प्र1.
कविता संबंधित कुछ रचनाएँ दी गई हैं, इन्हें पुस्तक में दिए गए क्यू.आर. कोड की सहायता से पढ़ें, देखें व समझें। • हम सब सुमन एक उपवन के • बढ़े चलो • रोज़ बदलता कैसे चाँद भाग 1 • रोज़ बदलता कैसे चाँद भाग 2
उत्तर
पुस्तक के पहले पृष्ठ पर बने क्यू.आर. कोड को अपने शिक्षक या घर के बड़ों की सहायता से मोबाइल से स्कैन कीजिए। नीचे बताया गया है कि हर रचना में क्या देखना-सुनना है और उसे इस पाठ से कैसे जोड़ना है।
| रचना | यह क्या है | इस पाठ से क्या जुड़ता है | देखते-सुनते समय यह नोट कीजिए |
|---|---|---|---|
| हम सब सुमन एक उपवन के | इसी पाठ के कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी का सबसे लोकप्रिय गीत — पाठ में ‘कवि से परिचय’ में इसका नाम आया है। | यहाँ भी वही बात है — सब मिलकर रहें, एक-दूसरे के लिए जिएँ। ‘जलाते चलो’ का ‘स्नेह’ इस गीत में ‘एक उपवन’ बनकर आया है। | कवि किस चीज़ को किस चीज़ का प्रतीक बना रहे हैं — बच्चों को ‘सुमन’ और देश/समाज को ‘उपवन’। |
| बढ़े चलो | आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देने वाला गीत। | ‘जलाते चलो’, ‘बहाते चलो’ और ‘बढ़े चलो’ — तीनों में वही ‘चलो’ है, जिस पर आपने ‘अर्थ की बात’ में चर्चा की थी। | इसमें भी रुकने के बजाय चलते रहने पर ज़ोर है या नहीं — और किन शब्दों से। |
| रोज़ बदलता कैसे चाँद — भाग 1 | चंद्रमा की कलाओं को दिखाने वाली दृश्य-सामग्री। | ‘अमावस्या और पूर्णिमा’ वाली गतिविधि इसी से पूरी तरह समझ आएगी। | चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य की स्थिति कैसे बदलती है — और तभी चाँद घटता-बढ़ता क्यों दिखता है। |
| रोज़ बदलता कैसे चाँद — भाग 2 | पहले भाग का अगला हिस्सा। | कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष का अंतर तथा तिथिपत्र की तिथियाँ समझने में सहायक। | शुक्ल पक्ष में उजाला किस ओर से बढ़ता है और कृष्ण पक्ष में किस ओर से घटता है। |
देखने-सुनने के बाद यह कीजिए —
- दोनों गीतों की एक-एक पंक्ति अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए जो आपको सबसे अच्छी लगी, और साथ में एक वाक्य में कारण भी।
- तुलना कीजिए: ‘हम सब सुमन एक उपवन के’ और ‘जलाते चलो’ — दोनों में कवि किस बात पर ज़ोर दे रहे हैं? क्या दोनों की बात एक ही है?
- चाँद वाली सामग्री देखने के बाद एक सप्ताह तक रोज़ रात को चाँद देखिए और एक छोटी-सी चित्र-डायरी बनाइए — तिथि, चाँद का आकार और यह कि उजाला किस ओर था।
- कक्षा में सुनाइए: ‘हम सब सुमन एक उपवन के’ को समूह में मिलकर गाइए — यह गीत मिलकर गाने के लिए ही बना है।
ये चार रचनाएँ साथ क्यों दी गई हैं: दो कविता की ओर ले जाती हैं (उसी कवि का गीत और ‘चलो’ वाली प्रेरणा) और दो विज्ञान की ओर (चाँद की कलाएँ)। यही इस पाठ की सबसे सुंदर बात है — एक कविता ने साहित्य और विज्ञान दोनों के दरवाज़े एक साथ खोल दिए। कविता की पंक्ति भी यही कहती है — “भले शक्ति विज्ञान में है निहित वह।”