मल्हार अध्याय 2 शब्दों के जोड़े, विभिन्न प्रकार के

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) “जैसे-जैसे मेरे खेल में निखार आता गया, वैसे-वैसे मुझे तरक्की भी मिलती गई।” इस वाक्य में ‘जैसे-जैसे’ और ‘वैसे-वैसे’ शब्दों के जोड़े हैं जिनमें एक ही शब्द दो बार उपयोग में लाया गया है। ऐसे जोड़ों को ‘शब्द-युग्म’ कहते हैं। शब्द-युग्म में दो शब्दों के बीच में छोटी-सी रेखा लगाई जाती है जिसे योजक चिह्न कहते हैं। योजक यानी जोड़ने वाला। आप भी ऐसे पाँच शब्द-युग्म लिखिए।
उत्तर

जिन शब्द-युग्मों में एक ही शब्द दो बार आता है, उन्हें पुनरुक्त शब्द कहते हैं। पाँच उदाहरण और उनका प्रयोग—

शब्द-युग्मअर्थवाक्य में प्रयोग
धीरे-धीरेबहुत आहिस्ता, थोड़ा-थोड़ा करकेधीरे-धीरे उसका डर दूर हो गया।
बार-बारकई-कई बारसूबेदार मेजर तिवारी बार-बार ध्यानचंद से हॉकी खेलने के लिए कहते थे।
घर-घरहर घर मेंध्यानचंद का नाम आज घर-घर में जाना जाता है।
कभी-कभीबीच-बीच में, यदा-कदाकभी-कभी हार से भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
पास-पासबिलकुल नज़दीकदोनों खिलाड़ी पास-पास खड़े होकर योजना बना रहे थे।

पाठ में आए ऐसे और शब्द-युग्म: जैसे-जैसे, वैसे-वैसे, बार-बार, थोड़ी-थोड़ी, एक-एक, दो-दो, अपनी-अपनी, अपने-अपने, बारी-बारी, सब के सब।

योजक चिह्न (-) क्यों लगाते हैं: ‘बार बार’ लिखने पर वे दो अलग शब्द लगते हैं, पर ‘बार-बार’ लिखने पर वे मिलकर एक ही अर्थ देते हैं। योजक चिह्न यही बताता है कि ये दोनों शब्द अब एक इकाई बन चुके हैं। ‘योजक’ का अर्थ ही है — जोड़ने वाला
ध्यान रखिए: पुनरुक्त शब्द अर्थ में ज़ोर या निरंतरता ले आते हैं। ‘मैंने पढ़ा’ और ‘मैंने बार-बार पढ़ा’ — दूसरे वाक्य में मेहनत साफ़ दिखाई देती है।
प्र2.
(ख) “खेल के मैदान में धक्का-मुक्की और नोंक-झोंक की घटनाएँ होती रहती हैं।” इस वाक्य में भी आपको दो शब्द-युग्म दिखाई दे रहे हैं, लेकिन इन शब्द-युग्मों के दोनों शब्द भिन्न-भिन्न हैं, एक जैसे नहीं हैं। आप भी ऐसे पाँच शब्द-युग्म लिखिए जिनमें दोनों शब्द भिन्न-भिन्न हों।
उत्तर

यहाँ दोनों शब्द अलग-अलग होते हैं, पर मिलकर एक ही भाव देते हैं। पाँच उदाहरण—

शब्द-युग्मअर्थवाक्य में प्रयोग
हार-जीतहारना और जीतना, दोनोंहार-जीत तो खेल का हिस्सा है, मन छोटा नहीं करना चाहिए।
माता-पितामाँ और पितामेरे माता-पिता हर मैच देखने आते हैं।
रात-दिनहर समय, लगातारवह रात-दिन अभ्यास करके टीम में चुना गया।
लेन-देनआपसी व्यवहार, आदान-प्रदानदुकानदार का लेन-देन बहुत साफ़ है।
आना-जानाआवागमन, आवाजाहीबारिश में गाँव तक आना-जाना कठिन हो जाता है।

और भी उदाहरण: धूम-धाम, हँसी-मज़ाक, ऊँच-नीच, भला-बुरा, दाल-रोटी, सुबह-शाम, देश-विदेश, खान-पान, मेल-जोल।

तीन तरह के जोड़े पहचानिए:
  • दोनों शब्द अलग और दोनों का अपना अर्थ — हार-जीत, माता-पिता, लेन-देन।
  • दूसरा शब्द निरर्थक (केवल तुक के लिए) — धक्का-मुक्की, रोटी-वोटी, चाय-वाय। ‘मुक्की’ अकेले कोई शब्द नहीं है।
  • दोनों शब्द मिलती-जुलती ध्वनि वाले — नोंक-झोंक, गोल-मोल, अटर-पटर।
पाठ के दोनों उदाहरण — धक्का-मुक्की और नोंक-झोंक — इसी दूसरी और तीसरी तरह के हैं।
प्र3.
(ग) “हार या जीत मेरी नहीं, बल्कि पूरे देश की है।” “आज मैं जहाँ भी जाता हूँ बच्चे व बूढ़े मुझे घेर लेते हैं।” इन वाक्यों में जिन शब्दों के नीचे रेखा खिंची है, उन्हें ध्यान से पढ़िए। हम इन शब्दों को योजक की सहायता से भी लिख सकते हैं, जैसे— हार-जीत, बच्चे-बूढ़े आदि। आप नीचे दिए गए शब्दों को योजक की सहायता से लिखिए— • अच्छा या बुरा • छोटा या बड़ा • अमीर और गरीब • उत्तर और दक्षिण • गुरु और शिष्य • अमृत या विष
उत्तर
दिया गया रूपयोजक की सहायता सेवाक्य में प्रयोग
अच्छा या बुराअच्छा-बुराअच्छा-बुरा समझने की उम्र अब आ गई है।
छोटा या बड़ाछोटा-बड़ाखेल के मैदान में छोटा-बड़ा कोई नहीं होता।
अमीर और गरीबअमीर-गरीबओलंपिक में अमीर-गरीब सभी देशों के खिलाड़ी एक साथ खेलते हैं।
उत्तर और दक्षिणउत्तर-दक्षिणयह सड़क पूरे नगर को उत्तर-दक्षिण जोड़ती है।
गुरु और शिष्यगुरु-शिष्यध्यानचंद और तिवारी जी का नाता गुरु-शिष्य जैसा था।
अमृत या विषअमृत-विषकड़वे शब्द विष हैं और मीठे शब्द अमृत — अमृत-विष का अंतर बोली से ही पता चलता है।
ध्यान दीजिए: ‘या’ और ‘और’ हटाकर उनकी जगह छोटी-सी रेखा ( - ) लगा दीजिए — बस, शब्द-युग्म बन गया। ये जोड़े विपरीत अर्थ वाले शब्दों से बने हैं (अच्छा × बुरा, अमीर × गरीब, अमृत × विष), फिर भी जुड़कर एक ही भाव देते हैं — यानी ‘सब तरह के’ या ‘दोनों तरह के’। ‘गुरु-शिष्य’ विपरीत नहीं, जोड़ीदार शब्द हैं।
करके देखिए: इसी ढंग से और जोड़े बनाइए — दिन और रात → दिन-रात; लाभ और हानि → लाभ-हानि; सुख या दुख → सुख-दुख; जीवन और मरण → जीवन-मरण
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ