मल्हार अध्याय 2 समाचार-पत्र से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) क्या आप समाचार-पत्र पढ़ते हैं? समाचार-पत्रों में प्रतिदिन खेल के समाचारों का एक पृष्ठ प्रकाशित होता है। अपने घर या पुस्तकालय से पिछले सप्ताह के समाचार पत्रों को देखिए। अपनी पसंद का एक खेल-समाचार अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर

यह पढ़ने और लिखने की गतिविधि है। इसे इस तरह पूरा कीजिए—

  1. खेल-पृष्ठ ढूँढ़िए। हिंदी के अख़बारों में खेल का पन्ना प्रायः अंतिम या उससे पहले वाला होता है और उस पर ‘खेल’ या ‘खेल-जगत’ लिखा रहता है।
  2. एक समाचार चुनिए जो आपको सचमुच रोचक लगे — किसी बड़े मैच का, किसी नए रिकॉर्ड का या अपने ज़िले/राज्य के किसी खिलाड़ी का।
  3. समाचार की तिथि और अख़बार का नाम सबसे ऊपर लिख लीजिए — यही सही तरीक़ा है।
  4. अपने शब्दों में लिखिए। हर समाचार पाँच बातों का उत्तर देता है — क्या हुआ, किसके साथ हुआ, कब, कहाँ और कैसे। इन्हीं पाँच के आसपास 6–8 वाक्य लिखिए।
  5. अंत में दो पंक्तियाँ अपनी ओर से जोड़िए — यह समाचार आपको क्यों अच्छा लगा।
खेल-समाचार का भागक्या लिखा जाता है
शीर्षककम शब्दों में पूरी बात — “भारत ने जीता स्वर्ण”
स्थान और तिथिनई दिल्ली, 20 अगस्त
पहला अनुच्छेदसबसे मुख्य बात — कौन जीता, कितने अंतर से
बीच का भागमैच का हाल, किसने क्या किया, कौन-से गोल या अंक
अंतखिलाड़ी या कोच का कथन, अगला मुक़ाबला कब है
नमूना उत्तर (खेल-समाचार):
शीर्षक — भारतीय हॉकी टीम ने फ़ाइनल में बाज़ी मारी
(दैनिक समाचार-पत्र, खेल पृष्ठ, 20 अगस्त)

चेन्नई, 19 अगस्त। एशियाई हॉकी चैंपियंस ट्रॉफ़ी के फ़ाइनल में भारत ने रोमांचक मुक़ाबले में जीत दर्ज की। पहले हाफ़ में दोनों टीमें बराबरी पर थीं, लेकिन दूसरे हाफ़ में भारतीय खिलाड़ियों ने तेज़ी पकड़ी और लगातार दो गोल कर दिए। भारत की ओर से पहला गोल पेनल्टी कॉर्नर पर हुआ और दूसरा मैदानी गोल था। गोलकीपर ने अंतिम मिनटों में दो शानदार बचाव करके टीम की बढ़त बनाए रखी। मैच के बाद कप्तान ने कहा कि यह जीत किसी एक खिलाड़ी की नहीं, पूरी टीम की मेहनत का फल है।

मुझे यह समाचार क्यों अच्छा लगा: कप्तान की बात मुझे मेजर ध्यानचंद की याद दिला गई, जो कहते थे कि हार या जीत मेरी नहीं, पूरे देश की है।
प्र2.
(ख) मान लीजिए कि आप एक खेल-संवाददाता हैं और किसी खेल का आँखों देखा प्रसारण कर रहे हैं। अपने समूह के साथ मिलकर कक्षा में उस खेल का आँखों देखा हाल प्रस्तुत कीजिए। (संकेत— इस कार्य में आप आकाशवाणी या दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले खेल-प्रसारणों की कमेंटरी की शैली का उपयोग कर सकते हैं। बारी-बारी से प्रत्येक समूह कक्षा में सामने डेस्क या कुर्सियों पर बैठ जाएगा और पाँच मिनट के लिए किसी खेल के सजीव प्रसारण की कमेंटरी का अभिनय करेगा।)
उत्तर

यह अभिनय और बोलने की गतिविधि है। ‘आँखों देखा हाल’ यानी जो सामने घट रहा है, उसे उसी समय शब्दों में इस तरह कहना कि सुनने वाले को दृश्य दिखाई देने लगे।

तैयारी कैसे करें:

  1. खेल चुनिए — हॉकी, कबड्डी या क्रिकेट, जिसे समूह के सब लोग जानते हों।
  2. भूमिकाएँ बाँटिए — एक मुख्य कमेंटेटर, एक सहयोगी (जो बीच-बीच में जानकारी जोड़े), एक विशेषज्ञ (पूर्व खिलाड़ी) और एक जो दर्शकों के शोर की आवाज़ बनाए।
  3. खिलाड़ियों के नाम पहले तय कर लीजिए, वरना बोलते समय अटक जाएँगे।
  4. वर्तमान काल में बोलिए — “गेंद अब मीरा के पास है”, न कि “गेंद मीरा के पास थी”। यही कमेंटरी की जान है।
  5. आवाज़ में उतार-चढ़ाव रखिए — साधारण पास पर धीमी आवाज़, गोल पर ऊँची और तेज़।
  6. छोटे-छोटे वाक्य बोलिए और खेल के शब्द इस्तेमाल कीजिए — पास, ड्रिबल, पेनल्टी कॉर्नर, बचाव, मध्य रेखा, सीटी।
नमूना उत्तर (पाँच मिनट की कमेंटरी का आरंभ):
“नमस्कार दर्शकों! मैं आपका साथी अनुज, और आप देख रहे हैं जिला विद्यालय हॉकी प्रतियोगिता का फ़ाइनल मुक़ाबला — नवोदय विद्यालय बनाम आदर्श विद्यालय। मैदान खचाखच भरा है… और सीटी बज चुकी है, खेल शुरू!

गेंद नवोदय के पास… रोहित आगे बढ़ रहे हैं… एक साफ़ पास बाईं ओर मीरा को… मीरा तेज़ दौड़ रही हैं, दो खिलाड़ियों को छकाया… ओह! आदर्श की डिफ़ेंडर ने गेंद रोक ली। गेंद अब मध्य रेखा की ओर लौट रही है।

… और यह पेनल्टी कॉर्नर है, दर्शको, पेनल्टी कॉर्नर! नवोदय को सुनहरा मौका… गेंद रुकी… रोहित का ज़ोरदार हिट… गोऽऽल! जी हाँ, गोल हो गया! पूरा मैदान तालियों से गूँज उठा है। नवोदय अब एक-शून्य से आगे…

… खेल के अंतिम क्षण… सीटी बजी! नवोदय विद्यालय दो-एक से विजयी! पर देखिए, दोनों टीमें हाथ मिला रही हैं, मुस्कुरा रही हैं — यही तो असली खेल भावना है। इसी के साथ मुझे और मेरे साथियों को इजाज़त दीजिए। नमस्कार!”
आकलन में क्या देखा जाएगा: आवाज़ स्पष्ट है या नहीं, वर्तमान काल का प्रयोग, खेल के शब्दों की सही समझ, समूह के सदस्यों में तालमेल, और यह कि सुनने वाले को दृश्य दिखाई दिया या नहीं।
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