प्र1.
कविता में आए कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इन शब्दों को आपकी मातृभाषा में क्या कहते हैं? लिखिए। (कविता में आए शब्द — तरुवर, बिपति, छिटकाय, सुजान, सरवर, साँचे, कपाल)
उत्तर
यह प्रश्न आपकी अपनी मातृभाषा का है, इसलिए हर विद्यार्थी का उत्तर अलग होगा। तरीक़ा यह है — पहले शब्द का हिंदी अर्थ पक्का कीजिए, फिर घर पर माँ, दादी या नानी से पूछिए कि उसी चीज़ को वे अपनी बोली में क्या कहती हैं, और वही शब्द तालिका में भरिए।
पहले हर शब्द का अर्थ —
| कविता में आया शब्द | हिंदी में अर्थ | दोहे की पंक्ति |
|---|---|---|
| तरुवर | पेड़, वृक्ष | “तरुवर फल नहिं खात हैं…” |
| बिपति | विपत्ति, संकट, मुसीबत | “बिपति कसौटी जे कसे…” |
| छिटकाय | झटका देकर, झटककर | “मत तोड़ो छिटकाय” |
| सुजान | सज्जन, समझदार और भला व्यक्ति | “संपति सँचहि सुजान” |
| सरवर | सरोवर, तालाब | “सरवर पियहिं न पान” |
| साँचे | सच्चे | “ते ही साँचे मीत” |
| कपाल | माथा, सिर | “जूती खात कपाल” |
नमूना उत्तर (कुछ भाषाओं के समानार्थक शब्द): अपनी भाषा का स्तंभ देखकर मिलाइए, और जो भाषा यहाँ न हो उसके लिए घर के बड़ों से पूछिए।
| शब्द | भोजपुरी / अवधी | मराठी | बांग्ला | गुजराती | तमिल |
|---|---|---|---|---|---|
| तरुवर | गाछ, पेड़ | झाड (वृक्ष) | गाछ | झाड | मरम् |
| बिपति | बिपत, मुसीबत | संकट, आपत्ती | बिपद | आफत, संकट | तुन्बम् |
| छिटकाय | झटकि के | हिसका देऊन | झाटका दिये | झटको मारीने | इळुत्तु |
| सुजान | सुजान, भलमानुस | सज्जन | सज्जन, भालो लोक | सज्जन | नल्लवर् |
| सरवर | पोखरा, ताल | तळे, सरोवर | पुकुर, दीघि | तळाव | कुळम् |
| साँचे | साँच, सच्चा | खरे | सत्यि, खाँटि | साचा | उण्मैयान |
| कपाल | माथ, कपार | कपाळ, डोके | कपाल, माथा | कपाळ, माथुं | नेट्ट्रि |
यह गतिविधि क्यों दी गई है: ध्यान दीजिए कि कई शब्द लगभग हर भाषा में एक जैसे हैं — ‘कपाल’ हिंदी, मराठी, बांग्ला, गुजराती चारों में मिलता-जुलता है; ‘सरोवर’ भी। इसका कारण यह है कि ये सब शब्द संस्कृत से आए हैं। जब आप अपनी मातृभाषा का शब्द लिखकर हिंदी से मिलाते हैं, तो आप अपने आप देख लेते हैं कि भारत की भाषाएँ आपस में कितनी जुड़ी हुई हैं।
कक्षा के लिए सुझाव: श्यामपट्ट पर सात शब्द लिखकर हर विद्यार्थी से अपनी बोली का शब्द बुलवाइए और उसके नीचे लिखते जाइए। एक ही कक्षा में ‘तरुवर’ के आठ-दस रूप निकल आएँगे — यही कक्षा की सबसे सुंदर ‘शब्द-संपदा’ है।