प्र1.
रहीम के कुछ अन्य दोहे पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से पढ़ें, देखें व समझें।
उत्तर
यह पढ़ने और खोजने की परियोजना है। कैसे खोजें —
- पुस्तकालय में: रहीम ग्रंथावली (संपादक — विद्यानिवास मिश्र) — आपकी पाठ्यपुस्तक ने भी यही स्रोत दिया है। इसके अलावा रहीम रत्नावली और कक्षा-स्तर की ‘दोहावली’ पुस्तकें देखिए।
- इंटरनेट पर: कवि का नाम साथ लिखकर खोजिए — “रहीम के दोहे अर्थ सहित”। NCERT, साहित्य अकादेमी और विश्वविद्यालयों की वेबसाइटें भरोसेमंद हैं।
- घर में: बड़ों से पूछिए। बहुत-से दोहे उन्हें कंठस्थ मिलेंगे, जो किसी किताब में शायद ही हों।
- जाँच लीजिए: इंटरनेट पर बहुत-से दोहे ग़लत कवि के नाम से चढ़े रहते हैं। जो दोहा मिले, उसे शिक्षक से एक बार अवश्य जँचवाइए।
पढ़ने के लिए रहीम के कुछ और प्रसिद्ध दोहे —
| दोहा | अर्थ |
|---|---|
| “रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय। सुनि इठलैहैं लोग सब, बाँटि न लैहैं कोय॥” | अपने मन का दुख मन में ही छिपाकर रखो। सुनकर लोग हँसेंगे भर, बाँटेगा कोई नहीं। |
| “बड़े बड़ाई ना करैं, बड़े न बोलैं बोल। रहिमन हीरा कब कहै, लाख टका मेरो मोल॥” | बड़े लोग अपनी बड़ाई नहीं करते। हीरा कब कहता है कि मेरा मोल लाख रुपये है? |
| “जे गरिब सों हित करैं, धनि रहीम ते लोग। कहा सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग॥” | जो ग़रीब से प्रेम करते हैं वे धन्य हैं। बेचारे सुदामा कहाँ इस लायक़ थे कि कृष्ण उनसे मित्रता करते? |
| “समय पाइ फल होत है, समय पाइ झरि जाय। सदा रहै नहिं एक सी, का रहीम पछिताय॥” | समय आने पर फल लगता है और समय आने पर झड़ भी जाता है। कुछ भी सदा एक-सा नहीं रहता, फिर पछताना कैसा? |
| “जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग। चंदन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग॥” | अच्छे स्वभाव वाले पर बुरी संगति असर नहीं करती — चंदन से साँप लिपटे रहते हैं, फिर भी उसमें ज़हर नहीं उतरता। |
| “रूठे सुजन मनाइए, जो रूठे सौ बार। रहिमन फिरि फिरि पोइए, टूटे मुक्ताहार॥” | रूठे हुए अपनों को सौ बार भी मनाइए — जैसे मोतियों की माला टूट जाए तो उसे बार-बार पिरो लिया जाता है। |
| “खीरा सिर ते काटिए, मलियत नमक लगाय। रहिमन करुए मुखन को, चहिअत इहै सजाय॥” | खीरे का कड़वा सिरा काटकर नमक मलकर मिठास लाई जाती है — कड़वा बोलने वालों के लिए भी यही उपचार ठीक है। |
| “रहिमन चुप ह्वै बैठिए, देखि दिनन को फेर। जब नीके दिन आइहैं, बनत न लगिहैं देर॥” | बुरे दिनों में चुप बैठकर समय का फेर देखिए; अच्छे दिन आएँगे तो काम बनते देर नहीं लगेगी। |
अपनी ‘दोहा-पुस्तिका’ बनाइए — कॉपी में तीन खाने बनाइए और हर सप्ताह दो दोहे भरिए:
| दोहा | कठिन शब्दों के अर्थ | मेरी समझ में इसका भाव |
|---|---|---|
| (ज्यों-का-त्यों उतारिए) | (दो-तीन शब्द) | (अपने शब्दों में दो पंक्ति) |
रहीम के बारे में यह भी जानिए: रहीम का पूरा नाम अब्दुर्रहीम खानखाना था। वे अकबर के दरबार के नवरत्नों में से एक थे। सेनापति और दरबारी होते हुए भी उन्होंने हिंदी में — अवधी और ब्रजभाषा में — दोहे लिखे और कृष्ण-भक्ति के पद रचे। आपकी पुस्तक के ‘कवि से परिचय’ में लिखा है कि उनका जन्म 16वीं शताब्दी में और मृत्यु 17वीं शताब्दी में हुई। एक मुसलमान कवि का रामायण-महाभारत का गहरा जानकार होना और घर-घर लोकप्रिय होना — यही भारत की साझी संस्कृति का सबसे सुंदर उदाहरण है।
कक्षा के लिए सुझाव: हर सोमवार को एक विद्यार्थी अपना चुना हुआ ‘सप्ताह का दोहा’ श्यामपट्ट पर लिखे और उसका अर्थ दो मिनट में सुनाए। साल भर में चालीस दोहे पूरी कक्षा को कंठस्थ हो जाएँगे।