प्र1.
“घिरी आ रही है अमावस निशा-सी / स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी” — इन पंक्तियों में ‘सी’ शब्द समानता दिखाने के लिए प्रयोग किया गया है। ‘सा/सी/से’ का प्रयोग जब समानता दिखाने के लिए किया जाता है तो इनसे पहले योजक चिह्न (-) का प्रयोग किया जाता है। अब आप भी विभिन्न शब्दों के साथ ‘सा/सी/से’ का प्रयोग करते हुए अपनी कल्पना से पाँच वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर
पहले नियम साफ़ कर लीजिए — ‘सा/सी/से’ जिस शब्द के बारे में बता रहे हों, उसी के लिंग-वचन के अनुसार बदलते हैं, और उनसे पहले योजक चिह्न (-) लगता है।
| रूप | कब लगता है | उदाहरण |
|---|---|---|
| -सा | पुल्लिंग, एकवचन | उसका चेहरा चाँद-सा चमक रहा था। |
| -सी | स्त्रीलिंग, एकवचन | दादी की बातें शहद-सी मीठी लगती हैं। |
| -से | पुल्लिंग बहुवचन | लू के थपेड़े आग-से लग रहे थे। |
पाँच वाक्य (नमूना उत्तर) —
- परीक्षा का परिणाम सुनते ही उसका चेहरा फूल-सा खिल उठा।
- माँ के हाथ की रोटी गरम-गरम, रुई-सी मुलायम थी।
- वह लड़का हिरन-सा तेज़ दौड़ता है, कोई उसे पकड़ नहीं पाता।
- बारिश के बाद खेत हरी चादर-से दिखाई देने लगे।
- गुरुजी की वाणी में गंगा-सी निर्मलता थी।
कविता के तीनों उदाहरण भी देख लीजिए —
“कि जिससे अमावस बने पूर्णिमा-सी” — अमावस पूर्णिमा जैसी उजली हो जाए
“घिरी आ रही है अमावस निशा-सी” — अमावस रात जैसी घिर रही है
“स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी” — लौ सोने जैसी चमकती हुई जल रही है
“घिरी आ रही है अमावस निशा-सी” — अमावस रात जैसी घिर रही है
“स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी” — लौ सोने जैसी चमकती हुई जल रही है
यह अलंकार का दरवाज़ा है: जब दो चीज़ों की समानता ‘सा/सी/से’, ‘जैसा’, ‘समान’, ‘सदृश’ जैसे शब्दों से दिखाई जाए, तो वहाँ उपमा अलंकार होता है। इसमें चार बातें रहती हैं — जिसकी तुलना हो रही है (लौ), जिससे तुलना हो रही है (स्वर्ण), समानता का शब्द (सी) और साझा गुण (चमक)। कविता की इन तीनों पंक्तियों में उपमा अलंकार है।
एक चेतावनी: ‘सा/सी/से’ हमेशा समानता के लिए नहीं आते। “थोड़ा-सा पानी”, “बहुत-से लोग” में ये मात्रा बताते हैं, तुलना नहीं। इसलिए वाक्य बनाते समय जाँच लीजिए कि आपके वाक्य में सचमुच दो चीज़ों की तुलना हो रही है या नहीं।