रखकर पढ़िए — “बहाते रहो नाव तुम वह निरंतर।” नाव तो चल रही है, पर लगता है जैसे वह एक ही जगह पानी में हिल रही हो, किनारे की ओर बढ़ ही न रही हो। इसी छोटे-से अंतर को पहचानना कविता पढ़ना सीखना है।
प्र2.
(ख) कविता में प्रत्येक शब्द का अपना विशेष महत्व होता है। … नीचे कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। पंक्तियों के सामने लगभग समान अर्थों वाले कुछ शब्द दिए गए हैं। आप उनमें से वह शब्द चुनिए, जो उस पंक्ति में सबसे उपयुक्त रहेगा— 1. बहाते चलो ______ तुम वह निरंतर (नैया, नाव, नौका) / कभी तो तिमिर का ______ मिलेगा॥ (तट, तीर, किनारा) 2. रहेगा ______ पर दिया एक भी यदि (धरा, धरती, भूमि) / कभी तो निशा को ______ मिलेगा॥ (प्रातः, सुबह, सवेरा) 3. जला दीप पहला तुम्हीं ने ______ की (अंधकार, तिमिर, अँधेरे) / चुनौती ______ बार स्वीकार की थी। (प्रथम, अव्वल, पहली)
उत्तर

सही शब्द वही हैं जो कवि ने चुने थे। भरी हुई पंक्तियाँ —

1. बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर
   कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा॥

2. रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि
   कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा॥

3. जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की
   चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी।
रिक्त स्थानसही शब्दक्यों यही, बाक़ी क्यों नहीं
बहाते चलो ___ तुम वह निरंतरनाव‘नैया’ और ‘नौका’ में तीन ध्वनियाँ लगती हैं, ‘नाव’ में दो — लय बिगड़ जाती। ‘नौका’ किताबी लगता है, ‘नैया’ भजन जैसा; ‘नाव’ सीधा और सबका शब्द है।
कभी तो तिमिर का ___ मिलेगा॥किनारा‘किनारा’ की तुक ‘सवेरा’ और ‘अँधेरा’ से मिलती है और मात्रा भी पूरी बैठती है। ‘तट’ और ‘तीर’ बहुत छोटे हैं, पंक्ति अधूरी लगेगी।
रहेगा ___ पर दिया एक भी यदिधराकविता की पहली पंक्ति में भी ‘धरा’ ही है — “कभी तो धरा का अँधेरा मिटेगा।” वही शब्द लौटने से कविता जुड़ी रहती है। ‘धरती’ और ‘भूमि’ से मात्रा बढ़ जाती है।
कभी तो निशा को ___ मिलेगा॥सवेरा‘निशा’ तत्सम है, पर उसके सामने ‘सवेरा’ रखने से चित्र गरमाहट भरा हो जाता है। साथ ही ‘सवेरा – मिलेगा’ की लय ‘अँधेरा – मिटेगा’ से जुड़ जाती है। ‘प्रातः’ पंक्ति को भारी कर देता, ‘सुबह’ बहुत छोटा पड़ता।
जला दीप पहला तुम्हीं ने ___ कीतिमिरपूरी कविता में अँधेरे के लिए यही शब्द बार-बार आता है — तिमिर की सरित, तिमिर की शिला, तिमिर का किनारा। एक ही प्रतीक-शब्द दोहराने से भाव गहरा होता है।
चुनौती ___ बार स्वीकार की थी।प्रथमउसी पंक्ति में ‘पहला’ पहले ही आ चुका है (“जला दीप पहला”)। एक ही पंक्ति में ‘पहला… पहली’ दोहराना भद्दा लगता। ‘अव्वल’ उर्दू-रंग का शब्द है, यहाँ के तत्सम वातावरण में नहीं बैठता।
तीन कसौटियाँ याद रखिए: कविता में शब्द चुनते समय हर बार यही तीन बातें देखी जाती हैं — (1) मात्रा यानी लय, (2) तुक, (3) कविता के बाक़ी शब्दों से मेल। ‘नाव’ लय के कारण जीता, ‘किनारा’ तुक के कारण, और ‘तिमिर’ बाक़ी शब्दों से मेल के कारण। अर्थ तो तीनों विकल्पों का लगभग एक ही था।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ