प्र1.
पाठ में से कुछ दोहे स्तंभ 1 में दिए गए हैं और उनके भाव स्तंभ 2 में दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और रेखा खींचकर सही भाव से मिलान कीजिए। स्तंभ 1 — 1. “रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय। टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय॥” 2. “कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत। बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत॥” 3. “तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान। कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान॥” स्तंभ 2 — 1. सज्जन परहित के लिए ही संपत्ति संचित करते हैं। 2. सच्चे मित्र विपत्ति या विपदा में भी साथ रहते हैं। 3. प्रेम या रिश्तों को सहेजकर रखना चाहिए।
उत्तर
सही मिलान इस प्रकार है — 1 → 3, 2 → 2, 3 → 1. ध्यान दीजिए, केवल बीच वाली जोड़ी का क्रमांक आपस में मिलता है; पहले और तीसरे दोहे का भाव आमने-सामने नहीं, आड़ा-तिरछा (क्रॉस) बैठता है।
| स्तंभ 1 — दोहा | मिलान | स्तंभ 2 — भाव | कौन-सा शब्द इसे सिद्ध करता है |
|---|---|---|---|
| 1. “रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय। टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय॥” | → 3 | प्रेम या रिश्तों को सहेजकर रखना चाहिए। | ‘धागा प्रेम का’ और ‘मत तोड़ो’ — पूरा दोहा प्रेम के धागे को बचाकर रखने पर ही है। |
| 2. “कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत। बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत॥” | → 2 | सच्चे मित्र विपत्ति या विपदा में भी साथ रहते हैं। | ‘बिपति कसौटी’ और ‘साँचे मीत’ — विपत्ति ही मित्रता की परख है। |
| 3. “तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान। कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान॥” | → 1 | सज्जन परहित के लिए ही संपत्ति संचित करते हैं। | ‘पर काज हित’ (दूसरों के काम के लिए) और ‘संपति सँचहि सुजान’ — शब्द लगभग वही हैं। |
तीनों दोहों का अर्थ संक्षेप में —
- धागा वाला दोहा: प्रेम का धागा झटका देकर मत तोड़ो। एक बार टूट गया तो फिर जुड़ता नहीं; और अगर जुड़ भी गया तो उसमें गाँठ पड़ जाती है।
- संपति सगे वाला दोहा: धन-दौलत रहने पर बहुत-से लोग अनेक तरीक़ों से अपने बन जाते हैं। पर सच्चे मित्र वही हैं जो विपत्ति की कसौटी पर कसे जाने पर खरे उतरें।
- तरुवर वाला दोहा: पेड़ अपना फल स्वयं नहीं खाते, सरोवर अपना जल स्वयं नहीं पीते। इसी तरह सज्जन लोग धन दूसरों के भले के लिए जोड़ते हैं।
मिलान करने की तरकीब: पहले हर दोहे में से एक कुंजी-शब्द छाँटिए — यहाँ क्रमशः ‘प्रेम’, ‘मीत’ और ‘पर काज’। फिर स्तंभ 2 में उसी अर्थ का शब्द खोजिए — ‘रिश्ते’, ‘मित्र’ और ‘परहित’। मिलान अपने आप हो जाएगा, अंदाज़ा लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।