मल्हार अध्याय 2 साझी समझ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) आपने इस खेल के नियम पढ़कर अच्छी तरह समझ लिए हैं। अब अपने मित्रों के साथ मिलकर ‘डाँडी’ या ‘गोथा’ खेल खेलिए।
उत्तर

यह करके सीखने की गतिविधि है। खेलने से पहले यह तैयारी कर लीजिए—

  1. सामान जुटाइए। बाँस या किसी सुरक्षित लकड़ी की नीचे से मुड़ी डंडियाँ (गोथा) और एक छोटी, हल्की गेंद (दुईत)। यदि बाँस न मिले तो प्लास्टिक की हॉकी स्टिक और रबर की गेंद से भी काम चल जाएगा।
  2. मैदान बनाइए। राख या चूने से एक बड़ा घेरा खींचिए, बीच में एक छोटा वृत्त बनाइए और दोनों ओर एक-एक ‘डी’ बना लीजिए। बीच में एक रेखा ज़रूर खींचिए, क्योंकि हार-जीत इसी रेखा के पार गेंद ढकेलने से तय होगी।
  3. दो दल बनाइए — हर दल में कम-से-कम दो खिलाड़ी।
  4. टॉस कीजिए। जीतने वाला दल खेल शुरू करेगा।
  5. दो नियम ज़ोर से दोहराइए — गेंद को शरीर से न छूना, और हवाई शॉट न मारना। एक साथी को ‘निर्णायक’ बना दीजिए जो गिनती रखे कि किस दल ने कितनी बार गेंद विरोधी के पाले में ढकेली।
  6. खेल के बाद बात कीजिए — यह हॉकी से कहाँ आसान लगा और कहाँ कठिन?
सुरक्षा सबसे पहले: डंडी हमेशा घुटनों से नीचे रखिए और गेंद को कभी हवा में मत उछालिए — पाठ में दिया गया यह नियम केवल खेल का नियम नहीं, सुरक्षा का नियम भी है। खेलने से पहले मैदान से पत्थर और काँच हटा लीजिए, और शिक्षक या किसी बड़े की देख-रेख में ही खेलिए।
नमूना उत्तर (खेल के बाद की टिप्पणी): “हमने आठ बच्चों के दो दल बनाकर मैदान में यह खेल खेला। शुरू में गेंद बार-बार पैर से छू जाती थी और हमें अंक गँवाने पड़ते थे, पर थोड़ी देर में हम सँभल गए। सबसे मज़े की बात यह लगी कि गोथा दोनों ओर से चलाया जा सकता है, इसलिए गेंद को मोड़ना हॉकी से आसान था। हमारे दल ने गेंद नौ बार विरोधी के पाले में ढकेली और दूसरे दल ने छह बार, इसलिए हम जीत गए।”
प्र2.
(ख) आप भी ‘डाँडी’ या ‘गोथा’ जैसे अनेक स्वदेशी खेल अपने मित्रों के साथ मिलकर अपने विद्यालय, घर या मोहल्ले में खेलते होंगे। अब आप ऐसे ही किसी एक खेल के नियम इस प्रकार से लिखिए कि उन्हें पढ़कर कोई भी बच्चा उस खेल को समझ सके और खेल सके।
उत्तर

यह लेखन का प्रश्न है। नियम लिखते समय ठीक वही क्रम रखिए जो पुस्तक ने ‘डाँडी या गोथा’ के लिए रखा है — इससे लिखना आसान भी हो जाता है और पढ़ने वाले को सब कुछ मिल भी जाता है।

भागउसमें क्या लिखें
1. खेल का नाम और परिचययह कहाँ खेला जाता है, दूसरे नाम क्या हैं, कितने बच्चे खेल सकते हैं
2. खेल सामग्रीक्या-क्या चाहिए और कितना बड़ा
3. मैदानकितना बड़ा, कौन-सी रेखाएँ या घेरे बनाने हैं
4. कैसे खेलेंक्रम से, गिनती लगाकर — शुरुआत कैसे होती है से लेकर खेल आगे कैसे बढ़ता है तक
5. विशेष नियमक्या करना मना है (‘आउट’ कब होते हैं)
6. हार-जीतविजेता कैसे तय होगा
नमूना उत्तर:
पिट्ठू (सतोलिया / लगोरी / सात पत्थर)

परिचय — यह भारत के लगभग हर गाँव और मुहल्ले में खेला जाने वाला खेल है। इसे कहीं पिट्ठू, कहीं सतोलिया और कहीं लगोरी कहते हैं। इसमें दो दल होते हैं और हर दल में कम-से-कम तीन खिलाड़ी।

खेल सामग्री — 1. सात चपटे पत्थर, जो एक-दूसरे से थोड़े छोटे हों। 2. एक रबर या कपड़े की नरम गेंद।

मैदान — खुली, समतल जगह। बीच में सातों पत्थर एक के ऊपर एक रखकर मीनार बनाइए। मीनार से लगभग छह कदम दूर एक रेखा खींच लीजिए, जहाँ से गेंद फेंकी जाएगी।

कैसे खेलें —
1. टॉस से तय कीजिए कि कौन-सा दल पहले गेंद फेंकेगा (हमलावर दल) और कौन-सा रोकेगा (बचाव दल)।
2. हमलावर दल का एक खिलाड़ी रेखा से गेंद फेंककर पत्थरों की मीनार गिराता है। हर खिलाड़ी को तीन मौके मिलते हैं।
3. मीनार गिरते ही हमलावर दल के खिलाड़ी दौड़कर पत्थरों को फिर से एक के ऊपर एक जमाने की कोशिश करते हैं।
4. इसी बीच बचाव दल गेंद उठाकर हमलावर खिलाड़ियों को गेंद से छूने (मारने) की कोशिश करता है।
5. जिस खिलाड़ी को गेंद छू जाए, वह उस पारी के लिए बाहर हो जाता है।

विशेष नियम — (क) गेंद कमर से नीचे ही मारी जाएगी, सिर या मुँह पर नहीं। (ख) गेंद हाथ में लेकर दौड़ना मना है; उसे साथी को पास देना होगा। (ग) मीनार बनाते समय पत्थर पैर से नहीं छुए जाएँगे।

हार-जीत — यदि हमलावर दल पूरे सात पत्थर जमाकर ज़ोर से “पिट्ठू!” बोल दे, तो उसे एक अंक मिलता है। यदि उससे पहले उसके सारे खिलाड़ी गेंद से छू लिए जाएँ, तो अंक बचाव दल को मिलता है। जिस दल के पाँच अंक पहले पूरे हों, वही विजयी।
लिखते समय ध्यान रखिए: वाक्य छोटे रखिए और हर नियम को अलग नंबर दीजिए। ‘आप’ या ‘खिलाड़ी’ कहकर सीधे निर्देश दीजिए — “गेंद फेंकिए”, “पत्थर जमाइए”। ऐसे नियम पढ़कर वह बच्चा भी खेल सकेगा जिसने यह खेल कभी देखा न हो — और यही इस प्रश्न की असली कसौटी है।
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