प्र1.
(क) “भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो”
उत्तर
शब्दार्थ — भोर = सुबह; भयो = हुई; गैयन के पाछे = गायों के पीछे-पीछे; मोहि = मुझे; पठायो = भेज दिया।
भावार्थ — कृष्ण माँ से कहते हैं — “सुबह होते ही तो तुमने मुझे गायों के पीछे मधुबन भेज दिया था। मैं दिन भर घर पर था ही नहीं, फिर माखन खाने का अवसर मुझे मिला कहाँ?”
| पंक्ति का अंश | क्या बता रहा है | कृष्ण के बचाव में इसका काम |
|---|---|---|
| भोर भयो | समय — दिन की शुरुआत | यह सिद्ध करता है कि वे बहुत सवेरे ही घर से निकल गए थे। |
| गैयन के पाछे | काम — गायें चराना | दिन भर उनके पास अपना कोई काम ही नहीं था; वे गायों के पीछे चलते रहे। |
| मधुबन मोहि पठायो | जगह — घर से दूर एक वन | माखन घर के छींके में था और कृष्ण वन में थे — दूरी ही उनका सबसे बड़ा सबूत है। |
‘पठायो’ शब्द इतना ज़रूरी क्यों है: कृष्ण ने यह नहीं कहा कि “मैं गया था”, कहा — “मुझे भेजा गया था”। इस एक शब्द से वे अपने जाने की ज़िम्मेदारी भी माँ पर डाल देते हैं — “तुमने ही तो भेजा था!” यही बाल-सुलभ चतुराई पूरे पद की जान है।
अपने शब्दों में कैसे लिखें: ऐसी पंक्ति का अर्थ लिखते समय तीन बातें ज़रूर लिखिए — कब (सुबह), क्या (गाय चराना) और कहाँ (मधुबन)। फिर एक वाक्य जोड़िए कि पंक्ति यह बात क्यों कह रही है।