मल्हार अध्याय 10 आपकी परीक्षाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
हम सभी अपने जीवन में अनेक प्रकार की परीक्षाएँ लेते और देते हैं। आप अपने अनुभवों के आधार पर कुछ परीक्षाओं के उदाहरण बताइए। यह भी बताइए कि किसने, कब, कैसे और क्यों वह परीक्षा ली। (संकेत— जैसे, किसी को विश्वास दिलाने के लिए उसके सामने साइकिल चलाकर दिखाना, स्कूल या घर पर कोई परीक्षा देना, किसी को किसी काम की चुनौती देना आदि।)
उत्तर

यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। उत्तर लिखते समय हर उदाहरण के साथ चारों बातें बताइए — किसने ली, कब ली, कैसे ली और क्यों ली। यही इस प्रश्न की माँग है।

1. सोचने के लिए — परीक्षाएँ कितने तरह की होती हैं:

परीक्षा का प्रकारकिसने लीकैसे लीक्यों ली
लिखित परीक्षाविद्यालय / शिक्षकप्रश्न-पत्र देकरयह देखने कि पाठ समझ में आया या नहीं
कौशल की परीक्षापिताजी / बड़े भाईसाइकिल चलाकर दिखाने को कहकरभरोसा करने कि अब अकेले चला सकते हो
ज़िम्मेदारी की परीक्षामाँछोटे भाई-बहन को कुछ देर के लिए सौंपकरयह जानने कि घर की ज़िम्मेदारी उठा सकते हो या नहीं
ईमानदारी की परीक्षादुकानदार / कोई अनजानहिसाब में जान-बूझकर या भूल से अधिक पैसे लौटाकरयह देखने कि आप लौटाते हैं या रख लेते हैं
चुनौती वाली परीक्षामित्रदौड़, पहेली या खेल की चुनौती देकरमज़े के लिए और अपनी क्षमता जाँचने के लिए
धैर्य की परीक्षापरिस्थिति स्वयंबीमारी, लंबी क़तार या हार का सामना कराकरकोई नहीं लेता — जीवन ख़ुद ले लेता है

2. नमूना उत्तर:

“मेरी सबसे यादगार परीक्षा वह थी जो मेरे पिताजी ने ली और मुझे उस समय पता ही नहीं चला कि यह परीक्षा है। कब — पिछली गरमियों में, जब मैं उनसे नई साइकिल की ज़िद कर रहा था। कैसे — उन्होंने कहा कि पहले पूरे एक महीने तुम रोज़ सुबह छह बजे उठकर छत के गमलों में पानी डालोगे, बिना याद दिलाए। क्यों — क्योंकि वे देखना चाहते थे कि मैं किसी चीज़ की देखभाल कर सकता हूँ या नहीं। शुरू के चार दिन मुझे बड़ा उत्साह रहा, फिर आलस आने लगा। दो दिन मैं भूल भी गया और पौधे मुरझा गए। तब मुझे समझ आया कि असली बात ज़िद नहीं, नियम है। मैंने बाक़ी दिन बिना नागा पानी दिया। महीने के अंत में पिताजी ने साइकिल तो दी ही, साथ में यह भी कहा — ‘साइकिल की देखभाल भी इन्हीं गमलों की तरह करनी है।’ ‘परीक्षा’ कहानी पढ़ते हुए मुझे यही याद आया — कि कुछ परीक्षाएँ बिना बताए ली जाती हैं और वही सबसे सच्ची होती हैं।

लिखते समय ध्यान रखिए: केवल स्कूल की परीक्षा मत लिखिए। इस प्रश्न का असली उद्देश्य यह समझाना है कि परीक्षा का अर्थ प्रश्न-पत्र नहीं, परख है — और वह घर, खेल के मैदान और दोस्ती में हर दिन होती रहती है।
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