प्र1.
(क) ‘पहर’ और ‘साँझ’ शब्दों का प्रयोग समय बताने के लिए किया जाता है। समय बताने के लिए और कौन-कौन से शब्दों का प्रयोग किया जाता है? अपने समूह में मिलकर सूची बनाइए और कक्षा में साझा कीजिए। (संकेत— कल, ऋतु, वर्ष, अब, पखवाड़ा, दशक, वेला, अवधि आदि)
उत्तर
पुस्तक ने आठ शब्द संकेत में दे दिए हैं। उन्हीं से शुरू करके सूची को बड़ा कीजिए। सुविधा के लिए शब्दों को पाँच वर्गों में बाँट लेना सबसे अच्छा तरीक़ा है।
| वर्ग | शब्द | उदाहरण वाक्य |
|---|---|---|
| 1. दिन के हिस्से | भोर, प्रातः, सवेरा, सुबह, दोपहर, तीसरा पहर, साँझ, संध्या, शाम, गोधूलि, रात, मध्यरात्रि, निशा, अलस्सुबह, ब्रह्ममुहूर्त | गोधूलि की बेला में गायें घर लौटती हैं। |
| 2. नापने की इकाइयाँ | क्षण, पल, घड़ी, मिनट, घंटा, पहर, प्रहर, दिन, सप्ताह, पखवाड़ा, मास/महीना, ऋतु, वर्ष, युग, दशक, शताब्दी, सहस्राब्दी | एक पखवाड़े में पंद्रह दिन होते हैं। |
| 3. आगे-पीछे बताने वाले | अब, आज, कल, परसों, नरसों, बीता, आगामी, भूत, वर्तमान, भविष्य, पहले, बाद में, तत्काल, तुरंत | परसों हमारी वार्षिक परीक्षा शुरू होगी। |
| 4. लंबाई या दौर बताने वाले | अवधि, काल, समय, दौर, ज़माना, कालखंड, अरसा, मुद्दत, सदियों | इस काम की अवधि केवल दस दिन है। |
| 5. विशेष अवसर या क्षण | वेला, मुहूर्त, तिथि, बेला, घड़ी (शुभ घड़ी), ऋतु के नाम — बसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर | शुभ मुहूर्त में ही गृह-प्रवेश किया गया। |
‘पहर’ जैसी देसी इकाइयाँ आज भी कैसे बची हैं: घड़ी आने से पहले भारत में समय सूरज की जगह देखकर बताया जाता था — भोर, दोपहर, तीसरा पहर, साँझ। इसीलिए ये शब्द आज भी मुहावरों में चलते हैं — ‘दोपहर’, ‘आठों पहर’, ‘पहर भर’। ध्यान दीजिए, हम आज भी 12 बजे को दो-पहर ही कहते हैं, यानी पुरानी इकाई हमारी भाषा में जीवित है।
समूह-कार्य का तरीक़ा: हर साथी को एक वर्ग दे दीजिए और तीन मिनट का समय। फिर सारी सूचियाँ बोर्ड पर जोड़िए। एक शर्त रखिए — हर शब्द के साथ एक वाक्य भी बोलना होगा। इससे शब्द केवल याद नहीं होंगे, उनका प्रयोग भी आ जाएगा।