मल्हार अध्याय 9 शब्दों के रूप

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) “भोर भयो गैयन के पाछे” — इस पंक्ति में ‘पाछे’ शब्द आया है। इसके लिए ‘पीछे’ शब्द का उपयोग भी किया जाता है। इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैं जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं। इन्हें आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं, उस प्रकार से लिखिए। — परे, छोटो, बिधि, भोरी, कछु, लै, नहिं
उत्तर

ये सब ब्रजभाषा के रूप हैं। नीचे इनके खड़ी बोली (आज की हिंदी) वाले रूप दिए गए हैं।

पद का शब्द (ब्रजभाषा)हम जिस रूप में बोलते-लिखते हैंपद की पंक्तिअपना एक वाक्य
परेपड़े“साँझ परे घर आयो” / “ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं”शाम पड़े ही सब बच्चे मैदान से घर लौट आए।
छोटोछोटा“मैं बालक बहियन को छोटोमेरा छोटा भाई अभी अलमारी तक हाथ नहीं पहुँचा पाता।
बिधिविधि (तरीक़ा, ढंग)“छीको केहि बिधि पायो”दादी ने मुझे अचार डालने की पूरी विधि बताई।
भोरीभोली“तू माता मन की अति भोरीवह इतनी भोली है कि हर किसी की बात मान लेती है।
कछुकुछ“जिय तेरे कछु भेद उपजि हैं”मुझे लगता है इस बात में कुछ गड़बड़ ज़रूर है।
लैले (लेकर)लै उर कंठ लगायो”माँ ने मुझे गोद में ले लिया।
नहिंनहीं“मैया मैं नहिं माखन खायो”मैंने आज तक किसी की चीज़ नहीं छुई।
ब्रजभाषा और खड़ी बोली में फ़र्क़ कैसे पहचानें: ग़ौर कीजिए, बदलाव ज़्यादातर अंत की मात्रा में है — छोटा → छोटो, भोली → भोरी, नहीं → नहिं। ब्रजभाषा में ‘आ’ की जगह अक्सर ‘ओ’ आ जाता है (छोटा-छोटो, खाया-खायो, आया-आयो) और ‘ई’ की जगह ‘इ’ (नहीं-नहिं)। यही मिठास सूरदास के पदों को गाने लायक़ बनाती है।
और शब्द ढूँढ़िए: पद में ऐसे और भी रूप छिपे हैं — मोहि (मुझे), गैयन (गायों), केहि (किस), जिय (जी/मन), बहियन (बाँहें), तब के साथ बिहँसि (हँसकर)। इन्हें भी अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
प्र2.
(ख) पद में से कुछ शब्द चुनकर नीचे स्तंभ 1 में दिए गए हैं और स्तंभ 2 में उनके अर्थ दिए गए हैं। शब्दों का उनके सही अर्थों से मिलान कीजिए— स्तंभ 1: 1. उपजि, 2. जानि, 3. जायो, 4. जिय, 5. पठायो, 6. पतियायो, 7. बहियन, 8. बिधि, 9. बिहँसि, 10. भटक्यो, 11. लपटायो। स्तंभ 2: 1. मुसकाई, हँसी; 2. उपजना, उत्पन्न होना; 3. जानकर, समझकर; 4. विश्वास किया, सच माना; 5. बाँह, हाथ, भुजा; 6. प्रकार, भाँति, रीति; 7. मन, जी; 8. जन्मा; 9. मला, लगाया, पोता; 10. इधर-उधर घूमा या भटका; 11. भेज दिया।
उत्तर

सही मिलान इस प्रकार है —

स्तंभ 1मिलेगास्तंभ 2पद की पंक्ति
1. उपजि→ 2उपजना, उत्पन्न होना“जिय तेरे कछु भेद उपजि हैं”
2. जानि→ 3जानकर, समझकरजानि परायो जायो”
3. जायो→ 8जन्मा“जानि परायो जायो” — यानी किसी और का जन्मा हुआ
4. जिय→ 7मन, जीजिय तेरे कछु भेद उपजि हैं”
5. पठायो→ 11भेज दिया“मधुबन मोहि पठायो
6. पतियायो→ 4विश्वास किया, सच माना“इनके कहे पतियायो
7. बहियन→ 5बाँह, हाथ, भुजा“मैं बालक बहियन को छोटो”
8. बिधि→ 6प्रकार, भाँति, रीति“छीको केहि बिधि पायो”
9. बिहँसि→ 1मुसकाई, हँसी“सूरदास तब बिहँसि जसोदा”
10. भटक्यो→ 10इधर-उधर घूमा या भटका“चार पहर बंसीवट भटक्यो
11. लपटायो→ 9मला, लगाया, पोता“बरबस मुख लपटायो
‘जानि’ और ‘जायो’ में गड़बड़ मत कीजिए: दोनों ‘ज’ से शुरू होते हैं, पर ‘जानि’ का रिश्ता ‘जानना’ से है और ‘जायो’ का रिश्ता ‘जन्म’ से (जाया = जन्मा हुआ; इसी से ‘जननी’, ‘जन्म’ बने हैं)। पंक्ति पूरी पढ़िए — “जानि परायो जायो” = “मुझे पराया जन्मा हुआ समझकर”। दोनों शब्द एक ही पंक्ति में हैं और दोनों के अर्थ बिलकुल अलग।
याद रखने की तरकीब: अधिकतर ब्रज शब्द किसी न किसी आज के शब्द से जुड़े हैं — उपजि से ‘उपज’ (फ़सल), पतियायो से ‘प्रतीति’, बहियन से ‘बाँह’, बिहँसि से ‘हँसी’, लपटायो से ‘लिपटना’। जोड़ी बना लीजिए, अर्थ ख़ुद याद हो जाएगा।
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