यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। उत्तर लिखते समय हर उदाहरण के साथ चारों बातें बताइए — किसने ली, कब ली, कैसे ली और क्यों ली। यही इस प्रश्न की माँग है।
1. सोचने के लिए — परीक्षाएँ कितने तरह की होती हैं:
| परीक्षा का प्रकार | किसने ली | कैसे ली | क्यों ली |
|---|---|---|---|
| लिखित परीक्षा | विद्यालय / शिक्षक | प्रश्न-पत्र देकर | यह देखने कि पाठ समझ में आया या नहीं |
| कौशल की परीक्षा | पिताजी / बड़े भाई | साइकिल चलाकर दिखाने को कहकर | भरोसा करने कि अब अकेले चला सकते हो |
| ज़िम्मेदारी की परीक्षा | माँ | छोटे भाई-बहन को कुछ देर के लिए सौंपकर | यह जानने कि घर की ज़िम्मेदारी उठा सकते हो या नहीं |
| ईमानदारी की परीक्षा | दुकानदार / कोई अनजान | हिसाब में जान-बूझकर या भूल से अधिक पैसे लौटाकर | यह देखने कि आप लौटाते हैं या रख लेते हैं |
| चुनौती वाली परीक्षा | मित्र | दौड़, पहेली या खेल की चुनौती देकर | मज़े के लिए और अपनी क्षमता जाँचने के लिए |
| धैर्य की परीक्षा | परिस्थिति स्वयं | बीमारी, लंबी क़तार या हार का सामना कराकर | कोई नहीं लेता — जीवन ख़ुद ले लेता है |
2. नमूना उत्तर:
“मेरी सबसे यादगार परीक्षा वह थी जो मेरे पिताजी ने ली और मुझे उस समय पता ही नहीं चला कि यह परीक्षा है। कब — पिछली गरमियों में, जब मैं उनसे नई साइकिल की ज़िद कर रहा था। कैसे — उन्होंने कहा कि पहले पूरे एक महीने तुम रोज़ सुबह छह बजे उठकर छत के गमलों में पानी डालोगे, बिना याद दिलाए। क्यों — क्योंकि वे देखना चाहते थे कि मैं किसी चीज़ की देखभाल कर सकता हूँ या नहीं। शुरू के चार दिन मुझे बड़ा उत्साह रहा, फिर आलस आने लगा। दो दिन मैं भूल भी गया और पौधे मुरझा गए। तब मुझे समझ आया कि असली बात ज़िद नहीं, नियम है। मैंने बाक़ी दिन बिना नागा पानी दिया। महीने के अंत में पिताजी ने साइकिल तो दी ही, साथ में यह भी कहा — ‘साइकिल की देखभाल भी इन्हीं गमलों की तरह करनी है।’ ‘परीक्षा’ कहानी पढ़ते हुए मुझे यही याद आया — कि कुछ परीक्षाएँ बिना बताए ली जाती हैं और वही सबसे सच्ची होती हैं।”