मल्हार अध्याय 6 पुस्तकालय या इंटरनेट से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आप पुस्तकालय से रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ की आत्मकथा खोजकर पढ़िए।
उत्तर

यह पढ़ने की गतिविधि है। नीचे बताया गया है कि यह आत्मकथा है क्या और उसे कैसे खोजें-पढ़ें।

पुस्तक के बारे में — बिस्मिल ने यह आत्मकथा गोरखपुर जेल में, फाँसी के कुछ ही दिन पहले, चोरी-छिपे लिखी थी और पन्ने छिपाकर बाहर भिजवाए थे। साथियों ने इसे छपवाया और नाम रखा — ‘निज जीवन की एक छटा’। यही बात पाठ के आरंभ में भी दी गई है। आज यह अनेक प्रकाशकों से ‘आत्मकथा — रामप्रसाद बिस्मिल’, ‘क्रांति गाथा’ आदि नामों से मिलती है।

कैसे खोजें —

  • पुस्तकालय में: ‘जीवनी / आत्मकथा’ वाले खाने में देखिए, या पुस्तकालयाध्यक्ष से कहिए — “रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा चाहिए।”
  • इंटरनेट पर: सरकारी डिजिटल पुस्तकालय (जैसे National Digital Library of India) और अभिलेखागार की वेबसाइटें देखिए। बहुत पुरानी पुस्तकें वहाँ मुफ़्त पढ़ने को मिल जाती हैं।
  • सावधानी: इंटरनेट पर बिस्मिल के नाम से बहुत-सी बातें और शेर चढ़े रहते हैं जो उनके हैं ही नहीं। जो पढ़ें, उसका स्रोत देख लीजिए और शिक्षक से जँचवा लीजिए।

पढ़ते समय यह तालिका भरते चलिए —

क्या नोट करेंउदाहरण (‘मेरी माँ’ अंश से)
कोई एक घटनावकालतनामे पर पिताजी के हस्ताक्षर करने से मना कर देना
कोई एक पंक्ति जो दिल को छू गई“तुम्हारी दया की छाया में मैंने अपने जीवन भर में कोई कष्ट अनुभव न किया।”
कोई नया शब्दउऋण, अवर्णनीय, ताड़ना
अपना एक प्रश्नफाँसी के इतने पास होकर भी वे इतने शांत कैसे लिख सके?
ध्यान रहे: आत्मकथा का यह पाठ जितना कोमल है, पुस्तक के दूसरे हिस्से उतने ही कठोर हैं — उनमें जेल, मुकदमे और फाँसी की बातें हैं। पढ़ते समय जो समझ न आए, उसे शिक्षक या घर के बड़ों से पूछ लीजिए।
प्र2.
देशभक्तों से संबंधित अन्य पुस्तकें, जैसे— उनके पत्र, आत्मकथा, जीवनी आदि पढ़िए और अपने मित्रों से साझा कीजिए।
उत्तर

देशभक्तों के बारे में तीन तरह की पुस्तकें मिलती हैं। पहले यह अंतर समझ लीजिए, फिर सूची में से चुनिए।

विधाकौन लिखता हैपहचान
आत्मकथावह व्यक्ति स्वयं‘मैं, मेरा, मुझे’ — जैसे ‘मेरी माँ’ पाठ
जीवनीकोई और लेखक‘वे, उन्होंने, उनकी’
पत्रवह व्यक्ति, किसी एक को संबोधित करके‘तुम, तुम्हारा’ — पाठ का अंतिम भाग भी लगभग पत्र जैसा ही है

पढ़ने के लिए सुझाई गई पुस्तकें —

  • आत्मकथा: महात्मा गांधी — ‘सत्य के प्रयोग’; सचींद्रनाथ सान्याल — ‘बंदी जीवन’; रामप्रसाद बिस्मिल — ‘निज जीवन की एक छटा’।
  • पत्र: जवाहरलाल नेहरू के इंदिरा को लिखे पत्र — ‘पिता के पत्र पुत्री के नाम’; भगत सिंह के जेल से लिखे पत्र और उनकी ‘जेल नोटबुक’।
  • जीवनी: रानी लक्ष्मीबाई, सुभाषचंद्र बोस, भगत सिंह, बिरसा मुंडा, मंगल पांडे, तात्या टोपे, टंट्या भील, कित्तूर रानी चेन्नम्मा, रानी गाइदिन्ल्यू, मातंगिनी हाज़रा और वेलु नाचियार जैसी वीरांगनाओं पर लिखी बाल-पुस्तकें (NCERT, नेशनल बुक ट्रस्ट और साहित्य अकादेमी की सस्ती पुस्तकें पुस्तकालय में आसानी से मिल जाती हैं)।

मित्रों से कैसे साझा करें — तीन मिनट का ढाँचा:

  1. पुस्तक का नाम, लेखक और विधा (आत्मकथा / जीवनी / पत्र)।
  2. उसमें से एक घटना सुनाइए — पूरी कहानी मत सुनाइए, वरना सुनने वाले का मज़ा चला जाएगा।
  3. उसमें से एक पंक्ति ज्यों-की-त्यों पढ़िए जो आपको सबसे अच्छी लगी।
  4. अंत में एक वाक्य — “यह पुस्तक उन्हें पढ़नी चाहिए जिन्हें … पसंद है।”
कक्षा के लिए सुझाव: कक्षा में एक ‘देशभक्त कोना’ बनाइए। हर सप्ताह एक विद्यार्थी अपनी पढ़ी पुस्तक का एक पन्ना-भर परिचय लिखकर वहाँ लगाए। साल भर में पूरी कक्षा के पास चालीस पुस्तकों की जानकारी हो जाएगी।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ