यह करके देखने की गतिविधि है। नीचे पूरी विधि दी गई है — इसी क्रम से कीजिए तो रिकॉर्डिंग एक ही बार में अच्छी बनेगी।
चरण 1 — दोहा चुनिए और अर्थ समझिए। बिना अर्थ समझे गाया दोहा सपाट सुनाई देता है। जिस पंक्ति में चेतावनी है (‘मत तोड़ो छिटकाय’) वहाँ आवाज़ थोड़ी दृढ़ रखिए, और जहाँ कोमल भाव है (‘मिले गाँठ परि जाय’) वहाँ धीमी।
चरण 2 — दोहे की चाल पकड़िए। दोहे की हर पंक्ति दो हिस्सों में बँटी होती है और बीच में ज़रा-सा ठहराव आता है। यहीं से लय बनती है —
टूटे से फिर ना मिले / मिले गाँठ परि जाय
पहले बिना गाए, केवल ताली बजाते हुए इसी ठहराव के साथ बोलिए। लय अपने आप बैठ जाएगी।
चरण 3 — तैयारी।
- कम-से-कम पाँच बार रियाज़ कीजिए; रटा हुआ दोहा ही आत्मविश्वास से गाया जाता है।
- समूह में गाना हो तो शुरुआत एक साथ करने के लिए कोई एक साथी हाथ से इशारा करे।
- ढोलक, मंजीरा, खँजरी या केवल ताली — कोई भी संगत चलेगी। ताल सादा रखिए।
चरण 4 — रिकॉर्डिंग।
- शांत कमरा चुनिए; पंखा और खिड़की बंद कर लीजिए — पंखे की आवाज़ रिकॉर्डिंग में सबसे ज़्यादा खलती है।
- मोबाइल को मुँह से लगभग एक बित्ता (20–25 सें.मी.) दूर रखिए और किसी चीज़ पर टिका दीजिए, हाथ में मत पकड़िए।
- शुरू में दो सेकंड चुप रहिए, फिर बोलिए — “यह दोहा रहीम का है।” फिर गाइए। अंत में भी दो सेकंड चुप रहिए।
- वीडियो बना रहे हों तो रोशनी आपके सामने हो, पीछे नहीं। खिड़की की तरफ़ मुँह करके खड़े होइए।
चरण 5 — सुनिए और सुधारिए। पहली रिकॉर्डिंग सुनकर जाँचिए — शब्द साफ़ सुनाई दे रहे हैं? कहीं जल्दबाज़ी तो नहीं? लय टूटी तो नहीं? एक बार सुधार कर दोबारा रिकॉर्ड करने से नतीजा बहुत बेहतर हो जाता है।