मल्हार अध्याय 6 मेरी समझ से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए— (1) ‘किंतु यह इच्छा पूर्ण होती नहीं दिखाई देती।’ बिस्मिल को अपनी किस इच्छा के पूर्ण न होने की आशंका थी? • भारत माता के साथ रहने की • अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहने की • अपनी माँ की जीवनपर्यंत सेवा करने की • भोग विलास तथा ऐश्वर्य भोगने की
उत्तर

सही उत्तर है — अपनी माँ की जीवनपर्यंत सेवा करने की। इसी विकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।

उत्तर का प्रमाण ठीक उसी पंक्ति से एक वाक्य पहले मिल जाता है —

“इस संसार में मेरी किसी भी भोग-विलास तथा ऐश्वर्य की इच्छा नहीं।
केवल एक इच्छा है, वह यह कि एक बार श्रद्धापूर्वक तुम्हारे चरणों की सेवा करके अपने जीवन को सफल बना लेता।
किंतु यह इच्छा पूर्ण होती नहीं दिखाई देती…

यानी ‘यह इच्छा’ का अर्थ है — वही इच्छा जो अभी-अभी बताई गई: माँ के चरणों की सेवा करने की। बिस्मिल जानते थे कि उन्हें फाँसी होने वाली है, इसलिए उन्हें आशंका थी कि यह इच्छा अधूरी ही रह जाएगी।

विकल्पसही / ग़लतकारण
अपनी माँ की जीवनपर्यंत सेवा करने कीसही ★‘यह इच्छा’ पिछले ही वाक्य की ओर संकेत कर रही है — “तुम्हारे चरणों की सेवा करके अपने जीवन को सफल बना लेता।”
भारत माता के साथ रहने कीग़लतभारत माता का उल्लेख आगे आता है, पर वहाँ बात सेवा में जीवन देने की है, साथ रहने की नहीं — “भारत माता की सेवा में अपने जीवन को बलि-देवी की भेंट कर गया।”
अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहने कीग़लतयह इच्छा तो पूरी हो गई। बिस्मिल स्वयं लिखते हैं — “अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहा।” अधूरी रहने वाली इच्छा वह नहीं हो सकती।
भोग विलास तथा ऐश्वर्य भोगने कीग़लतयह तो उन्होंने साफ़ मना कर दिया है — “मेरी किसी भी भोग-विलास तथा ऐश्वर्य की इच्छा नहीं।” जो इच्छा है ही नहीं, वह अधूरी कैसे रहेगी?
उत्तर पकड़ने का तरीक़ा: जब प्रश्न में ‘यह’, ‘वह’, ‘इसका’ जैसा सर्वनाम हो, तो उत्तर पाठ में उससे ठीक पहले छिपा होता है। ‘यह इच्छा’ पढ़ते ही आँख पीछे की पंक्ति पर जानी चाहिए। यही आदत ऐसे हर प्रश्न में काम आती है।
प्र2.
(2) रामप्रसाद बिस्मिल की माँ का सबसे बड़ा आदेश क्या था? • देश की सेवा करें • कभी किसी के प्राण न लेना • कभी किसी से छल न करना • सदा सच बोलना
उत्तर

सही उत्तर है — कभी किसी के प्राण न लेना। इसी के सामने तारा (★) बनाइए।

पाठ में यह बात शब्दशः लिखी है —

“माताजी का सबसे बड़ा आदेश मेरे लिए यही था कि किसी की प्राणहानि न हो।
उनका कहना था कि अपने शत्रु को भी कभी प्राणदंड न देना।”
विकल्पसही / ग़लतकारण
कभी किसी के प्राण न लेनासही ★पाठ में इसे ही ‘सबसे बड़ा आदेश’ कहा गया है। इतना बड़ा कि इसे निभाने के लिए बिस्मिल को अपनी प्रतिज्ञा तक भंग करनी पड़ी।
देश की सेवा करेंग़लतमाँ ने देश-सेवा में सहायता ज़रूर की — “तुम्हारी दया से ही मैं देश-सेवा में संलग्न हो सका” — पर इसे ‘आदेश’ कहकर नहीं लिखा गया।
कभी किसी से छल न करनाग़लतपाठ में छल की कोई चर्चा नहीं है। वकालतनामे वाली घटना छल की नहीं, सत्य की है — और वह बिस्मिल के अपने आचरण की बात है, माँ के आदेश की नहीं।
सदा सच बोलनाग़लतसत्य का आचरण बिस्मिल स्वयं करते थे — “अपने जीवन में हमेशा सत्य का आचरण करता था।” यह उनका अपना स्वभाव है, माँ का ‘सबसे बड़ा आदेश’ नहीं।
यह आदेश इतना बड़ा क्यों है: सोचिए — जिस बेटे को अंग्रेज़ों से लड़ना है, हथियार उठाने हैं, उसकी माँ उससे कहती है कि शत्रु के भी प्राण मत लेना। एक ओर देश की स्वतंत्रता, दूसरी ओर किसी की जान — और माँ जान को ऊपर रखती हैं। इसी से पता चलता है कि बिस्मिल की माँ का हृदय कितना बड़ा था, और यही आदेश आगे पाठ की सबसे मार्मिक पंक्ति को जन्म देता है — “उनके इस आदेश की पूर्ति करने के लिए मुझे मज़बूरन दो-एक बार अपनी प्रतिज्ञा भंग भी करनी पड़ी थी।”
प्र3.
(ख) अब अपने मित्रों के साथ तर्कपूर्ण चर्चा कीजिए कि आपने ये ही उत्तर क्यों चुने?
उत्तर

यह चर्चा का प्रश्न है। ‘तर्कपूर्ण चर्चा’ का अर्थ है — केवल यह न कहना कि “मैंने यह चुना”, बल्कि पाठ की पंक्ति दिखाकर बताना कि क्यों चुना।

अच्छी चर्चा में तीन बातें ज़रूर होनी चाहिए —

  • आपने कौन-सा विकल्प चुना;
  • पाठ की वह पंक्ति जो उसे सिद्ध करती है;
  • कम-से-कम एक ऐसा विकल्प, जिसे आपने क्यों छोड़ा — यह भी बताइए।
नमूना उत्तर:
“पहले प्रश्न में मैंने चुना — अपनी माँ की जीवनपर्यंत सेवा करने की। कारण यह है कि ‘किंतु यह इच्छा पूर्ण होती नहीं दिखाई देती’ से ठीक पहले लिखा है — ‘केवल एक इच्छा है, वह यह कि एक बार श्रद्धापूर्वक तुम्हारे चरणों की सेवा करके अपने जीवन को सफल बना लेता।’ तो ‘यह इच्छा’ का मतलब वही हुआ। ‘अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहने की’ मैंने इसलिए नहीं चुना, क्योंकि वह इच्छा तो पूरी हो गई थी — बिस्मिल खुद लिखते हैं ‘अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहा’।

दूसरे प्रश्न में मैंने चुना — कभी किसी के प्राण न लेना। पाठ में साफ़ लिखा है कि ‘माताजी का सबसे बड़ा आदेश मेरे लिए यही था कि किसी की प्राणहानि न हो।’ ‘सदा सच बोलना’ मैंने इसलिए नहीं चुना, क्योंकि सत्य का आचरण बिस्मिल अपने आप करते थे; उसे माँ का आदेश कहकर पाठ में नहीं लिखा गया।”
चर्चा का असली लाभ: हो सकता है किसी मित्र ने दूसरा विकल्प चुना हो। उससे बहस मत कीजिए — केवल पूछिए कि पाठ की कौन-सी पंक्ति उसका आधार है। जब वह पंक्ति ढूँढ़ने पाठ में लौटेगा, तब खुद ही उसे अपनी भूल दिख जाएगी। यही तर्कपूर्ण चर्चा है — जीतना नहीं, प्रमाण तक पहुँचना।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ