मल्हार अध्याय 5 आपकी बात

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि॥” इस दोहे का भाव है— न कोई बड़ा है और न ही कोई छोटा है। सबके अपने-अपने काम हैं, सबकी अपनी-अपनी उपयोगिता और महत्ता है। … अपने मनपसंद दोहे को इस तरह की शैली में अपने शब्दों में लिखिए। दोहा पाठ से या पाठ से बाहर का हो सकता है।
उत्तर

यह आपकी अपनी लेखनी का काम है। पहले तरीक़ा समझ लीजिए — पुस्तक ने जो नमूना दिया है, उसमें चार चीज़ें हैं, और यही चार आपके लेखन में भी होनी चाहिए।

क्रमक्या करना हैपुस्तक के नमूने में यह कहाँ है
1दोहे की मूल सीख एक वाक्य में“न कोई बड़ा है और न ही कोई छोटा है।”
2उसे खोलकर समझाना“सबके अपने-अपने काम हैं, सबकी अपनी-अपनी उपयोगिता और महत्ता है।”
3अपनी ओर से उदाहरण जोड़ना“चाहे हाथी हो या चींटी, तलवार हो या सुई…”
4अंत में जीवन की सीख“कोई वस्तु हो या व्यक्ति, छोटा हो या बड़ा, सबका सम्मान करना चाहिए।”

ध्यान रखने की बातें —

  • दोहे का शब्दशः अनुवाद मत कीजिए; उसका भाव अपने शब्दों में कहिए।
  • कम-से-कम एक उदाहरण अपने आसपास से लीजिए — अपने घर, खेत, कक्षा या गाँव से। यही आपके लेखन को दूसरों से अलग बनाएगा।
  • छह-आठ वाक्य पर्याप्त हैं। लंबाई नहीं, स्पष्टता देखी जाती है।
  • दोहा पहले ज्यों-का-त्यों उद्धरण-चिह्नों में लिखिए, फिर व्याख्या।
नमूना उत्तर 1 (पाठ के भीतर से):
“रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय।
टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय॥”

इस दोहे का भाव है — प्रेम बहुत नाज़ुक चीज़ है, उसे झटके से मत तोड़िए। धागा जब तक साबुत है, तब तक जोड़ने का काम करता है; एक झटका लगते ही टूट जाता है। और टूटने के बाद अगर जोड़ भी दिया जाए, तो उसमें गाँठ पड़ जाती है — वह पहले जैसा चिकना कभी नहीं रहता। रिश्तों के साथ भी ठीक यही होता है। क्रोध में कही गई एक बात बरसों की दोस्ती तोड़ देती है। बाद में माफ़ी माँग भी लें, तो भी मन में एक गाँठ बची रह जाती है। इसीलिए झगड़े को बढ़ने से पहले ही रोक लेना चाहिए। मेरे गाँव में दो भाइयों के बीच खेत की मेड़ को लेकर हुआ झगड़ा दस साल तक चला — बाद में सुलह तो हो गई, पर वे पहले जैसे कभी नहीं हो पाए। यही ‘गाँठ पड़ जाना’ है।
नमूना उत्तर 2 (पाठ से बाहर का दोहा):
“बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥” — कबीर

इस दोहे का भाव है — केवल बड़ा हो जाना कोई गुण नहीं है। खजूर का पेड़ सबसे ऊँचा होता है, पर उसकी छाया इतनी पतली होती है कि थका हुआ राही उसके नीचे बैठ भी नहीं सकता, और फल इतने ऊपर लगते हैं कि किसी के हाथ नहीं आते। बड़ा वही है जो दूसरों के काम आए। हमारे स्कूल के आँगन में एक नीम का पेड़ है — खजूर से छोटा है, पर दोपहर में पूरी कक्षा उसकी छाया में बैठ जाती है। इसीलिए मुझे नीम खजूर से बड़ा लगता है। पद, धन या क़द से नहीं, आदमी अपने काम से बड़ा होता है।
अच्छा लेखन कैसे पहचाना जाता है: जिस उत्तर में एक भी अपना उदाहरण होता है, वह तुरंत अलग दिखता है। दोहे का अर्थ तो सब लिख देंगे — नीम का पेड़ या खेत की मेड़ आपके अपने अनुभव से आएगी। इसीलिए लिखने से पहले एक मिनट सोचिए कि यह बात आपने अपने जीवन में कहाँ देखी है।
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