मल्हार अध्याय 9 अनुमान या कल्पना से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा को तर्क क्यों दे रहे होंगे?
उत्तर

क्योंकि उन पर चोरी का आरोप लगा है और वे उसे झुठलाना चाहते हैं। ग्वाल-बालों ने यशोदा से शिकायत कर दी थी और माँ ने उनकी बात मान भी ली — “तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।” अब बचने का एक ही रास्ता है — तर्क

पर इसके पीछे तीन और गहरे कारण दिखाई देते हैं —

कारणपद में उसका सुराग
1. डाँट से बचनाबच्चा जब पकड़ा जाए तो पहले सफ़ाई देता है। कृष्ण भी दिन भर का हिसाब गिना देते हैं — “भोर भयो… साँझ परे घर आयो।”
2. माँ का विश्वास फिर से जीतनाउन्हें बुरा इस बात का लगा कि माँ ने दूसरों की बात मानी, उनकी नहीं। इसीलिए वे कहते हैं — “जिय तेरे कछु भेद उपजि हैं, जानि परायो जायो।” असली दुख सज़ा का नहीं, अविश्वास का है।
3. साथियों की चाल का जवाब देना“ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो” — कृष्ण बताना चाहते हैं कि गवाह ही पक्षपाती हैं, इसलिए उनकी गवाही मानी न जाए।
यही बात इस पद को सुंदर बनाती है: कृष्ण डरकर रोते नहीं, न झूठ-मूठ माफ़ी माँगते हैं। वे क्रम से दलील रखते हैं — समय, शरीर और गवाह। एक नन्हे बालक की इस समझदारी को देखकर ही माँ का गुस्सा हँसी में बदल जाता है।
चर्चा के लिए: अपने समूह में सोचिए — यदि कृष्ण चुपचाप मान लेते कि “हाँ, मैंने खाया”, तो पद कैसा होता? शायद उतना मज़ेदार नहीं। तर्क ही इस पद की जान है।
प्र2.
(ख) जब माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को गले से लगा लिया, तब क्या हुआ होगा?
उत्तर

यह कल्पना का प्रश्न है — पद यहीं ख़त्म हो जाता है, इसलिए आगे की कहानी आपको जोड़नी है। पर कल्पना पद के भाव से मेल खानी चाहिए: वहाँ प्रेम है, इसलिए आगे भी प्रेम ही होना चाहिए, बदला या सज़ा नहीं।

अच्छे उत्तर में ये बातें आ सकती हैं —

  • कृष्ण का रूठना ख़त्म हुआ; उन्होंने लाठी-कंबल फिर से थाम लिया।
  • यशोदा ने उन्हें आँचल से मुँह पोंछकर कुछ खाने को दिया — शायद वही माखन!
  • ग्वाल-बालों की शिकायत धरी रह गई; माँ ने आगे से पहले बेटे की बात सुनने का मन बना लिया।
  • कृष्ण को यह विश्वास मिल गया कि माँ उन्हें ‘पराया’ नहीं समझती।

नमूना उत्तर:

“यशोदा ने कृष्ण को गोद में उठा लिया और उनके माथे पर हाथ फेरा। कृष्ण की आँखों का पानी उनके आँचल में समा गया। माँ बोलीं — ‘अच्छा-अच्छा, मेरा लाल माखन नहीं खाता। अब चल, मुँह धो ले।’ कृष्ण मुसकरा दिए, पर उनके होंठ के कोने पर लगा माखन माँ ने देख लिया और वे फिर हँस पड़ीं। इस बार कृष्ण भी हँस दिए। फिर माँ ने अपने हाथ से उन्हें कटोरी भर माखन-मिश्री खिलाई और कहा — ‘चोरी मत किया कर, माँग लिया कर।’ बाहर खड़े ग्वाल-बाल यह सब देखकर चुपचाप खिसक गए।”

कल्पना लिखते समय ध्यान रखिए: कहानी को वहीं से आगे बढ़ाइए जहाँ पद छोड़ता है, और पात्रों का स्वभाव मत बदलिए — यशोदा कठोर नहीं हो सकतीं, कृष्ण डरपोक नहीं हो सकते। अच्छी कल्पना वही है जो पढ़ने वाले को लगे, “हाँ, आगे ऐसा ही हुआ होगा।”
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