मल्हार अध्याय 9 सोच-विचार के लिए

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) पद में श्रीकृष्ण ने अपने बारे में क्या-क्या बताया है?
उत्तर

पूरा पद श्रीकृष्ण के अपने मुँह से कहा गया है, इसलिए उसमें उनका पूरा दिन और उनका स्वभाव — दोनों खुलकर सामने आ जाते हैं। उन्होंने अपने बारे में मुख्य रूप से पाँच बातें बताई हैं।

क्या बतायापद की पंक्ति
1. मैंने माखन नहीं खाया।“मैया मैं नहिं माखन खायो।”
2. सुबह होते ही मुझे गायों के पीछे मधुबन भेज दिया गया था।“भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो।”
3. मैं चार पहर बंसीवट पर घूमता रहा और साँझ ढले घर लौटा।“चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥”
4. मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं — ऊँचे छींके तक मेरा हाथ पहुँच ही नहीं सकता।“मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।”
5. ग्वाल-बाल मुझसे बैर रखते हैं; उन्होंने ज़बरदस्ती मेरे मुँह पर माखन लपेट दिया।“ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो॥”

इन बातों के साथ वे दो शिकायतें भी करते हैं —

  • माँ बहुत भोली है, इसीलिए दूसरों की बातों पर विश्वास कर लेती है — “तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।”
  • माँ के मन में ज़रूर कोई भेद है, तभी उसने मुझे पराया समझ लिया — “जिय तेरे कछु भेद उपजि हैं, जानि परायो जायो।”
ध्यान देने की बात: कृष्ण की सफ़ाई में तीन तरह के तर्क हैं — समय का (दिन भर घर ही नहीं था), शरीर का (हाथ छोटे हैं) और गवाह का (जो कह रहे हैं वे मेरे दुश्मन हैं)। असली अदालत में भी बचाव इन्हीं तीन ढंगों से किया जाता है! एक छोटे बालक के मुँह से यह पूरी दलील रखवाकर सूरदास ने कमाल कर दिया है।
प्र2.
(ख) यशोदा माता ने श्रीकृष्ण को हँसते हुए गले से क्यों लगा लिया?
उत्तर

क्योंकि कृष्ण की सफ़ाई सुनकर यशोदा को गुस्सा नहीं, प्यार और हँसी आ गई। पद कहता है —

“ये ले अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहिं नाच नचायो।
सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो॥

तीन कारण मिलकर यह क्षण बनाते हैं —

  1. बालक की चतुराई पर मोह — इतना छोटा बच्चा और इतनी लंबी, तरतीबवार दलील! माँ उसकी बुद्धि पर रीझ गईं।
  2. रूठना असहनीय लगा — कृष्ण ने लाठी-कंबल लौटाकर कह दिया, “बहुत नाच नचा लिया!” अपने बेटे का यूँ रूठकर सब कुछ छोड़ देना माँ से देखा नहीं गया।
  3. ‘पराया’ शब्द चुभ गया — जब कृष्ण ने कहा, “जानि परायो जायो” (तूने मुझे पराया समझ लिया), तो माँ का हृदय भर आया। इसी बात को झुठलाने के लिए उन्होंने उसे छाती और गले से लगा लिया — जैसे कहना चाहती हों, “तू मेरा ही है।”
‘बिहँसि’ का अर्थ भर जान लेना काफ़ी नहीं: यशोदा हँसीं, इसका मतलब यह भी है कि वे कृष्ण की चोरी जानती थीं — पर उन्हें सिद्ध करना ही नहीं था। जहाँ प्रेम होता है, वहाँ जीत-हार का हिसाब नहीं लगाया जाता। पद यहीं सबसे सुंदर बनता है।
उत्तर लिखने का ढंग: ऐसे ‘क्यों’ वाले प्रश्न में पहले एक वाक्य में सीधा कारण लिखिए, फिर उसे सिद्ध करने वाली पंक्ति उद्धृत कीजिए, और अंत में एक वाक्य में माँ का भाव समझाइए। तीन-चार वाक्य में पूरा उत्तर बन जाता है।
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