यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है, इसलिए उत्तर हर विद्यार्थी का अलग होगा। पर प्रश्न ने चार बातें साफ़-साफ़ पूछी हैं, और अच्छा उत्तर वही है जिसमें चारों का जवाब हो।
| प्रश्न पूछता है | आपके उत्तर में क्या होना चाहिए |
|---|---|
| क्या ऐसा हुआ है? | एक सच्ची, छोटी घटना — कोई ऐसा काम जिसका इल्ज़ाम आप पर लगा और वह आपने किया नहीं था। |
| कब? | समय — “पिछले महीने”, “जब मैं चौथी कक्षा में था”, “रक्षाबंधन वाले दिन”। |
| किसके सामने? | वह व्यक्ति — माँ, पिता, शिक्षक, बड़ी बहन, दुकानदार। |
| कौन-कौन से तर्क दिए? | यह सबसे ज़रूरी हिस्सा है — कम-से-कम दो तर्क, ठीक वैसे ही जैसे कृष्ण ने दिए थे। |
कृष्ण से तर्क देना सीखिए — उन्होंने तीन तरह की बातें कहीं, और यही तीन तरीक़े आप भी काम में ला सकते हैं:
- समय का तर्क — “उस समय मैं वहाँ था ही नहीं।” (“भोर भयो… साँझ परे घर आयो।”)
- संभावना का तर्क — “मेरे लिए यह करना संभव ही नहीं था।” (“मैं बालक बहियन को छोटो।”)
- गवाह का तर्क — “जो कह रहे हैं, उनकी बात पर भरोसा क्यों?” (“ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं।”)
नमूना उत्तर:
“हाँ, पिछले वर्ष मेरे साथ ऐसा ही हुआ था। हमारी कक्षा की खिड़की का काँच टूट गया और सबने कहा कि गेंद मैंने ही मारी थी। मुझे यह बात अपनी कक्षा-शिक्षिका के सामने सिद्ध करनी पड़ी कि काँच मैंने नहीं तोड़ा।
मैंने तीन तर्क दिए। पहला — उस समय मैं मैदान में था ही नहीं; मैं पुस्तकालय में किताब जमा करा रहा था और वहाँ का रजिस्टर देखा जा सकता था। दूसरा — मेरा बल्ला और गेंद उस दिन घर पर थे, क्योंकि माँ ने उन्हें बस्ते से निकाल दिया था। तीसरा — जिन दो साथियों ने मेरा नाम लिया, वे उसी दिन मुझसे झगड़ पड़े थे, इसलिए उनकी बात अकेले प्रमाण नहीं मानी जा सकती।
शिक्षिका ने पुस्तकालय जाकर रजिस्टर देखा और मेरी बात मान ली। मुझे उस दिन सबसे अच्छा यह लगा कि मैं चिल्लाया नहीं, रोया नहीं — बस शांति से सबूत रखता गया।”