मल्हार अध्याय 7 आपकी बात

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) “रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि / कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा” — यदि हर व्यक्ति अपना कर्तव्य समझ ले और दूसरों की भलाई के लिए कार्य करे तो पूरी दुनिया सुंदर बन जाएगी। आप भी दूसरों के लिए प्रतिदिन बहुत-से अच्छे कार्य करते होंगे। अपने उन कार्यों के बारे में बताइए।
उत्तर

यह आपके अपने जीवन का प्रश्न है, इसलिए उत्तर भी आपका अपना होगा। पर अच्छा उत्तर लिखने का तरीक़ा यह है —

क्या-क्या शामिल कीजिए —

  • छोटे और सच्चे काम लिखिए, बड़े-बड़े दावे नहीं। पानी पिलाना, रास्ता बताना, किसी की गिरी चीज़ उठाकर देना — ये सब ‘दिये’ हैं।
  • तीन जगहों से उदाहरण लीजिए — घर, विद्यालय, मुहल्ला/रास्ता। इससे उत्तर पूरा लगता है।
  • हर काम के साथ एक पंक्ति में लिखिए कि उससे किसे क्या फ़ायदा हुआ — यही उत्तर की जान है।
  • अंत में कविता से जोड़ दीजिए — बताइए कि यही आपका ‘दिया’ है।
कहाँऐसे काम जो सचमुच किए जा सकते हैं
घर मेंमाँ के साथ काम में हाथ बँटाना, छोटे भाई-बहन को पढ़ाना, दादा-दादी को अख़बार पढ़कर सुनाना, बीमार के पास बैठना
विद्यालय मेंजिस साथी की कॉपी छूट गई हो उसे अपनी कॉपी दिखाना, नए विद्यार्थी से बात करना, कक्षा साफ़ रखना, नल बंद करना, बिजली बचाना
मुहल्ले/रास्ते मेंपक्षियों के लिए पानी रखना, पौधे में पानी डालना, बुज़ुर्ग को सड़क पार कराना, कूड़ा कूड़ेदान में डालना, किसी को रास्ता बताना
नमूना उत्तर:
“मैं कोई बहुत बड़ा काम तो नहीं करता, पर कुछ छोटे काम रोज़ करता हूँ। सुबह उठकर छत पर रखे मिट्टी के कटोरे में पक्षियों के लिए पानी भर देता हूँ — गर्मियों में गौरैया और कबूतर दिन भर वहीं आते रहते हैं। स्कूल में मेरे साथ बैठने वाले साथी की आँखें कमज़ोर हैं, इसलिए मैं श्यामपट्ट पर लिखी बातें धीरे-धीरे बोलकर उसे लिखवा देता हूँ; अब उसकी कॉपी कभी अधूरी नहीं रहती। घर लौटते समय मैं दादी को अख़बार की मुख्य ख़बरें पढ़कर सुनाता हूँ, क्योंकि उन्हें छोटे अक्षर दिखाई नहीं देते — उस समय उनका चेहरा खिल उठता है। और छुट्टी के दिन मैं छोटी बहन को गिनती और पहाड़े याद कराता हूँ।

मुझे लगता है ये सब बहुत छोटे-छोटे दिये हैं। पर कविता में भी तो यही कहा गया है — ‘रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि, कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।’ इसलिए मैं इन्हें जलाए रखना चाहता हूँ।”
छोटे काम ही क्यों लिखने चाहिए: कवि ने भी बड़े-बड़े काम नहीं कहे — उन्होंने कहा ‘दिया एक भी’। एक दिये की रोशनी कितनी-सी होती है! पर कविता की पूरी आशा उसी एक दिये पर टिकी है। इसी तरह आपका उत्तर भी छोटे, सच्चे कामों से ही सुंदर बनेगा।
प्र2.
(ख) इस कविता में निराश न होने, चुनौतियों का सामना करने और सबके सुख के लिए कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया है। यदि आपको अपने किसी मित्र को निराश न होने के लिए प्रेरित करना हो तो आप क्या करेंगे? क्या कहेंगे? अपने समूह में बताइए।
उत्तर

इस प्रश्न के दो भाग हैं — क्या करेंगे और क्या कहेंगे। दोनों का उत्तर अलग-अलग दीजिए, तभी उत्तर पूरा होगा।

क. क्या करेंगे (काम) —

  1. पहले सुनिए, सलाह बाद में दीजिए। निराश मित्र को सबसे पहले यह चाहिए कि कोई उसकी बात पूरी सुन ले।
  2. उसे अकेला मत छोड़िए। साथ बैठिए, साथ खेलिए, साथ घर तक चलिए।
  3. उसकी एक अच्छाई याद दिलाइए — कोई ऐसा काम जो उसने अच्छा किया था।
  4. समस्या को छोटे टुकड़ों में बाँट दीजिए और एक छोटा-सा पहला क़दम साथ मिलकर कीजिए — जैसे एक अध्याय साथ पढ़ लेना।
  5. यदि बात गंभीर लगे तो शिक्षक या घर के बड़ों को बताइए — यह चुगली नहीं, मदद है।

ख. क्या कहेंगे (बात) — उपदेश मत दीजिए। ‘तुम कमज़ोर हो’, ‘मैंने पहले ही कहा था’ जैसे वाक्य कभी मत बोलिए।

नमूना उत्तर:
“मेरा मित्र गणित की परीक्षा में कम अंक आने से बहुत निराश था और कहने लगा कि अब उससे गणित कभी नहीं होगा। मैंने पहले उसकी पूरी बात सुनी, बीच में नहीं टोका। फिर मैंने कहा —
‘एक परीक्षा तुम्हारा पूरा भविष्य तय नहीं करती। याद है, पिछली बार तुमने ही मुझे भिन्न वाला सवाल समझाया था? जिसे भिन्न आती है, उसे गणित आती है — बस अभ्यास कम रह गया। चलो, आज से रोज़ आधा घंटा हम दोनों साथ बैठकर पाँच सवाल हल करेंगे। अगली बार देखना क्या होता है।’
इसके बाद हम सचमुच रोज़ आधा घंटा साथ बैठने लगे। एक महीने बाद उसका आत्मविश्वास लौट आया। मुझे लगा कि यही ‘दिया जलाना’ है — बस दिया मिट्टी का नहीं, हिम्मत का था।”
कविता इसमें कैसे मदद करती है: कविता कहती है कि तूफ़ान ने अनगिनत दीप बुझाए, फिर भी कहानी ख़त्म नहीं हुई — क्योंकि हर बार कोई फिर से जला देता था। निराश मित्र का दीप बुझा है; आपका काम उपदेश देना नहीं, अपने दीये से उसका दीया जला देना है। कविता की पंक्ति यहीं सच होती है — “मगर बुझ स्वयं ज्योति जो दे गए वे, उसी से तिमिर को उजेला मिलेगा।”
प्र3.
(ग) क्या आपको कभी किसी ने कोई कार्य करने के लिए प्रेरित किया है? कब? कैसे? उस घटना के बारे में बताइए।
उत्तर

यह आपकी अपनी स्मृति का प्रश्न है। पर एक अच्छी घटना सुनाने का ढाँचा हमेशा एक ही होता है —

क्रमक्या बताना हैउदाहरण
1. कबघटना का समय और अवसर“पिछले वर्ष, वार्षिक उत्सव से एक सप्ताह पहले…”
2. क्या हुआ थावह स्थिति जिसमें आप हिचक रहे थे या हार मान चुके थे“मैं मंच पर बोलने से डरता था और नाम वापस लेना चाहता था।”
3. किसने प्रेरित कियाव्यक्ति का नाम/रिश्ता“हमारी हिंदी शिक्षिका ने…”
4. कैसे कियाउन्होंने क्या कहा और क्या किया — दोनों“उन्होंने डाँटा नहीं, रोज़ दस मिनट अभ्यास कराया और कहा…”
5. फिर क्या हुआपरिणाम और आपके मन पर असर“मैंने भाषण दिया और अब मुझे मंच से डर नहीं लगता।”
नमूना उत्तर:
“पिछले वर्ष वार्षिक उत्सव में मेरा नाम भाषण के लिए लिखा गया था। मुझे मंच से बहुत डर लगता था — सोचकर ही हाथ-पैर ठंडे हो जाते थे। मैंने तय कर लिया कि नाम कटवा दूँगा।
हमारी हिंदी शिक्षिका ने जब यह सुना तो उन्होंने डाँटा नहीं। उन्होंने केवल इतना कहा — ‘जिस लड़के ने कक्षा में खड़े होकर पूरी कविता सुना दी थी, वह मंच पर क्यों नहीं बोल सकता? वहाँ भी तो वही कक्षा बैठी होगी, बस थोड़ी बड़ी।’ फिर उन्होंने रोज़ अवकाश के समय दस मिनट मुझसे अभ्यास कराया — पहले उनके सामने, फिर पाँच बच्चों के सामने, फिर पूरी कक्षा के सामने।
उत्सव के दिन मैंने भाषण दिया। हाथ थोड़ा काँपा ज़रूर, पर मैं पूरा बोला और सबने तालियाँ बजाईं। उस दिन मुझे समझ आया कि प्रेरणा वह नहीं होती जो कहे ‘डरो मत’, बल्कि वह होती है जो छोटे-छोटे क़दम साथ चलकर दिखा दे। मेरी शिक्षिका ने वही किया — उन्होंने मेरे भीतर का बुझा दिया फिर से जला दिया।”
ऐसी घटना क्यों लिखवाई जाती है: कविता कहती है कि दीप अपने आप नहीं जलता — कोई उसे जलाता है। जब आप अपने जीवन की ऐसी घटना याद करते हैं, तो कविता किताब से निकलकर आपके अनुभव में उतर आती है। और तब आपको यह भी समझ आता है कि कल आपको किसी और का दीया जलाना है।
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