प्र1.
(क) क्या आप समाचार-पत्र पढ़ते हैं? समाचार-पत्रों में प्रतिदिन खेल के समाचारों का एक पृष्ठ प्रकाशित होता है। अपने घर या पुस्तकालय से पिछले सप्ताह के समाचार पत्रों को देखिए। अपनी पसंद का एक खेल-समाचार अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर
यह पढ़ने और लिखने की गतिविधि है। इसे इस तरह पूरा कीजिए—
- खेल-पृष्ठ ढूँढ़िए। हिंदी के अख़बारों में खेल का पन्ना प्रायः अंतिम या उससे पहले वाला होता है और उस पर ‘खेल’ या ‘खेल-जगत’ लिखा रहता है।
- एक समाचार चुनिए जो आपको सचमुच रोचक लगे — किसी बड़े मैच का, किसी नए रिकॉर्ड का या अपने ज़िले/राज्य के किसी खिलाड़ी का।
- समाचार की तिथि और अख़बार का नाम सबसे ऊपर लिख लीजिए — यही सही तरीक़ा है।
- अपने शब्दों में लिखिए। हर समाचार पाँच बातों का उत्तर देता है — क्या हुआ, किसके साथ हुआ, कब, कहाँ और कैसे। इन्हीं पाँच के आसपास 6–8 वाक्य लिखिए।
- अंत में दो पंक्तियाँ अपनी ओर से जोड़िए — यह समाचार आपको क्यों अच्छा लगा।
| खेल-समाचार का भाग | क्या लिखा जाता है |
|---|---|
| शीर्षक | कम शब्दों में पूरी बात — “भारत ने जीता स्वर्ण” |
| स्थान और तिथि | नई दिल्ली, 20 अगस्त |
| पहला अनुच्छेद | सबसे मुख्य बात — कौन जीता, कितने अंतर से |
| बीच का भाग | मैच का हाल, किसने क्या किया, कौन-से गोल या अंक |
| अंत | खिलाड़ी या कोच का कथन, अगला मुक़ाबला कब है |
नमूना उत्तर (खेल-समाचार):
शीर्षक — भारतीय हॉकी टीम ने फ़ाइनल में बाज़ी मारी
(दैनिक समाचार-पत्र, खेल पृष्ठ, 20 अगस्त)
चेन्नई, 19 अगस्त। एशियाई हॉकी चैंपियंस ट्रॉफ़ी के फ़ाइनल में भारत ने रोमांचक मुक़ाबले में जीत दर्ज की। पहले हाफ़ में दोनों टीमें बराबरी पर थीं, लेकिन दूसरे हाफ़ में भारतीय खिलाड़ियों ने तेज़ी पकड़ी और लगातार दो गोल कर दिए। भारत की ओर से पहला गोल पेनल्टी कॉर्नर पर हुआ और दूसरा मैदानी गोल था। गोलकीपर ने अंतिम मिनटों में दो शानदार बचाव करके टीम की बढ़त बनाए रखी। मैच के बाद कप्तान ने कहा कि यह जीत किसी एक खिलाड़ी की नहीं, पूरी टीम की मेहनत का फल है।
मुझे यह समाचार क्यों अच्छा लगा: कप्तान की बात मुझे मेजर ध्यानचंद की याद दिला गई, जो कहते थे कि हार या जीत मेरी नहीं, पूरे देश की है।
शीर्षक — भारतीय हॉकी टीम ने फ़ाइनल में बाज़ी मारी
(दैनिक समाचार-पत्र, खेल पृष्ठ, 20 अगस्त)
चेन्नई, 19 अगस्त। एशियाई हॉकी चैंपियंस ट्रॉफ़ी के फ़ाइनल में भारत ने रोमांचक मुक़ाबले में जीत दर्ज की। पहले हाफ़ में दोनों टीमें बराबरी पर थीं, लेकिन दूसरे हाफ़ में भारतीय खिलाड़ियों ने तेज़ी पकड़ी और लगातार दो गोल कर दिए। भारत की ओर से पहला गोल पेनल्टी कॉर्नर पर हुआ और दूसरा मैदानी गोल था। गोलकीपर ने अंतिम मिनटों में दो शानदार बचाव करके टीम की बढ़त बनाए रखी। मैच के बाद कप्तान ने कहा कि यह जीत किसी एक खिलाड़ी की नहीं, पूरी टीम की मेहनत का फल है।
मुझे यह समाचार क्यों अच्छा लगा: कप्तान की बात मुझे मेजर ध्यानचंद की याद दिला गई, जो कहते थे कि हार या जीत मेरी नहीं, पूरे देश की है।