प्र1.
(क) आपने इस खेल के नियम पढ़कर अच्छी तरह समझ लिए हैं। अब अपने मित्रों के साथ मिलकर ‘डाँडी’ या ‘गोथा’ खेल खेलिए।
उत्तर
यह करके सीखने की गतिविधि है। खेलने से पहले यह तैयारी कर लीजिए—
- सामान जुटाइए। बाँस या किसी सुरक्षित लकड़ी की नीचे से मुड़ी डंडियाँ (गोथा) और एक छोटी, हल्की गेंद (दुईत)। यदि बाँस न मिले तो प्लास्टिक की हॉकी स्टिक और रबर की गेंद से भी काम चल जाएगा।
- मैदान बनाइए। राख या चूने से एक बड़ा घेरा खींचिए, बीच में एक छोटा वृत्त बनाइए और दोनों ओर एक-एक ‘डी’ बना लीजिए। बीच में एक रेखा ज़रूर खींचिए, क्योंकि हार-जीत इसी रेखा के पार गेंद ढकेलने से तय होगी।
- दो दल बनाइए — हर दल में कम-से-कम दो खिलाड़ी।
- टॉस कीजिए। जीतने वाला दल खेल शुरू करेगा।
- दो नियम ज़ोर से दोहराइए — गेंद को शरीर से न छूना, और हवाई शॉट न मारना। एक साथी को ‘निर्णायक’ बना दीजिए जो गिनती रखे कि किस दल ने कितनी बार गेंद विरोधी के पाले में ढकेली।
- खेल के बाद बात कीजिए — यह हॉकी से कहाँ आसान लगा और कहाँ कठिन?
सुरक्षा सबसे पहले: डंडी हमेशा घुटनों से नीचे रखिए और गेंद को कभी हवा में मत उछालिए — पाठ में दिया गया यह नियम केवल खेल का नियम नहीं, सुरक्षा का नियम भी है। खेलने से पहले मैदान से पत्थर और काँच हटा लीजिए, और शिक्षक या किसी बड़े की देख-रेख में ही खेलिए।
नमूना उत्तर (खेल के बाद की टिप्पणी): “हमने आठ बच्चों के दो दल बनाकर मैदान में यह खेल खेला। शुरू में गेंद बार-बार पैर से छू जाती थी और हमें अंक गँवाने पड़ते थे, पर थोड़ी देर में हम सँभल गए। सबसे मज़े की बात यह लगी कि गोथा दोनों ओर से चलाया जा सकता है, इसलिए गेंद को मोड़ना हॉकी से आसान था। हमारे दल ने गेंद नौ बार विरोधी के पाले में ढकेली और दूसरे दल ने छह बार, इसलिए हम जीत गए।”