मल्हार अध्याय 2 डायरी का प्रारंभ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
कुछ लोग प्रतिदिन थोड़ी-थोड़ी बातें किसी स्थान पर लिख लेते हैं। जो वे सोचते हैं, या जो उनके साथ उस दिन हुआ या जो उन्होंने देखा, उसे ईमानदारी से लिख लेते हैं या टाइप कर लेते हैं। इसे डायरी लिखना कहते हैं। क्या आप भी अपने मन की बातों और विचारों को लिखना चाहते हैं? यदि हाँ, तो आज से ही प्रारंभ कर दीजिए— • आप जहाँ लिखेंगे, वह माध्यम चुन लीजिए। आप किसी लेखन-पुस्तिका में या ऑनलाइन मंचों पर लिख सकते हैं। • आप प्रतिदिन, कुछ दिनों में एक बार या जब कुछ लिखने का मन करे तब लिख सकते हैं। • शब्दों या वाक्यों की कोई सीमा नहीं है चाहे दो वाक्य हों या दो पृष्ठ। आप जो मन में आए उसे उचित और शालीन शब्दों में लिख सकते हैं।
उत्तर

यह जीवन भर काम आने वाली आदत डालने की गतिविधि है। पुस्तक ने तीन बातें साफ़ कह दी हैं — माध्यम आपकी मर्ज़ी का, समय आपकी मर्ज़ी का और लंबाई की कोई सीमा नहीं। बस एक शर्त है — भाषा उचित और शालीन हो।

डायरी लिखते समय ये बातें ध्यान रखिए:

  • हर प्रविष्टि के ऊपर तिथि और दिन ज़रूर लिखिए — बाद में पढ़ने पर वही सबसे काम आता है।
  • लिखिए वही जो सचमुच हुआ या सचमुच महसूस हुआ। डायरी में सजावट की ज़रूरत नहीं, ईमानदारी की ज़रूरत है।
  • ‘आज कुछ खास नहीं हुआ’ वाले दिन भी दो पंक्तियाँ लिख दीजिए — आदत टूटनी नहीं चाहिए।
  • किसी के बारे में कड़वी या अपमानजनक बात मत लिखिए। जो बात आप किसी के सामने न कह सकें, वैसे शब्द डायरी में भी न रखिए।
  • बीच-बीच में एक छोटा-सा चित्र, पत्ती, टिकट या टिकट-चिप्पी चिपका दीजिए — डायरी और सुंदर बन जाएगी।
क्या लिखेंउदाहरण
दिन की कोई एक घटनाआज खेल के पीरियड में हमारी टीम पहली बार जीती।
कोई भाव या विचारआज मुझे बहुत डर लग रहा था, पर बोलने के बाद अच्छा लगा।
कुछ नया सीखा हुआआज पता चला कि ‘छावनी’ का अर्थ सैनिकों के रहने की जगह होता है।
कोई पढ़ी या सुनी बातध्यानचंद कहते थे — हार या जीत मेरी नहीं, पूरे देश की है।
कल के लिए कोई इरादाकल से रोज़ आधा घंटा हॉकी का अभ्यास करूँगा।
नमूना उत्तर (डायरी की एक प्रविष्टि):
मंगलवार, 20 अगस्त
आज हिंदी की कक्षा में हमने ‘गोल’ पाठ पढ़ा। मुझे वह जगह सबसे अच्छी लगी जहाँ ध्यानचंद जी को सिर पर हॉकी लग जाती है और वे लौटकर उसी खिलाड़ी की पीठ थपथपा देते हैं। मैं होता तो शायद गुस्सा कर बैठता।

खेल के पीरियड में हमारी टीम दो गोल से हार गई। पहले मुझे बहुत बुरा लगा, पर फिर पाठ की वह पंक्ति याद आ गई — “हार या जीत मेरी नहीं, बल्कि पूरे देश की है।” तब लगा कि हारकर मुँह लटकाना भी तो खेल भावना के विरुद्ध है। कल से मैं रोज़ शाम को आधा घंटा अभ्यास करूँगा।

आज एक नया शब्द भी सीखा — नौसिखिया, यानी जिसने अभी-अभी सीखना शुरू किया हो। ध्यानचंद जी भी कभी नौसिखिया ही थे!
डायरी लिखने से लाभ क्या है: लिखने से मन हल्का होता है, भाषा सुधरती है और कुछ महीनों बाद अपनी ही डायरी पढ़कर पता चलता है कि आप कितना बदल चुके हैं। ‘गोल’ जैसे संस्मरण भी तो किसी की सँभालकर रखी गई यादों से ही बनते हैं।
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