मल्हार अध्याय 1 थोड़ा भिन्न, थोड़ा समान

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“जग को दया सिखाई, / जग को दिया दिखाया।” — ‘दया’ और ‘दिया’ में केवल एक मात्रा का अंतर है, लेकिन इस एक मात्रा के कारण शब्द का अर्थ पूरी तरह बदल गया है। आप भी अपने समूह में मिलकर ऐसे शब्दों की सूची बनाइए जिनमें केवल एक मात्रा का अंतर हो, जैसे घड़ा-घड़ी।
उत्तर

पहले कविता वाला उदाहरण देखिए — दया (करुणा, दूसरों का दुख समझना) और दिया (मिट्टी का दीपक)। ‘द’ के नीचे लगी छोटी-सी ‘ि’ मात्रा ने पूरा अर्थ बदल दिया।

शब्द 1अर्थशब्द 2अर्थ
दयाकरुणादियादीपक
घड़ापानी भरने का बड़ा मिट्टी का बरतनघड़ीसमय बताने वाला यंत्र
दिनसूरज निकलने से डूबने तक का समयदीनग़रीब, दुखी
कलबीता हुआ या आने वाला दिन; मशीनकालसमय; मृत्यु
मनहृदय, चित्तमानआदर, सम्मान
तनशरीरतानगाने का लंबा स्वर
धनरुपया-पैसा, संपत्तिधानचावल की फ़सल
सुतपुत्र, बेटासूतधागा
मलमैल, गंदगीमालसामान, धन
हलखेत जोतने का औज़ार; समाधानहालदशा, स्थिति
मिलकारखाना; ‘मिलना’ का रूपमीलदूरी नापने की एक इकाई
कलीबिना खिला फूलकालीकाले रंग की
रोटीआटे की बनी हुई चपातीरोती‘रोना’ क्रिया का स्त्रीलिंग रूप
सुरस्वर, संगीत का स्वरसूरसूरदास; शूरवीर
क्यों ऐसा होता है: हिंदी में मात्रा केवल सजावट नहीं है — वह ध्वनि बदलती है, और ध्वनि बदलते ही शब्द ही बदल जाता है। इसीलिए लिखते समय मात्रा की एक छोटी-सी भूल भी वाक्य का अर्थ उलट सकती है, जैसे “वह दीन है” और “वह दिन है”।
स्वयं कीजिए: अपनी लेखन पुस्तिका के एक पन्ने पर दो खाने बनाइए और एक सप्ताह तक ऐसे जोड़े इकट्ठे कीजिए। पाठ पढ़ते समय जो जोड़ा दिखे, तुरंत लिख लीजिए — महीने भर में लंबी सूची बन जाएगी।
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