मल्हार अध्याय 9 पंक्ति से पंक्ति

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
नीचे स्तंभ 1 में कुछ पंक्तियाँ दी गयी हैं और स्तंभ 2 में उनके भावार्थ दिए गए हैं। रेखा खींचकर सही मिलान कीजिए। — स्तंभ 1: 1. भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो। 2. चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो। 3. मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो। 4. ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो। 5. तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो। 6. जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो। — स्तंभ 2: 1. मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छीके तक कैसे पहुँच सकता हूँ? 2. तेरे हृदय में अवश्य कोई भेद है, जो मुझे पराया समझ लिया। 3. माँ तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी बातों में आ गई हो। 4. सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया। 5. चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया। 6. ये सब सखा मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने मक्खन हठपूर्वक मेरे मुख पर लिपटा दिया।
उत्तर

सही मिलान नीचे दिया गया है। ध्यान दीजिए — स्तंभ 2 का क्रम जान-बूझकर उलटा-पुलटा है, इसलिए संख्या से संख्या मत मिलाइए।

स्तंभ 1 — पद की पंक्तिमिलेगास्तंभ 2 — भावार्थमिलान का सूत्र
1. भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो।→ 4सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया।‘भोर’ = सुबह, ‘पठायो’ = भेज दिया।
2. चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो।→ 5चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया।‘चार पहर’ और ‘साँझ’ — दोनों शब्द भावार्थ में ज्यों के त्यों हैं।
3. मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।→ 1मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छीके तक कैसे पहुँच सकता हूँ?‘बहियन’ = बाँहें, ‘केहि बिधि’ = किस तरह।
4. ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो।→ 6ये सब सखा मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने मक्खन हठपूर्वक मेरे मुख पर लिपटा दिया।‘बरबस’ = हठपूर्वक, ‘लपटायो’ = लिपटा दिया।
5. तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।→ 3माँ तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी बातों में आ गई हो।‘भोरी’ = भोली, ‘पतियायो’ = विश्वास कर लिया।
6. जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो।→ 2तेरे हृदय में अवश्य कोई भेद है, जो मुझे पराया समझ लिया।‘जिय’ = हृदय/मन, ‘परायो जायो’ = पराया जन्मा हुआ।
मिलान का सबसे आसान तरीक़ा: हर पंक्ति में से एक ऐसा शब्द चुन लीजिए जो सबसे अलग हो — जैसे पंक्ति 2 में ‘साँझ’, पंक्ति 4 में ‘बरबस’, पंक्ति 6 में ‘पराया’। फिर स्तंभ 2 में उसी शब्द को ढूँढ़िए। भावार्थ लिखने वाले प्रायः मूल का एक शब्द ज्यों का त्यों रख देते हैं — वही आपका सुराग़ है।
सही क्रम एक नज़र में: 1→4, 2→5, 3→1, 4→6, 5→3, 6→2। ध्यान दीजिए, कोई भी जोड़ा सीधे क्रम से नहीं मिलता — इसीलिए यह गतिविधि आपको पंक्तियाँ सचमुच पढ़ने पर मजबूर करती है।
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