प्र1.
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए— (1) ‘किंतु यह इच्छा पूर्ण होती नहीं दिखाई देती।’ बिस्मिल को अपनी किस इच्छा के पूर्ण न होने की आशंका थी? • भारत माता के साथ रहने की • अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहने की • अपनी माँ की जीवनपर्यंत सेवा करने की • भोग विलास तथा ऐश्वर्य भोगने की
उत्तर
सही उत्तर है — अपनी माँ की जीवनपर्यंत सेवा करने की। इसी विकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।
उत्तर का प्रमाण ठीक उसी पंक्ति से एक वाक्य पहले मिल जाता है —
“इस संसार में मेरी किसी भी भोग-विलास तथा ऐश्वर्य की इच्छा नहीं।
केवल एक इच्छा है, वह यह कि एक बार श्रद्धापूर्वक तुम्हारे चरणों की सेवा करके अपने जीवन को सफल बना लेता।
किंतु यह इच्छा पूर्ण होती नहीं दिखाई देती…”
केवल एक इच्छा है, वह यह कि एक बार श्रद्धापूर्वक तुम्हारे चरणों की सेवा करके अपने जीवन को सफल बना लेता।
किंतु यह इच्छा पूर्ण होती नहीं दिखाई देती…”
यानी ‘यह इच्छा’ का अर्थ है — वही इच्छा जो अभी-अभी बताई गई: माँ के चरणों की सेवा करने की। बिस्मिल जानते थे कि उन्हें फाँसी होने वाली है, इसलिए उन्हें आशंका थी कि यह इच्छा अधूरी ही रह जाएगी।
| विकल्प | सही / ग़लत | कारण |
|---|---|---|
| अपनी माँ की जीवनपर्यंत सेवा करने की | सही ★ | ‘यह इच्छा’ पिछले ही वाक्य की ओर संकेत कर रही है — “तुम्हारे चरणों की सेवा करके अपने जीवन को सफल बना लेता।” |
| भारत माता के साथ रहने की | ग़लत | भारत माता का उल्लेख आगे आता है, पर वहाँ बात सेवा में जीवन देने की है, साथ रहने की नहीं — “भारत माता की सेवा में अपने जीवन को बलि-देवी की भेंट कर गया।” |
| अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहने की | ग़लत | यह इच्छा तो पूरी हो गई। बिस्मिल स्वयं लिखते हैं — “अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहा।” अधूरी रहने वाली इच्छा वह नहीं हो सकती। |
| भोग विलास तथा ऐश्वर्य भोगने की | ग़लत | यह तो उन्होंने साफ़ मना कर दिया है — “मेरी किसी भी भोग-विलास तथा ऐश्वर्य की इच्छा नहीं।” जो इच्छा है ही नहीं, वह अधूरी कैसे रहेगी? |
उत्तर पकड़ने का तरीक़ा: जब प्रश्न में ‘यह’, ‘वह’, ‘इसका’ जैसा सर्वनाम हो, तो उत्तर पाठ में उससे ठीक पहले छिपा होता है। ‘यह इच्छा’ पढ़ते ही आँख पीछे की पंक्ति पर जानी चाहिए। यही आदत ऐसे हर प्रश्न में काम आती है।