मल्हार अध्याय 9 वर्ण-परिवर्तन

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“तू माता मन की अति भोरी” — ‘भोरी’ का अर्थ है ‘भोली’। यहाँ ‘ल’ और ‘र’ वर्ण परस्पर बदल गए हैं। आपने ध्यान दिया होगा कि इस पद में कुछ और शब्दों में भी ‘ल’ या ‘ड़’ और ‘र’ में वर्ण-परिवर्तन हुआ है। ऐसे शब्द चुनकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर

पद में ऐसे तीन शब्द साफ़ दिखाई देते हैं। हर बार ‘र’ ने किसी दूसरे वर्ण की जगह ले ली है।

पद का शब्दआज का रूपकौन-सा वर्ण बदलापद की पंक्ति
भोरीभोलील → र“तू माता मन की अति भोरी
परेपड़ेड़ → र“साँझ परे घर आयो” तथा “ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं”
कमरियाकमली (छोटा कंबल)ल → र“ये ले अपनी लकुटि कमरिया
ऐसा होता क्यों है: ‘ल’, ‘र’ और ‘ड़’ — तीनों का उच्चारण जीभ के लगभग एक ही हिस्से से होता है (जीभ ऊपर तालु को छूती है)। इसीलिए बोलचाल में ये आपस में फिसलकर बदल जाते हैं। भाषाविज्ञान में इसी को वर्ण-परिवर्तन कहते हैं। यह ग़लती नहीं, बोली की अपनी चाल है।
आज की भाषा में भी यही होता है: बहुत से लोग ‘कल’ को ‘कर’, ‘पहले’ को ‘पहरे’, ‘लालटेन’ को ‘लालटेर’ बोलते सुने जाते हैं; इसी तरह ‘बड़ा’ कहीं ‘बरा’ और ‘पढ़ना’ कहीं ‘परना’ बन जाता है। Try This: अपने आस-पास ध्यान से सुनिए और ऐसे पाँच शब्द इकट्ठे कीजिए जिनमें ल, र या ड़ बदल जाता हो — फिर कक्षा में सुनाइए।
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