प्र1.
(क) पद में श्रीकृष्ण ने अपने बारे में क्या-क्या बताया है?
उत्तर
पूरा पद श्रीकृष्ण के अपने मुँह से कहा गया है, इसलिए उसमें उनका पूरा दिन और उनका स्वभाव — दोनों खुलकर सामने आ जाते हैं। उन्होंने अपने बारे में मुख्य रूप से पाँच बातें बताई हैं।
| क्या बताया | पद की पंक्ति |
|---|---|
| 1. मैंने माखन नहीं खाया। | “मैया मैं नहिं माखन खायो।” |
| 2. सुबह होते ही मुझे गायों के पीछे मधुबन भेज दिया गया था। | “भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो।” |
| 3. मैं चार पहर बंसीवट पर घूमता रहा और साँझ ढले घर लौटा। | “चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥” |
| 4. मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं — ऊँचे छींके तक मेरा हाथ पहुँच ही नहीं सकता। | “मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।” |
| 5. ग्वाल-बाल मुझसे बैर रखते हैं; उन्होंने ज़बरदस्ती मेरे मुँह पर माखन लपेट दिया। | “ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो॥” |
इन बातों के साथ वे दो शिकायतें भी करते हैं —
- माँ बहुत भोली है, इसीलिए दूसरों की बातों पर विश्वास कर लेती है — “तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।”
- माँ के मन में ज़रूर कोई भेद है, तभी उसने मुझे पराया समझ लिया — “जिय तेरे कछु भेद उपजि हैं, जानि परायो जायो।”
ध्यान देने की बात: कृष्ण की सफ़ाई में तीन तरह के तर्क हैं — समय का (दिन भर घर ही नहीं था), शरीर का (हाथ छोटे हैं) और गवाह का (जो कह रहे हैं वे मेरे दुश्मन हैं)। असली अदालत में भी बचाव इन्हीं तीन ढंगों से किया जाता है! एक छोटे बालक के मुँह से यह पूरी दलील रखवाकर सूरदास ने कमाल कर दिया है।