मल्हार अध्याय 9 घर की वस्तुएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।” — ‘छीका’ घर की एक ऐसी वस्तु है जिसे सैकड़ों-वर्ष से भारत में उपयोग में लाया जा रहा है। नीचे कुछ और घरेलू वस्तुओं के चित्र दिए गए हैं। इन्हें आपके घर में क्या कहते हैं? चित्रों के नीचे लिखिए। यदि किसी चित्र को पहचानने में कठिनाई हो तो आप अपने शिक्षक, परिजनों या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।
उत्तर

पुस्तक में कुल पंद्रह चित्र दिए गए हैं — आठ पृष्ठ 101 पर और सात पृष्ठ 102 के ऊपरी हिस्से में। नीचे हर चित्र का सबसे प्रचलित नाम, उसके क्षेत्रीय नाम और उसका काम दिया गया है।

पृष्ठ 101 के चित्र —

क्रमचित्र में क्या हैसामान्य नामऔर किन नामों से पुकारा जाता हैकिस काम आता है
1चौड़े मुँह वाला पीतल का घड़ामटका / घड़ाहंडा, बटलोई, गगरी, गागर, कलशपानी भरकर ठंडा रखने के लिए
2लोहे की भारी, कोयले वाली इस्तरीइस्तरीप्रेस, कोयले की इस्तरी, इस्त्रीकपड़ों की सिलवटें दूर करने के लिए
3लकड़ी की नीची चौकोर मेज़चौकीपीढ़ा, पाटा, बाजोट, पटराबैठने या पूजा का सामान रखने के लिए
4हाथ से चलाने वाली मशीनसिलाई मशीनमशीन, सिलाई का चरखाकपड़े सिलने के लिए
5बुनी हुई निवाड़ वाली लकड़ी की चारपाईचारपाईखाट, खटिया, माँजा, मचियासोने-बैठने के लिए
6ढक्कन वाला मिट्टी का बड़ा बर्तनमर्तबानबरनी, अचारदानी, कुप्पाअचार, मुरब्बा या अनाज रखने के लिए
7बाँस की बुनी हुई चौड़ी थालीसूपछाज, छाजला, सूपा, डलियाअनाज फटककर भूसा-कंकड़ अलग करने के लिए
8चौकोर पत्थर और उस पर गोल बट्टासिल-बट्टासिलौटी, लोढ़ा-बट्टा, खरलमसाला और चटनी पीसने के लिए

पृष्ठ 102 के ऊपर दिए चित्र —

क्रमचित्र में क्या हैसामान्य नामऔर किन नामों से पुकारा जाता हैकिस काम आता है
9दो गोल पाटों वाला पत्थर, ऊपर लकड़ी की मूठचक्कीजाँता, घरट, हाथ-चक्कीगेहूँ या दाल पीसकर आटा बनाने के लिए
10रंगीन कपड़े का हाथ का पंखापंखाबीजना, बेना, हाथपंखा, विंझनाहाथ से हवा करने के लिए
11लकड़ी का लंबा डंडा, नीचे पंखुड़ियों जैसा सिरामथानीरई, मथनी, बिलोनी, मंथादही मथकर मक्खन निकालने के लिए
12छेदों वाली गोल धातु की थालीछलनीचलनी, छन्नी, चालनीआटा या मसाला छानने के लिए
13ढक्कन वाली रंगीन गोल डिबिया, भीतर पान का पत्तापानदानपिटारी, डिबिया, चंगेरीपान, सुपारी और मसाले रखने के लिए
14लकड़ी का गहरा कटोरा और मोटा डंडाओखली-मूसलऊखल, खल-मूसल, उलूखल, हामदस्ताधान कूटने या मसाला कूटने के लिए
15लकड़ी के खंभे से बँधी रस्सी और मिट्टी की मटकीबिलौना (मथानी लगी मटकी)रई-मथानी, नेती, दहीदानरस्सी घुमाकर मटकी में जमा दही मथने के लिए
‘आपके घर में क्या कहते हैं’ — यही असली प्रश्न है: इन वस्तुओं के नाम हर प्रदेश में बदल जाते हैं। जो राजस्थान में ‘बाजोट’ है, वह बिहार में ‘पीढ़ा’ और महाराष्ट्र में ‘पाट’ है। इसलिए ऊपर की तालिका देखकर अपना उत्तर मत लिखिए — घर जाकर दादी, नानी या माँ से पूछिए कि वे इसे क्या कहती हैं, और वही नाम चित्र के नीचे लिखिए। जो नाम आपके घर में चलता है, वही आपके लिए सही उत्तर है।
Try This: कक्षा में एक बड़ा चार्ट बनाइए — बाईं ओर वस्तु का चित्र, और उसके आगे उतने ख़ाने जितने प्रदेश आपकी कक्षा में हैं। हर विद्यार्थी अपने घर का नाम भरे। आपको दिखेगा कि एक ही चीज़ के दस-दस नाम निकल आते हैं — यही भारत की भाषाई सुंदरता है।
प्र2.
आप जानते ही हैं कि श्रीकृष्ण को मक्खन बहुत पसंद था। दूध से दही, मक्खन बनाया जाता है और मक्खन से घी बनाया जाता है। नीचे दूध से घी बनाने की प्रक्रिया संबंधी कुछ चित्र दिए गए हैं। अपने परिवार के सदस्यों, शिक्षकों या इंटरनेट आदि की सहायता से दूध से घी बनाने की प्रक्रिया लिखिए।
उत्तर

पृष्ठ 102 पर तीरों से जुड़े नौ चित्र दिए गए हैं। तीरों का क्रम पहचान लीजिए — पहली पंक्ति बाएँ से दाएँ, दूसरी पंक्ति दाएँ से बाएँ, तीसरी फिर बाएँ से दाएँ। इसी क्रम में पूरी प्रक्रिया नीचे लिखी है।

चरणचित्र में क्या दिख रहा हैक्या हो रहा है
1खेत में चरती हुई गायेंगाय हरा चारा खाती है — दूध की शुरुआत यहीं से होती है।
2एक व्यक्ति गाय का दूध दुह रहा हैगाय से ताज़ा दूध निकाला जाता है।
3चूल्हे पर चढ़ी दूध की हाँडीदूध को उबाला जाता है, ताकि वह ख़राब न हो और सुरक्षित रहे।
4बर्तन में रखा गुनगुना दूधदूध को गुनगुना होने तक ठंडा किया जाता है और उसमें थोड़ा-सा पुराना दही (जामन) मिलाकर रातभर ढककर रख दिया जाता है — दूध दही में जम जाता है।
5स्त्री रस्सी वाली मथानी से मटकी मथ रही हैजमे हुए दही में थोड़ा पानी डालकर मथा जाता है। ऊपर मक्खन तैरकर आ जाता है।
6बचा हुआ पतला तरल भरा मटकामक्खन निकाल लेने के बाद जो पतला तरल बचता है, वह छाछ (मट्ठा) है — उसे पीने के काम में लाया जाता है।
7मक्खन एक बर्तन में डाला जा रहा हैइकट्ठा किया हुआ मक्खन कड़ाही या भगोने में डाला जाता है।
8चूल्हे पर चढ़ी मक्खन की हाँडीमक्खन को धीमी आँच पर गरम किया जाता है। उसका पानी भाप बनकर उड़ जाता है और नीचे भूरे कण (खुरचन) बैठ जाते हैं।
9काँच की बरनी में भरा सुनहरा घीऊपर का साफ़, सुनहरा तरल छानकर बरनी में भर लिया जाता है — यही घी है।

अपने शब्दों में लिखिए (नमूना उत्तर):

“सबसे पहले गाय या भैंस का ताज़ा दूध दुहा जाता है। इस दूध को चूल्हे पर उबाला जाता है और फिर गुनगुना होने तक ठंडा किया जाता है। अब इसमें थोड़ा-सा पहले का दही, जिसे जामन कहते हैं, मिलाकर बर्तन ढककर रात भर रख देते हैं। सुबह तक दूध जमकर दही बन जाता है। इस दही को मटकी में डालकर मथानी से मथा जाता है। मथते-मथते ऊपर मक्खन तैरने लगता है, जिसे हाथ से इकट्ठा कर लिया जाता है; नीचे जो पतला तरल बचता है वह छाछ कहलाती है। इकट्ठे किए मक्खन को कड़ाही में डालकर धीमी आँच पर गरम करते हैं। उसका सारा पानी भाप बनकर उड़ जाता है और नीचे भूरे कण बैठ जाते हैं। ऊपर बचा हुआ साफ़ सुनहरा तरल छानकर बरनी में भर लिया जाता है — यही घी है।”

Did you know? इस पूरी प्रक्रिया में कुछ भी बेकार नहीं जाता — दूध से दही, दही से मक्खन, मक्खन से घी, और बीच में निकली छाछ गरमी में सबसे अच्छा पेय है। घी बनाने के बाद तली में बची भूरी खुरचन भी गुड़ के साथ खाई जाती है। यही भारतीय रसोई की समझदारी है।
Check it yourself: घर पर एक छोटी कटोरी दही लीजिए, उसमें दो चम्मच ठंडा पानी डालिए और चम्मच से पाँच मिनट तेज़ी से फेंटिए। ऊपर मक्खन के छोटे-छोटे दाने तैरते दिखेंगे। बड़ों की मदद से ही आग वाला हिस्सा कीजिए।
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