मल्हार अध्याय 9 समय का माप

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) ‘पहर’ और ‘साँझ’ शब्दों का प्रयोग समय बताने के लिए किया जाता है। समय बताने के लिए और कौन-कौन से शब्दों का प्रयोग किया जाता है? अपने समूह में मिलकर सूची बनाइए और कक्षा में साझा कीजिए। (संकेत— कल, ऋतु, वर्ष, अब, पखवाड़ा, दशक, वेला, अवधि आदि)
उत्तर

पुस्तक ने आठ शब्द संकेत में दे दिए हैं। उन्हीं से शुरू करके सूची को बड़ा कीजिए। सुविधा के लिए शब्दों को पाँच वर्गों में बाँट लेना सबसे अच्छा तरीक़ा है।

वर्गशब्दउदाहरण वाक्य
1. दिन के हिस्सेभोर, प्रातः, सवेरा, सुबह, दोपहर, तीसरा पहर, साँझ, संध्या, शाम, गोधूलि, रात, मध्यरात्रि, निशा, अलस्सुबह, ब्रह्ममुहूर्तगोधूलि की बेला में गायें घर लौटती हैं।
2. नापने की इकाइयाँक्षण, पल, घड़ी, मिनट, घंटा, पहर, प्रहर, दिन, सप्ताह, पखवाड़ा, मास/महीना, ऋतु, वर्ष, युग, दशक, शताब्दी, सहस्राब्दीएक पखवाड़े में पंद्रह दिन होते हैं।
3. आगे-पीछे बताने वालेअब, आज, कल, परसों, नरसों, बीता, आगामी, भूत, वर्तमान, भविष्य, पहले, बाद में, तत्काल, तुरंतपरसों हमारी वार्षिक परीक्षा शुरू होगी।
4. लंबाई या दौर बताने वालेअवधि, काल, समय, दौर, ज़माना, कालखंड, अरसा, मुद्दत, सदियोंइस काम की अवधि केवल दस दिन है।
5. विशेष अवसर या क्षणवेला, मुहूर्त, तिथि, बेला, घड़ी (शुभ घड़ी), ऋतु के नाम — बसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिरशुभ मुहूर्त में ही गृह-प्रवेश किया गया।
‘पहर’ जैसी देसी इकाइयाँ आज भी कैसे बची हैं: घड़ी आने से पहले भारत में समय सूरज की जगह देखकर बताया जाता था — भोर, दोपहर, तीसरा पहर, साँझ। इसीलिए ये शब्द आज भी मुहावरों में चलते हैं — ‘दोपहर’, ‘आठों पहर’, ‘पहर भर’। ध्यान दीजिए, हम आज भी 12 बजे को दो-पहर ही कहते हैं, यानी पुरानी इकाई हमारी भाषा में जीवित है।
समूह-कार्य का तरीक़ा: हर साथी को एक वर्ग दे दीजिए और तीन मिनट का समय। फिर सारी सूचियाँ बोर्ड पर जोड़िए। एक शर्त रखिए — हर शब्द के साथ एक वाक्य भी बोलना होगा। इससे शब्द केवल याद नहीं होंगे, उनका प्रयोग भी आ जाएगा।
प्र2.
(ख) श्रीकृष्ण के अनुसार वे कितने घंटे गाय चराते थे?
उत्तर

बारह घंटे।

पद की पंक्ति है — “चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥” और पुस्तक ने पृष्ठ 97 पर ‘पहर’ का अर्थ भी दे दिया है — तीन घंटे का एक पहर

1 पहर = 3 घंटे
4 पहर = 4 × 3 घंटे
= 12 घंटे
जाँच कीजिए: पुस्तक यह भी बताती है कि एक दिवस में आठ पहर होते हैं। तो पूरा दिन-रात = 8 × 3 = 24 घंटे — बिलकुल सही! इससे पक्का हो जाता है कि एक पहर सचमुच तीन घंटे का ही होता है।
Tip: ‘आठों पहर’ मुहावरे का अर्थ है ‘चौबीसों घंटे, हर समय’ — जैसे “वह आठों पहर पढ़ाई में लगा रहता है।” अब आपको पता है कि यह मुहावरा बना कैसे।
प्र3.
(ग) मान लीजिए वे शाम को छह बजे गाय चराकर लौटे। वे सुबह कितने बजे गाय चराने के लिए घर से निकले होंगे?
उत्तर

सुबह छह बजे।

घर लौटने का समय = शाम 6 बजे
गाय चराने में लगा समय = 4 पहर = 12 घंटे
निकलने का समय = शाम 6 बजे − 12 घंटे
= सुबह 6 बजे

घंटा-घंटा गिनकर देखिए — सुबह 6 से दोपहर 12 तक 6 घंटे, और दोपहर 12 से शाम 6 तक 6 घंटे। कुल 6 + 6 = 12 घंटे। हिसाब ठीक बैठ गया।

पहरसमयपद में क्या
पहला पहरसुबह 6 – 9“भोर भयो गैयन के पाछे” — निकलना
दूसरा पहरसुबह 9 – दोपहर 12मधुबन में गायें चराना
तीसरा पहरदोपहर 12 – 3“बंसीवट भटक्यो”
चौथा पहरदोपहर 3 – शाम 6“साँझ परे घर आयो” — लौटना
यह उत्तर पद से भी मेल खाता है: कृष्ण कहते हैं कि वे भोर (सुबह) निकले और साँझ (शाम) लौटे। सुबह 6 बजे भोर होती है और शाम 6 बजे साँझ — यानी गणित और पद, दोनों एक ही बात कह रहे हैं।
प्र4.
(घ) ‘दोपहर’ का अर्थ है ‘दो पहर’ का समय। जब दूसरे पहर की समाप्ति होती है और तीसरे पहर का प्रारंभ होता है। यह लगभग 12 बजे का समय होता है, जब सूर्य सिर पर आ जाता है। बताइए दिन के पहले पहर का प्रारंभ लगभग कितने बजे होगा?
उत्तर

लगभग सुबह 6 बजे।

पुस्तक ने ख़ुद बता दिया है कि दो पहर पूरे होने पर 12 बजते हैं। तो उलटी गिनती कीजिए —

दो पहर = 2 × 3 घंटे = 6 घंटे
पहले पहर का प्रारंभ = 12 बजे − 6 घंटे
= सुबह 6 बजे
पहरसमयपहचान
पहला पहरसुबह 6 – 9सूरज निकलता है, दिन शुरू
दूसरा पहरसुबह 9 – दोपहर 12इसके ख़त्म होते ही दो-पहर यानी ‘दोपहर’
तीसरा पहरदोपहर 12 – 3सूरज सिर से ढलने लगता है
चौथा पहरदोपहर 3 – शाम 6इसके ख़त्म होते ही साँझ
‘दोपहर’ शब्द बना कैसे: दो + पहर = दोपहर। यानी दिन के दो पहर बीत जाने का समय। इसी तरह से बने कुछ और शब्द देखिए — तीसरा पहर (दोपहर बाद का समय) और आठों पहर (पूरे चौबीस घंटे)। शब्द का अर्थ जान लेने पर उसे कभी भूलेंगे नहीं।
ध्यान दीजिए: यहाँ ‘लगभग’ शब्द ज़रूरी है। सूरज हर दिन ठीक 6 बजे नहीं निकलता — गरमी में जल्दी और जाड़े में देर से। इसीलिए पुराने समय में पहर सूरज के हिसाब से थोड़े छोटे-बड़े हो जाते थे।
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