प्र1.
नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए— (1) “दोस्त, खेल में इतना गुस्सा अच्छा नहीं। मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है। अगर तुम मुझे हॉकी नहीं मारते तो शायद मैं तुम्हें दो ही गोल से हराता।” मेजर ध्यानचंद की इस बात से उनके बारे में क्या पता चलता है? • वे अत्यंत क्रोधी थे। • वे अच्छे ढंग से बदला लेते थे। • उन्हें हॉकी से मारने पर वे अधिक गोल करते थे। • वे जानते थे कि खेल को सही भावना से खेलना चाहिए।
उत्तर
सही उत्तर है — वे जानते थे कि खेल को सही भावना से खेलना चाहिए। इसी विकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।
| विकल्प | सही / ग़लत | कारण |
|---|---|---|
| वे अत्यंत क्रोधी थे। | ग़लत | बिलकुल उलटी बात है। सिर पर स्टिक लगने के बाद भी वे लौटकर उसी खिलाड़ी की पीठ थपथपाते हैं और उसे ‘दोस्त’ कहकर बुलाते हैं। क्रोधी आदमी ऐसा नहीं करता। |
| वे अच्छे ढंग से बदला लेते थे। | ग़लत | यह बात ऊपर-ऊपर से ठीक लगती है, पर अधूरी है। ध्यानचंद ने ‘बदला’ शब्द मज़ाक में कहा था — उन्होंने बदला लिया ही नहीं, केवल अच्छा खेल दिखाया। प्रश्न पूछता है कि उनके स्वभाव के बारे में क्या पता चलता है, उनके बदला लेने के ढंग के बारे में नहीं। |
| उन्हें हॉकी से मारने पर वे अधिक गोल करते थे। | ग़लत | यह वाक्य का शब्दशः, मज़ाकिया अर्थ पकड़ लेना है। कोई खिलाड़ी चोट खाकर अच्छा नहीं खेलता; ध्यानचंद अपनी लगन और अभ्यास के बल पर गोल करते थे। |
| वे जानते थे कि खेल को सही भावना से खेलना चाहिए। | सही ★ | वे स्वयं कहते हैं — “खेल में इतना गुस्सा अच्छा नहीं।” उन्होंने चोट का उत्तर चोट से नहीं, गोल से दिया, और अंत में उस खिलाड़ी को दोस्त बनाकर छोड़ा। यही खेल भावना है। |
क्यों यही उत्तर सबसे सटीक है: पूरा पाठ एक ही बात दोहराता है — “लगन, साधना और खेल भावना ही सफलता के सबसे बड़े मंत्र हैं।” यह विकल्प उसी मुख्य भाव से जुड़ता है, बाकी तीनों नहीं।