प्र1.
(क) ध्यानचंद के स्थान पर आप होते तो क्या आप बदला लेते? यदि हाँ, तो बताइए कि आप बदला किस प्रकार लेते?
उत्तर
यह आपके अपने विचार का प्रश्न है, इसलिए उत्तर हर विद्यार्थी का अलग होगा। पर उत्तर पाठ के भाव से जुड़ा होना चाहिए — ध्यानचंद ने चोट का उत्तर चोट से नहीं, अपने खेल से दिया था।
अच्छे उत्तर में क्या होना चाहिए:
- पहले साफ़ कहिए — हाँ या नहीं;
- फिर बताइए कि किस तरीक़े से, और वह तरीक़ा हिंसा वाला न हो;
- अंत में एक कारण दीजिए — उस तरीक़े से क्या अच्छा होता है।
नमूना उत्तर: ध्यानचंद के स्थान पर मैं भी ‘बदला’ लेता, पर ठीक उसी ढंग से जिस ढंग से उन्होंने लिया। मैं उस खिलाड़ी को पलटकर स्टिक नहीं मारता, क्योंकि उससे मुझे भी चोट लगती, टीम एक खिलाड़ी से हाथ धो बैठती और खेल का सारा आनंद खत्म हो जाता। मैं और अधिक मन लगाकर खेलता और गोल करके दिखाता कि गुस्से से नहीं, खेल से जीता जाता है। मैच के बाद मैं उससे हाथ मिलाकर कहता, “खेल में गुस्सा मत लाओ, दोस्त।” मुझे लगता है कि इस तरह का बदला सामने वाले को शर्मिंदा भी कर देता है और अपना मन भी साफ़ रह जाता है — जैसे उस खिलाड़ी के साथ हुआ, वह “सचमुच बड़ा शर्मिंदा हुआ।”
दूसरा पक्ष भी ठीक है: कोई विद्यार्थी कह सकता है — “मैं बदला बिलकुल नहीं लेता, केवल क्षमा कर देता, क्योंकि खेल में चोट जान-बूझकर ही लगी हो, यह ज़रूरी नहीं।” यह भी सही उत्तर है, बशर्ते आप उसका कारण दें। ग़लत उत्तर केवल वही है जिसमें मारपीट या बदले की भावना हो।