मल्हार अध्याय 9 कविता की रचना

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस पाठ की विशेषताओं की सूची बनाइए, जैसे इस पद की अंतिम पंक्ति में कवि ने अपना नाम भी दिया है आदि।
उत्तर

पुस्तक ने आपको पहले ही एक विशेषता — तुक — समझा दी है और एक उदाहरण — कवि का नाम अंतिम पंक्ति में — दे दिया है। इसी तरह पद को दोबारा पढ़कर बाक़ी विशेषताएँ ढूँढ़नी हैं। नीचे पूरी सूची प्रमाण सहित दी गई है।

विशेषतापद से प्रमाण
1. हर पंक्ति के अंत में तुकखायो – पठायो – आयो – पायो – लपटायो – पतियायो – जायो – नचायो – लगायो। पूरे पद में एक ही तुक चलता है, इसलिए इसे गाना बहुत आसान है।
2. अंतिम पंक्ति में कवि का नामसूरदास तब बिहँसि जसोदा…” — इसे भणिता या ‘छाप’ कहते हैं। इससे पता चल जाता है कि पद किसका है।
3. पूरा पद कृष्ण के अपने मुँह से“मैया मैं नहिं माखन खायो” — कवि बीच में नहीं बोलता; केवल अंतिम पंक्ति में आकर दृश्य पूरा करता है। इसे आत्मकथात्मक शैली कहते हैं।
4. ब्रजभाषापाछे (पीछे), भोरी (भोली), कछु (कुछ), लै (ले), नहिं (नहीं), मोहि (मुझे) — यह ब्रज क्षेत्र की मीठी बोली है।
5. संवाद जैसा प्रवाहपद पढ़ते ही ऐसा लगता है जैसे माँ-बेटे की सचमुच बातचीत सुनाई दे रही हो। यह नाटकीयता पद की बड़ी शक्ति है।
6. अनुप्रास (एक ही ध्वनि की आवृत्ति)ोर यो”, “ंसीवट टक्यो”, “ैर परे… रबस”, “्वाल-बाल… गैयन” — इससे पद में लय आ जाती है।
7. वात्सल्य रसपूरे पद का भाव माँ का बेटे के प्रति प्रेम है — अंत में “लै उर कंठ लगायो” पर आकर यह भाव पूरा खिलता है।
8. दो-दो पंक्तियों के जोड़ेपद में हर दो पंक्तियों के बाद पूर्ण विराम (॥) आता है — एक-एक जोड़ा एक-एक तर्क पूरा करता है।
9. बाल-सुलभ चतुराई“मैं बालक बहियन को छोटो” — कृष्ण अपने छोटेपन को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बना लेते हैं।
तुक क्या है, एक बार फिर: जब दो पंक्तियों के अंतिम शब्दों की अंतिम ध्वनि एक जैसी हो, उसे तुक कहते हैं। जैसे — पठायो और आयो, दोनों के अंत में ‘-आयो’। तुक से कविता कानों को अच्छी लगती है और आसानी से याद हो जाती है — इसीलिए लोकगीत, भजन और बच्चों की कविताओं में तुक बहुत मिलता है।
समूह में ऐसे कीजिए: चार-चार के समूह बनाइए। एक साथी केवल तुक वाले शब्द ढूँढ़े, दूसरा ब्रजभाषा के शब्द, तीसरा एक ही अक्षर से शुरू होने वाले जोड़े (अनुप्रास), और चौथा पद में कौन-कौन बोल रहा है — इसकी सूची बनाए। फिर चारों सूचियाँ जोड़कर एक बड़ी सूची तैयार कीजिए।
प्र2.
(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर

यह प्रस्तुति की गतिविधि है। इसका उद्देश्य यह है कि हर समूह को कुछ ऐसी विशेषताएँ मिलें जो दूसरे समूह ने नहीं देखीं — और अंत में पूरी कक्षा के पास एक साझी, पूरी सूची तैयार हो जाए।

अच्छी प्रस्तुति के लिए तीन नियम —

  1. हर विशेषता के साथ पद की पंक्ति पढ़कर सुनाइए, वरना बात साबित नहीं होगी।
  2. जो विशेषता पिछला समूह बता चुका है, उसे दोहराइए मत — कहिए “यह हमारी सूची में भी थी” और आगे बढ़िए।
  3. बोर्ड पर या एक बड़े चार्ट पर सबकी विशेषताएँ एक साथ लिखते जाइए। यही कक्षा की साझी सूची बनेगी।

नमूना उत्तर (प्रस्तुति के दो मिनट):

“नमस्ते! हमारे समूह ने इस पद में छह विशेषताएँ पाईं। पहली — पूरे पद में एक ही तुक चलता है: खायो, पठायो, आयो, पायो, लपटायो। इसीलिए यह पद गाया जा सकता है। दूसरी — अंतिम पंक्ति में कवि ने अपना नाम रखा है, ‘सूरदास तब बिहँसि जसोदा’। तीसरी — पूरा पद कृष्ण ख़ुद बोल रहे हैं, इसलिए वह सफ़ाई जैसा लगता है। चौथी — भाषा ब्रजभाषा है; ‘पीछे’ को ‘पाछे’ और ‘भोली’ को ‘भोरी’ कहा गया है। पाँचवीं — ‘भोर भयो’, ‘बंसीवट भटक्यो’ में एक ही ध्वनि बार-बार आई है, जिससे लय बनती है। छठी — अंत में माँ का गले लगाना पूरे पद को प्रेम से भर देता है। धन्यवाद!”

बोलने का ढंग: पद की पंक्तियाँ पढ़ते समय ज़रा गाकर पढ़िए — सूरदास के पद गाए ही जाते थे। तुक ख़ुद-ब-ख़ुद सुनाई देने लगेगा और आपकी बात प्रमाण के साथ पहुँचेगी।
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