पहले कठिन शब्द — अति साधारण = बिल्कुल मामूली; भाँति = तरह; संसार-चक्र = दुनियादारी का चक्कर — कमाना, खाना, गृहस्थी चलाना और इसी में उम्र बिता देना; जीवन निर्वाह करता = बस जीवन काट देता।
सीधा अर्थ — बिस्मिल कहते हैं कि अगर मुझे ऐसी माँ न मिली होतीं, तो मैं भी बाक़ी मामूली लोगों की तरह दुनियादारी के चक्कर में फँसकर बस अपनी ज़िंदगी काट देता। कोई बड़ा काम, कोई देश-सेवा मुझसे न हो पाती।
भाव — इस एक वाक्य में बिस्मिल अपनी सारी उपलब्धि माँ के नाम कर देते हैं। वे यह नहीं कहते कि “मैं जन्म से ही वीर था”; वे कहते हैं कि मुझे साधारण से असाधारण मेरी माँ ने बनाया। यही बात वे पाठ में पहले भी कह चुके हैं — “मुझमें जो कुछ जीवन तथा साहस आया, वह मेरी माताजी तथा गुरुदेव श्री सोमदेव जी की कृपाओं का ही परिणाम है।”