मल्हार अध्याय 5 शब्द-संपदा

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
कविता में आए कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इन शब्दों को आपकी मातृभाषा में क्या कहते हैं? लिखिए। (कविता में आए शब्द — तरुवर, बिपति, छिटकाय, सुजान, सरवर, साँचे, कपाल)
उत्तर

यह प्रश्न आपकी अपनी मातृभाषा का है, इसलिए हर विद्यार्थी का उत्तर अलग होगा। तरीक़ा यह है — पहले शब्द का हिंदी अर्थ पक्का कीजिए, फिर घर पर माँ, दादी या नानी से पूछिए कि उसी चीज़ को वे अपनी बोली में क्या कहती हैं, और वही शब्द तालिका में भरिए।

पहले हर शब्द का अर्थ —

कविता में आया शब्दहिंदी में अर्थदोहे की पंक्ति
तरुवरपेड़, वृक्ष“तरुवर फल नहिं खात हैं…”
बिपतिविपत्ति, संकट, मुसीबत“बिपति कसौटी जे कसे…”
छिटकायझटका देकर, झटककर“मत तोड़ो छिटकाय”
सुजानसज्जन, समझदार और भला व्यक्ति“संपति सँचहि सुजान”
सरवरसरोवर, तालाब“सरवर पियहिं न पान”
साँचेसच्चे“ते ही साँचे मीत”
कपालमाथा, सिर“जूती खात कपाल”
नमूना उत्तर (कुछ भाषाओं के समानार्थक शब्द): अपनी भाषा का स्तंभ देखकर मिलाइए, और जो भाषा यहाँ न हो उसके लिए घर के बड़ों से पूछिए।
शब्दभोजपुरी / अवधीमराठीबांग्लागुजरातीतमिल
तरुवरगाछ, पेड़झाड (वृक्ष)गाछझाडमरम्
बिपतिबिपत, मुसीबतसंकट, आपत्तीबिपदआफत, संकटतुन्बम्
छिटकायझटकि केहिसका देऊनझाटका दियेझटको मारीनेइळुत्तु
सुजानसुजान, भलमानुससज्जनसज्जन, भालो लोकसज्जननल्लवर्
सरवरपोखरा, तालतळे, सरोवरपुकुर, दीघितळावकुळम्
साँचेसाँच, सच्चाखरेसत्यि, खाँटिसाचाउण्मैयान
कपालमाथ, कपारकपाळ, डोकेकपाल, माथाकपाळ, माथुंनेट्ट्रि
यह गतिविधि क्यों दी गई है: ध्यान दीजिए कि कई शब्द लगभग हर भाषा में एक जैसे हैं — ‘कपाल’ हिंदी, मराठी, बांग्ला, गुजराती चारों में मिलता-जुलता है; ‘सरोवर’ भी। इसका कारण यह है कि ये सब शब्द संस्कृत से आए हैं। जब आप अपनी मातृभाषा का शब्द लिखकर हिंदी से मिलाते हैं, तो आप अपने आप देख लेते हैं कि भारत की भाषाएँ आपस में कितनी जुड़ी हुई हैं।
कक्षा के लिए सुझाव: श्यामपट्ट पर सात शब्द लिखकर हर विद्यार्थी से अपनी बोली का शब्द बुलवाइए और उसके नीचे लिखते जाइए। एक ही कक्षा में ‘तरुवर’ के आठ-दस रूप निकल आएँगे — यही कक्षा की सबसे सुंदर ‘शब्द-संपदा’ है।
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