प्र1.
“जग को दया सिखाई, / जग को दिया दिखाया।” — ‘दया’ और ‘दिया’ में केवल एक मात्रा का अंतर है, लेकिन इस एक मात्रा के कारण शब्द का अर्थ पूरी तरह बदल गया है। आप भी अपने समूह में मिलकर ऐसे शब्दों की सूची बनाइए जिनमें केवल एक मात्रा का अंतर हो, जैसे घड़ा-घड़ी।
उत्तर
पहले कविता वाला उदाहरण देखिए — दया (करुणा, दूसरों का दुख समझना) और दिया (मिट्टी का दीपक)। ‘द’ के नीचे लगी छोटी-सी ‘ि’ मात्रा ने पूरा अर्थ बदल दिया।
| शब्द 1 | अर्थ | शब्द 2 | अर्थ |
|---|---|---|---|
| दया | करुणा | दिया | दीपक |
| घड़ा | पानी भरने का बड़ा मिट्टी का बरतन | घड़ी | समय बताने वाला यंत्र |
| दिन | सूरज निकलने से डूबने तक का समय | दीन | ग़रीब, दुखी |
| कल | बीता हुआ या आने वाला दिन; मशीन | काल | समय; मृत्यु |
| मन | हृदय, चित्त | मान | आदर, सम्मान |
| तन | शरीर | तान | गाने का लंबा स्वर |
| धन | रुपया-पैसा, संपत्ति | धान | चावल की फ़सल |
| सुत | पुत्र, बेटा | सूत | धागा |
| मल | मैल, गंदगी | माल | सामान, धन |
| हल | खेत जोतने का औज़ार; समाधान | हाल | दशा, स्थिति |
| मिल | कारखाना; ‘मिलना’ का रूप | मील | दूरी नापने की एक इकाई |
| कली | बिना खिला फूल | काली | काले रंग की |
| रोटी | आटे की बनी हुई चपाती | रोती | ‘रोना’ क्रिया का स्त्रीलिंग रूप |
| सुर | स्वर, संगीत का स्वर | सूर | सूरदास; शूरवीर |
क्यों ऐसा होता है: हिंदी में मात्रा केवल सजावट नहीं है — वह ध्वनि बदलती है, और ध्वनि बदलते ही शब्द ही बदल जाता है। इसीलिए लिखते समय मात्रा की एक छोटी-सी भूल भी वाक्य का अर्थ उलट सकती है, जैसे “वह दीन है” और “वह दिन है”।
स्वयं कीजिए: अपनी लेखन पुस्तिका के एक पन्ने पर दो खाने बनाइए और एक सप्ताह तक ऐसे जोड़े इकट्ठे कीजिए। पाठ पढ़ते समय जो जोड़ा दिखे, तुरंत लिख लीजिए — महीने भर में लंबी सूची बन जाएगी।