मल्हार अध्याय 5 आज की पहेली

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
1. दो अक्षर का मेरा नाम, आता हूँ खाने के काम। उल्टा होकर नाच दिखाऊँ, मैं क्यों अपना नाम बताऊँ।
उत्तर

उत्तर है — चना

च + ना = चना — दो अक्षर
उलटकर पढ़िए → ना + च = नाच

हर पंक्ति कैसे मिलती है —

पहेली की पंक्तिसंकेतचना पर कैसे लागू
“दो अक्षर का मेरा नाम”नाम में केवल दो अक्षरच–ना, ठीक दो अक्षर।
“आता हूँ खाने के काम”यह कोई खाने की चीज़ हैभुना चना, चने की दाल, चने का साग, चने का बेसन — सब खाए जाते हैं।
“उल्टा होकर नाच दिखाऊँ”अक्षर उलटने पर दूसरा शब्द बनता है‘चना’ को उलटा पढ़िए तो ‘नाच’ बन जाता है।
“मैं क्यों अपना नाम बताऊँ”यही तो बूझने के लिए कहा गया हैतीसरी पंक्ति ही सबसे बड़ा सुराग़ है — नाम उसी में छिपा है।
इस पहेली की चाल: यह शब्द को उलटकर बनने वाली पहेली है — इसे ‘विलोमपद’ या पलिंद्रोम-जैसा खेल कहते हैं। ऐसी पहेलियों में पहले उस शब्द को खोजिए जो अर्थ के संकेत (यहाँ ‘खाने के काम’) पर बैठे, फिर उसे उलटकर देखिए कि दूसरा संकेत (यहाँ ‘नाच’) मिलता है या नहीं। दोनों मिल जाएँ तो उत्तर पक्का।
ऐसे और शब्द (अपने आप उलटकर देखिए): राही ↔ हीरा, नमक ↔ कमन, दाल ↔ लादा, कला ↔ लाक, जग ↔ गज, नल ↔ लन, रस ↔ सर, तन ↔ नत, मन ↔ नम, काला ↔ लाका। इनमें से कुछ के दोनों रूप अर्थ रखते हैं — जग–गज और रस–सर जैसे। इन्हीं से आप अपनी नई पहेली बना सकते हैं।
प्र2.
2. एक किले के दो ही द्वार, उनमें सैनिक लकड़ीदार। टकराएँ जब दीवारों से, जल उठे सारा संसार।
उत्तर

उत्तर है — माचिस (दियासलाई) की डिबिया

पहेली की पंक्तिमाचिस में वह क्या है
“एक किले के दो ही द्वार”माचिस की डिबिया एक छोटा-सा किला है। उसके ऊपरी खोल के दो सिरे खुले रहते हैं — भीतर का ख़ाना इधर से भी निकलता है, उधर से भी। यही दो द्वार हैं।
“उनमें सैनिक लकड़ीदार”भीतर पंक्ति बाँधकर खड़ी लकड़ी की तीलियाँ — सिपाहियों की कतार जैसी।
“टकराएँ जब दीवारों से”तीली को डिबिया के बग़ल वाले खुरदरे हिस्से पर रगड़ा जाता है — यही दीवार से टकराना है।
“जल उठे सारा संसार”रगड़ते ही तीली जल उठती है। एक तीली से चूल्हा, दीपक, अलाव — सब जल जाते हैं, इसलिए ‘सारा संसार’ कहा गया।
तीली जलती क्यों है: तीली के सिर पर और डिबिया की खुरदरी पट्टी पर अलग-अलग रसायन लगे होते हैं। रगड़ से पैदा हुई घर्षण की गर्मी इन दोनों को मिलाकर आग पैदा कर देती है। इसीलिए तीली चिकनी दीवार पर नहीं, केवल उसी खुरदरी पट्टी पर जलती है।
सावधानी: यह पहेली मज़े की है, पर माचिस खिलौना नहीं है। तीली हमेशा बड़ों के सामने ही जलाइए और बुझी हुई तीली पानी में डालकर ही फेंकिए।
करके देखिए: इसी ढंग की अपनी पहेली बनाइए — किसी रोज़ की चीज़ को कोई और रूप दे दीजिए। जैसे — “काला घोड़ा, सफ़ेद सवार; जितना चले, उतना छोटा हो जाए।” (उत्तर — पेंसिल या चॉक।) दो पंक्तियों में एक तुक मिला दीजिए, पहेली तैयार।
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