मल्हार अध्याय 10 परीक्षा के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-05

इस अध्याय के बारे में

रचना का नाम ‘परीक्षा’ है और लेखक हैं प्रेमचंद । यह एक कहानी है, कोई कविता या पद नहीं। पाठ के अंत में दिया गया परिचय बताता है कि प्रेमचंद कथा-सम्राट कहलाते हैं, उनका वास्तविक नाम धनपतराय था और उनका जीवनकाल 1880–1936 रहा। कहानी शुरू कैसे होती है — देवगढ़ रियासत के दीवान सरदार सुजानसिंह बूढ़े हो गए। उन्होंने महाराज से नौकरी छोड़ने की विनय की, क्योंकि “अब मेरी अवस्था भी ढल गई, राज-काज सँभालने की शक्ति नहीं रही।” महाराज ने प्रार्थना तो मान ली, पर शर्त लगा दी कि नया दीवान वे स्वयं खोजें । अनोखा विज्ञापन — देश के प्रसिद्ध पत्रों में छपा कि देवगढ़ को एक सुयोग्य दीवान चाहिए; ग्रेजुएट होना ज़रूरी नहीं, पर हृष्ट-पुष्ट होना ज़रूरी है; एक महीने तक उम्मीदवारों के रहन-सहन और आचार-विचार की देखभाल होगी और “विद्या का कम, परंतु कर्तव्य का अधिक विचार किया जायेगा।” इसी विज्ञापन ने “सारे मुल्क में तहलका मचा दिय

  1. मेरी समझ से
  2. शीर्षक
  3. पंक्तियों पर चर्चा
  4. सोच-विचार के लिए
  5. खोजबीन
  6. कहानी की रचना
  7. समस्या और समाधान
  8. मन के भाव
  9. अभिनय
  10. विपरीतार्थक शब्द
  11. कहावत
  12. अनुमान या कल्पना से
  13. विज्ञापन
  14. आगे की कहानी
  15. आपकी बात
  16. नया-पुराना
  17. वाद-विवाद
  18. अच्छाई और दिखावा
  19. परिधान तरह-तरह के
  20. आपकी परीक्षाएँ
  21. आज की पहेली
  22. झरोखे से
  23. खोजबीन के लिए
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