मल्हार अध्याय 9 मैया मैं नहिं माखन खायो के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
रचना का नाम ‘मैया मैं नहिं माखन खायो’ है और रचयिता हैं महाकवि सूरदास । यह कोई कहानी नहीं, एक पद है — गाया जाने वाला छोटा गीत। भाषा ब्रजभाषा है, इसलिए ‘पीछे’ यहाँ ‘पाछे’ और ‘भोली’ यहाँ ‘भोरी’ बन गया है। कवि से परिचय — पुस्तक बताती है कि सूरदास का जन्म 15वीं शताब्दी में हुआ माना जाता है और मृत्यु 16वीं शताब्दी में हुई। उन्होंने अपना अधिकांश जीवन मथुरा, गोवर्धन सहित ब्रज के क्षेत्रों में श्रीकृष्ण के गुणगान में भजन गाते हुए बिताया। उनकी अधिकतर कविताओं में श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का मनोहारी वर्णन है। वे दृष्टिबाधित थे, फिर भी उनकी कल्पना-शक्ति ऐसी थी कि दृश्य आँखों के सामने खड़ा हो जाता है। पद में हो क्या रहा है — ग्वाल-बालों ने यशोदा से शिकायत कर दी कि कान्हा ने माखन चुराकर खाया। कृष्ण सफ़ाई देते हैं — सुबह होते ही तो मुझे गायों के पीछे मधुबन भेज दिया गया, चार पहर मैं बंसीवट पर भटकता रहा और स
अभ्यास
- मेरी समझ से
- मिलकर करें मिलान
- पंक्तियों पर चर्चा
- सोच-विचार के लिए
- कविता की रचना
- अनुमान या कल्पना से
- शब्दों के रूप
- वर्ण-परिवर्तन
- पंक्ति से पंक्ति
- आपकी बात
- घर की वस्तुएँ
- समय का माप
- हम सब विशेष हैं
- आज की पहेली
- खोजबीन के लिए