मल्हार अध्याय 2 संस्मरण की रचना

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“उन दिनों में मैं, पंजाब रेजिमेंट की ओर से खेला करता था।” इस वाक्य को पढ़कर ऐसा लगता है मानो लेखक आपसे यानी पाठक से अपनी यादों को साझा कर रहा है। ध्यान देंगे तो इस पाठ में ऐसी और भी अनेक विशेष बातें आपको दिखाई देंगी। इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए। (क) अपने-अपने समूह में मिलकर इस संस्मरण की विशेषताओं की सूची बनाइए।
उत्तर

ध्यान से पढ़ने पर ‘गोल’ में संस्मरण की ये विशेषताएँ दिखाई देती हैं—

विशेषतापाठ से उदाहरणइससे क्या होता है
1. ‘मैं’ शैली (उत्तम पुरुष)“मैं पंजाब रेजिमेंट की ओर से खेला करता था।”लेखक स्वयं अपनी बात कहता है, इसलिए बात सच्ची और अपनी-सी लगती है।
2. बीती हुई सच्ची घटनाएँसिर पर स्टिक लगना, छह गोल करना, कप्तान बननासंस्मरण कल्पना नहीं होता; इसमें वही लिखा जाता है जो सचमुच घटा हो।
3. समय और स्थान का उल्लेखसन् 1933, सन् 1905, प्रयाग, झाँसी, सन् 1936, बर्लिनतिथियाँ और जगहें घटना को वास्तविक बना देती हैं।
4. असली नामपंजाब रेजिमेंट, सैंपर्स एंड माइनर्स टीम, सूबेदार मेजर तिवारीपात्र गढ़े हुए नहीं, सच्चे व्यक्ति और संस्थाएँ हैं।
5. पाठक से सीधी बात“तो देखा आपने मेरा बदला लेने का ढंग?”, “सच मानो…”ऐसा लगता है मानो लेखक सामने बैठकर बातें कर रहा हो।
6. संवाद“तुम चिंता मत करो, इसका बदला मैं ज़रूर लूँगा।”बातचीत ज्यों-की-त्यों देने से दृश्य आँखों के सामने खिंच जाता है।
7. भूतकाल की क्रियाएँखेला करता था, चलता था, दे मारी, कर दिएपूरी रचना यादों की है, इसलिए क्रियाएँ बीते समय की हैं।
8. सरल, बोलचाल की भाषाधक्का-मुक्की, नोंक-झोंक, झटपट, नौसिखिया, तरक्कीभाषा भारी नहीं है; सिपाही की सीधी-सादी ज़बान है।
9. घटनाओं का क्रम1933 का मैच → जन्म और भर्ती → 1936 का ओलंपिकलेखक पहले एक रोचक घटना सुनाता है, फिर पीछे लौटकर पूरा जीवन बताता है — इससे पाठक बँधा रहता है।
10. अंत में सीख“हार या जीत मेरी नहीं, बल्कि पूरे देश की है।”संस्मरण केवल घटना नहीं सुनाता, जीवन का एक अनुभव भी दे जाता है।
11. विनम्रता“मेरे पास सफलता का कोई गुरु-मंत्र तो है नहीं।”लेखक अपनी बड़ाई नहीं करता — यही अच्छे संस्मरण की पहचान है।
संस्मरण किसे कहते हैं: ‘सम् + स्मरण’ यानी अच्छी तरह याद करना। जब लेखक अपने जीवन की किसी सच्ची घटना या किसी व्यक्ति की याद को अपने शब्दों में लिखता है, तो वह संस्मरण कहलाता है। पूरा जीवन लिखा जाए तो वह आत्मकथा बन जाती है — यह पाठ ध्यानचंद की आत्मकथा ‘गोल’ का ही एक अंश है।
प्र2.
(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर

यह प्रस्तुति (presentation) की गतिविधि है। इसे इस तरह कीजिए—

  1. सूची छाँटिए। समूह की सूची में से सबसे स्पष्ट 5–6 विशेषताएँ चुन लीजिए, ताकि बात दोहराई न जाए।
  2. हर विशेषता के साथ प्रमाण रखिए। केवल “भाषा सरल है” मत कहिए — कहिए, “भाषा सरल है, जैसे ‘झटपट छह गोल कर दिए’।”
  3. काम बाँट लीजिए। एक साथी विशेषता बोले, दूसरा पाठ की पंक्ति पढ़कर सुनाए।
  4. बोर्ड पर एक साझा सूची बनाइए। हर समूह की नई-नई बातें जोड़ते जाइए और दोहराई गई बातों पर निशान लगाइए — अंत में पूरी कक्षा की एक बड़ी सूची तैयार हो जाएगी।
  5. अंत में एक वाक्य में निष्कर्ष कहिए।
नमूना उत्तर (प्रस्तुति का आरंभ): “नमस्ते! हमारे समूह ने ‘गोल’ पाठ में संस्मरण की छह विशेषताएँ पहचानी हैं। पहली — यह पूरा पाठ ‘मैं’ शैली में है, जैसे ‘मैं पंजाब रेजिमेंट की ओर से खेला करता था’। दूसरी — इसमें सच्ची तिथियाँ और जगहें हैं, जैसे सन् 1933, सन् 1936, प्रयाग, झाँसी और बर्लिन। तीसरी — लेखक बीच-बीच में हमसे सीधे बात करता है, जैसे ‘तो देखा आपने मेरा बदला लेने का ढंग?’ … इन सब बातों से यह पाठ कहानी नहीं, बल्कि एक सच्चा संस्मरण लगता है।”
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