मल्हार अध्याय 7 तिथिपत्र

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
नीचे तिथिपत्र के एक महीने का पृष्ठ दिया गया है (जनवरी 2023, 11-30 पौष 1-11 माघ, शक 1944)। इसे ध्यान से देखिए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए— (क) दिए गए महीने में कुल कितने दिन हैं?
उत्तर

दिए गए महीने में कुल 31 दिन हैं।

तिथिपत्र में सबसे बड़ी संख्या 31 है — मंगलवार वाली पंक्ति के अंतिम खाने में (31, दशमी शुक्ल)। और महीने का नाम है जनवरी 2023

पहला दिन = 1 जनवरी, रविवार
अंतिम दिन = 31 जनवरी, मंगलवार
कुल दिन = 31
याद रखने का तरीक़ा: जनवरी, मार्च, मई, जुलाई, अगस्त, अक्तूबर और दिसंबर — इन सात महीनों में 31 दिन होते हैं। अप्रैल, जून, सितंबर और नवंबर में 30, और फ़रवरी में 28 (लीप वर्ष में 29)।
प्र2.
(ख) पूर्णिमा और अमावस्या किस दिनाँक और वार को पड़ रही है?
उत्तर

तिथिपत्र में सीधे यही दो शब्द ढूँढ़ने हैं — जहाँ कोई तिथि का नाम नहीं, बल्कि सीधे ‘पूर्णिमा’ या ‘अमावस्या’ लिखा है।

तिथिदिनाँकवारतिथिपत्र में कहाँ
पूर्णिमा6 जनवरी 2023शुक्रवारशुक्रवार वाली पंक्ति का पहला खाना — “6, पूर्णिमा”
अमावस्या21 जनवरी 2023शनिवारशनिवार वाली पंक्ति का तीसरा खाना — “21, अमावस्या”
जाँच कीजिए: पूर्णिमा और अमावस्या के बीच लगभग आधा महीना होना चाहिए। यहाँ 6 से 21 तक 15 दिन हैं — बिल्कुल ठीक। इससे पता चलता है कि उत्तर सही है। यदि आपको दोनों के बीच 5 या 25 दिन मिलें, तो समझिए कहीं भूल हुई है।
एक और बात: 6 जनवरी के बाद 7 जनवरी से ‘प्रतिपदा (कृष्ण)’ शुरू हो जाती है — यानी पूर्णिमा के तुरंत बाद कृष्ण पक्ष लग गया। और 21 जनवरी (अमावस्या) के बाद 22 जनवरी को ‘प्रतिपदा (शुक्ल)’ है — यानी अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष। यही वह नियम है जो आपने पिछली गतिविधि में पढ़ा।
प्र3.
(ग) कृष्ण पक्ष की सप्तमी और शुक्ल पक्ष की सप्तमी में कितने दिनों का अंतर है?
उत्तर

दोनों सप्तमियाँ तिथिपत्र में शनिवार वाली पंक्ति में हैं —

कृष्ण पक्ष की सप्तमी = 14 जनवरी, शनिवार
शुक्ल पक्ष की सप्तमी = 28 जनवरी, शनिवार
अंतर = 28 − 14 = 14 दिन

उत्तर — 14 दिनों का अंतर है।

यह अपने आप जाँचा जा सकता है: दोनों तिथियाँ शनिवार को ही पड़ रही हैं। सप्ताह में सात दिन होते हैं, इसलिए एक ही वार दोबारा आने का मतलब है 7 का गुणज — यहाँ 14 = 7 × 2, यानी ठीक दो सप्ताह। तिथिपत्र में एक ही पंक्ति में आगे-पीछे के खाने हमेशा 7 दिन के अंतर पर होते हैं।
सोचने के लिए: एक पक्ष 15 दिन का होता है, फिर दोनों सप्तमियों में 15 दिन का अंतर क्यों नहीं? क्योंकि इस महीने कृष्ण पक्ष में एक तिथि का क्षय हो गया — 20 जनवरी को त्रयोदशी है और अगले ही दिन 21 को अमावस्या; बीच की चतुर्दशी किसी दिन पर नहीं पड़ी। इसीलिए अंतर 15 के बजाय 14 दिन रह गया। तिथियाँ सूर्योदय के समय की स्थिति से तय होती हैं, इसलिए कभी-कभी एक तिथि दो दिन चलती है और कभी कोई तिथि छूट जाती है — जैसे 8 और 9 जनवरी, दोनों दिन ‘द्वितीया (कृष्ण)’ लिखा है।
प्र4.
(घ) इस महीने में कृष्ण पक्ष में कुल कितने दिन हैं?
उत्तर

कृष्ण पक्ष पूर्णिमा के अगले दिन से शुरू होकर अमावस्या तक चलता है। तिथिपत्र में देखिए —

कृष्ण पक्ष का पहला दिन = 7 जनवरी (प्रतिपदा, कृष्ण)
कृष्ण पक्ष का अंतिम दिन = 21 जनवरी (अमावस्या)
कुल दिन = 21 − 7 + 1 = 15 दिन

उत्तर — इस महीने कृष्ण पक्ष में कुल 15 दिन हैं (7 जनवरी से 21 जनवरी तक)।

दिनाँकतिथिदिनाँकतिथि
7प्रतिपदा (कृष्ण)15अष्टमी (कृष्ण)
8द्वितीया (कृष्ण)16नवमी (कृष्ण)
9द्वितीया (कृष्ण)17दशमी (कृष्ण)
10तृतीया (कृष्ण)18एकादशी (कृष्ण)
11चतुर्थी (कृष्ण)19द्वादशी (कृष्ण)
12पंचमी (कृष्ण)20त्रयोदशी (कृष्ण)
13षष्ठी (कृष्ण)21अमावस्या
14सप्तमी (कृष्ण)
गिनती का नियम: 7 से 21 तक कितने दिन? केवल 21 − 7 = 14 करना ग़लत होगा, क्योंकि इससे पहला दिन छूट जाता है। इसलिए हमेशा अंतिम − पहला + 1 कीजिए। जाँच भी कर लीजिए — इस महीने शुक्ल पक्ष के दिन हैं 1 से 6 (6 दिन) और 22 से 31 (10 दिन), यानी 16 दिन; 16 + 15 = 31, यानी पूरा महीना। उत्तर ठीक है।
प्र5.
(ङ) ‘वसंत पंचमी’ की तिथि बताइए।
उत्तर

तिथिपत्र में गुरुवार वाली पंक्ति के अंतिम भरे खाने में लिखा है — “26, वसंत पंचमी (शुक्ल)”।

प्रश्नउत्तर
दिनाँक26 जनवरी 2023
वारगुरुवार
तिथिपंचमी, शुक्ल पक्ष
भारतीय मासमाघ — अर्थात माघ शुक्ल पंचमी

माघ मास कैसे पता चला — तिथिपत्र के शीर्षक में लिखा है “11-30 पौष, 1-11 माघ, शक 1944”। यानी 1 से 20 जनवरी तक पौष मास (11 से 30 पौष) है और 21 से 31 जनवरी तक माघ मास (1 से 11 माघ)। 26 जनवरी माघ में आता है, इसलिए यह माघ शुक्ल पंचमी हुई।

जानने योग्य: वसंत पंचमी वसंत ऋतु के आगमन का उत्सव है और इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। इसी दिन 2023 में 26 जनवरी — गणतंत्र दिवस — भी पड़ा था। ध्यान दीजिए, अंग्रेज़ी तिथि हर साल एक ही रहती है (26 जनवरी), पर वसंत पंचमी की अंग्रेज़ी तिथि हर साल बदलती है — क्योंकि वह चंद्रमा की तिथि से तय होती है, सूर्य के कैलेंडर से नहीं।
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