प्र1.
संस्मरण को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए— (क) ध्यानचंद की सफलता का क्या रहस्य था?
उत्तर
ध्यानचंद के अनुसार उनकी सफलता का कोई जादू या गुरु-मंत्र नहीं था। वे स्वयं कहते हैं — “मेरे पास सफलता का कोई गुरु-मंत्र तो है नहीं। हर किसी से यही कहता कि लगन, साधना और खेल भावना ही सफलता के सबसे बड़े मंत्र हैं।”
| मंत्र | इसका अर्थ | ध्यानचंद के जीवन में यह कैसे दिखा |
|---|---|---|
| लगन | किसी काम में मन का पूरी तरह लग जाना, धुन | छावनी में हॉकी का कोई निश्चित समय नहीं था — “सैनिक जब चाहे मैदान में पहुँच जाते और अभ्यास शुरू कर देते।” जिसमें लगन हो, वही ऐसे समय निकालता है। |
| साधना | लगातार, बिना ऊबे किया गया अभ्यास | वे शुरू में “एक नौसिखिया खिलाड़ी” थे। लगातार अभ्यास से ही “मेरे खेल में निखार आता गया” और वे कप्तान तक पहुँचे। |
| खेल भावना | खेल को सही भाव से खेलना — न गुस्सा, न ईर्ष्या, न अकेले नाम कमाने की चाह | चोट मारने वाले खिलाड़ी को ‘दोस्त’ कहना, गोल का श्रेय साथी को देना, और जीत को देश की जीत मानना। |
ध्यान दीजिए: तीनों में से पहले दो मेहनत से जुड़े हैं और तीसरा स्वभाव से। ध्यानचंद का कहना यही है कि अच्छा खिलाड़ी बनने के लिए अच्छा इनसान होना भी ज़रूरी है।