क्योंकि उन पर चोरी का आरोप लगा है और वे उसे झुठलाना चाहते हैं। ग्वाल-बालों ने यशोदा से शिकायत कर दी थी और माँ ने उनकी बात मान भी ली — “तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।” अब बचने का एक ही रास्ता है — तर्क।
पर इसके पीछे तीन और गहरे कारण दिखाई देते हैं —
| कारण | पद में उसका सुराग |
|---|---|
| 1. डाँट से बचना | बच्चा जब पकड़ा जाए तो पहले सफ़ाई देता है। कृष्ण भी दिन भर का हिसाब गिना देते हैं — “भोर भयो… साँझ परे घर आयो।” |
| 2. माँ का विश्वास फिर से जीतना | उन्हें बुरा इस बात का लगा कि माँ ने दूसरों की बात मानी, उनकी नहीं। इसीलिए वे कहते हैं — “जिय तेरे कछु भेद उपजि हैं, जानि परायो जायो।” असली दुख सज़ा का नहीं, अविश्वास का है। |
| 3. साथियों की चाल का जवाब देना | “ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो” — कृष्ण बताना चाहते हैं कि गवाह ही पक्षपाती हैं, इसलिए उनकी गवाही मानी न जाए। |