मल्हार अध्याय 1 शब्दों के रूप

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“जगमग छटा निराली, / पग पग छहर रही हैं” — इन पंक्तियों में ‘पग’ शब्द दो बार आया है। इसका अर्थ है ‘हर पग’ या ‘हर कदम’ पर। शब्दों के ऐसे ही कुछ जोड़े नीचे दिए गए हैं। इनके अर्थ लिखिए— घर-घर, बाल-बाल, साँस-साँस, देश-देश, पर्वत-पर्वत
उत्तर

जब कोई शब्द दो बार आता है तो प्रायः उसका अर्थ ‘हर’ या ‘एक-एक’ हो जाता है। ऐसे शब्दों को पुनरुक्त शब्द कहते हैं।

शब्दअर्थवाक्य में प्रयोग
घर-घरहर घर में, एक-एक घर मेंस्वतंत्रता दिवस पर घर-घर तिरंगा लहरा रहा था।
बाल-बालरोम-रोम, शरीर का एक-एक बाल — यानी पूरा शरीर। मुहावरे ‘बाल-बाल बचना’ में इसका अर्थ है बहुत थोड़े अंतर से बच जानामाँ का उपकार याद करके मैं बाल-बाल उनका ऋणी हूँ। / गाड़ी सामने से निकल गई और वह बाल-बाल बच गया।
साँस-साँसहर साँस के साथ, प्रत्येक साँस मेंसाँस-साँस में मुझे अपनी मातृभूमि की याद आती है।
देश-देशहर देश में, एक देश से दूसरे देश तकगौतम बुद्ध का संदेश देश-देश तक फैल गया।
पर्वत-पर्वतहर पर्वत पर, एक पर्वत से दूसरे पर्वत तकबादल पर्वत-पर्वत घूमते हुए मैदानों तक आ पहुँचे।
और उदाहरण: गली-गली, कण-कण, क्षण-क्षण, गाँव-गाँव, बूँद-बूँद, नगर-नगर, डाल-डाल। जैसे — “भारत के कण-कण में इतिहास बसा है।”
प्र2.
“वह युद्ध-भूमि मेरी / वह बुद्ध-भूमि मेरी” — कविता में ‘भूमि’ शब्द में अलग-अलग शब्द जोड़कर नए-नए शब्द बनाए गए हैं। आप भी कुछ नए शब्द बनाइए और उनके अर्थ पता कीजिए— (संकेत— तप, देव, भारत, जन्म, कर्म, कर्तव्य, मरु, मलय, मल्ल, यज्ञ, रंग, रण, सिद्ध आदि)
उत्तर

पुस्तक में ‘भूमि’ सूरज के बीच में लिखा है और उससे छह बादल निकल रहे हैं। हर बादल में एक नया शब्द भरिए। नीचे संकेत में दिए गए सभी शब्दों से बने रूप और उनके अर्थ दिए गए हैं — इनमें से कोई छह चुनकर बादलों में लिखिए।

जोड़ा गया शब्दनया शब्दअर्थ
तपतपोभूमिवह पवित्र स्थान जहाँ ऋषि-मुनियों ने तप किया हो।
देवदेवभूमिदेवताओं की भूमि; उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है।
भारतभारतभूमिभारत देश की धरती।
जन्मजन्मभूमिवह स्थान जहाँ किसी ने जन्म लिया हो।
कर्मकर्मभूमिवह स्थान जहाँ रहकर व्यक्ति अपना काम करता है।
कर्तव्यकर्तव्यभूमिवह क्षेत्र जहाँ अपना कर्तव्य निभाना होता है।
मरुमरुभूमिरेगिस्तान, बालू से भरी सूखी धरती; जैसे राजस्थान का थार।
मलयमलयभूमिदक्षिण भारत का मलय पर्वत वाला चंदन-प्रदेश।
मल्लमल्लभूमिअखाड़ा, कुश्ती लड़ने का मैदान।
यज्ञयज्ञभूमिवह स्थान जहाँ यज्ञ किया जाता है।
रंगरंगभूमिरंगमंच, नाटक खेलने की जगह; अखाड़ा भी।
रणरणभूमियुद्ध का मैदान, समरभूमि।
सिद्धसिद्धभूमिवह पवित्र स्थान जहाँ साधकों को सिद्धि प्राप्त हुई हो।
एक विशेष बात: ‘तप’ के साथ ‘भूमि’ जुड़कर तपभूमि नहीं, तपोभूमि बनता है। संस्कृत में ‘तपस्’ जैसे शब्दों का ‘स्’ जुड़ते समय ‘ओ’ में बदल जाता है — जैसे तपस् + वी = तपस्वी, तपस् + भूमि = तपोभूमि, मनस् + बल = मनोबल।
कविता में आए ‘भूमि’ वाले शब्द: पुण्य-भूमि, स्वर्ण-भूमि, जन्मभूमि, मातृभूमि, धर्मभूमि, कर्मभूमि, युद्ध-भूमि, बुद्ध-भूमि — पूरे आठ।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ