प्र1.
(क) “भोर भयो गैयन के पाछे” — इस पंक्ति में ‘पाछे’ शब्द आया है। इसके लिए ‘पीछे’ शब्द का उपयोग भी किया जाता है। इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैं जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं। इन्हें आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं, उस प्रकार से लिखिए। — परे, छोटो, बिधि, भोरी, कछु, लै, नहिं
उत्तर
ये सब ब्रजभाषा के रूप हैं। नीचे इनके खड़ी बोली (आज की हिंदी) वाले रूप दिए गए हैं।
| पद का शब्द (ब्रजभाषा) | हम जिस रूप में बोलते-लिखते हैं | पद की पंक्ति | अपना एक वाक्य |
|---|---|---|---|
| परे | पड़े | “साँझ परे घर आयो” / “ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं” | शाम पड़े ही सब बच्चे मैदान से घर लौट आए। |
| छोटो | छोटा | “मैं बालक बहियन को छोटो” | मेरा छोटा भाई अभी अलमारी तक हाथ नहीं पहुँचा पाता। |
| बिधि | विधि (तरीक़ा, ढंग) | “छीको केहि बिधि पायो” | दादी ने मुझे अचार डालने की पूरी विधि बताई। |
| भोरी | भोली | “तू माता मन की अति भोरी” | वह इतनी भोली है कि हर किसी की बात मान लेती है। |
| कछु | कुछ | “जिय तेरे कछु भेद उपजि हैं” | मुझे लगता है इस बात में कुछ गड़बड़ ज़रूर है। |
| लै | ले (लेकर) | “लै उर कंठ लगायो” | माँ ने मुझे गोद में ले लिया। |
| नहिं | नहीं | “मैया मैं नहिं माखन खायो” | मैंने आज तक किसी की चीज़ नहीं छुई। |
ब्रजभाषा और खड़ी बोली में फ़र्क़ कैसे पहचानें: ग़ौर कीजिए, बदलाव ज़्यादातर अंत की मात्रा में है — छोटा → छोटो, भोली → भोरी, नहीं → नहिं। ब्रजभाषा में ‘आ’ की जगह अक्सर ‘ओ’ आ जाता है (छोटा-छोटो, खाया-खायो, आया-आयो) और ‘ई’ की जगह ‘इ’ (नहीं-नहिं)। यही मिठास सूरदास के पदों को गाने लायक़ बनाती है।
और शब्द ढूँढ़िए: पद में ऐसे और भी रूप छिपे हैं — मोहि (मुझे), गैयन (गायों), केहि (किस), जिय (जी/मन), बहियन (बाँहें), तब के साथ बिहँसि (हँसकर)। इन्हें भी अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।