मल्हार अध्याय 9 मिलकर करें मिलान

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पाठ में से चुनकर यहाँ कुछ शब्द दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए। — शब्द: 1. जसोदा, 2. पहर, 3. लकुटि कमरिया, 4. बंसीवट, 5. मधुबन, 6. छीको, 7. माता, 8. ग्वाल-बाल। अर्थ या संदर्भ: 1. समय मापने की एक इकाई (तीन घंटे का एक पहर होता है। एक दिवस में आठ पहर होते हैं)। 2. एक वट वृक्ष (मान्यता है कि श्रीकृष्ण जब गाय चराया करते थे, तब वे इसी वृक्ष के ऊपर चढ़कर वंशी की ध्वनि से गायों को पुकारकर उन्हें एकत्रित करते।) 3. गोल पात्र के आकार का रस्सियों का बुना हुआ जाल जो छत या ऊँची जगह से लटकाया जाता है ताकि उसमें रखी हुई खाने-पीने की चीज़ों (जैसे— दूध, दही आदि) को कुत्ते, बिल्ली आदि न पा सकें। 4. यशोदा, श्रीकृष्ण की माँ, जिन्होंने श्रीकृष्ण को पाला था। 5. जन्म देने वाली, उत्पन्न करने वाली, जननी, माँ। 6. गाय पालने वालों के बच्चे, श्रीकृष्ण के संगी साथी। 7. मथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वन। 8. लाठी और छोटा कंबल, कमली (मान्यता है कि श्रीकृष्ण लकुटि-कमरिया लेकर गाय चराने जाया करते थे)।
उत्तर

सही मिलान नीचे दिया गया है। पुस्तक में इन्हीं जोड़ों के बीच रेखा खींचिए।

शब्दमिलेगाअर्थ या संदर्भपहचानने का सूत्र
1. जसोदा→ 4यशोदा, श्रीकृष्ण की माँ, जिन्होंने श्रीकृष्ण को पाला था।‘जसोदा’ ब्रजभाषा में ‘यशोदा’ का रूप है — बदलकर हो गया। पद की अंतिम पंक्ति — “सूरदास तब बिहँसि जसोदा।”
2. पहर→ 1समय मापने की एक इकाई (तीन घंटे का एक पहर; एक दिवस में आठ पहर)।चार पहर बंसीवट भटक्यो” — यहाँ पहर से समय की लंबाई नापी गई है।
3. लकुटि कमरिया→ 8लाठी और छोटा कंबल, कमली।“ये ले अपनी लकुटि कमरिया” — रूठकर कृष्ण चरवाहे का सामान लौटा रहे हैं। ‘लकुटि’ = लाठी, ‘कमरिया’ = कमली/कंबल।
4. बंसीवट→ 2एक वट वृक्ष, जिस पर चढ़कर कृष्ण वंशी बजाकर गायों को बुलाते थे।नाम में ही उत्तर है — बंसी + वट = वह बरगद जहाँ बाँसुरी बजती थी।
5. मधुबन→ 7मथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वन।नाम के अंत में ‘बन’ (वन) है, इसलिए यह कोई जगह होगी — “मधुबन मोहि पठायो”, यानी वहाँ भेजा गया।
6. छीको→ 3रस्सियों का बुना हुआ गोल जाल, जो छत से लटकाया जाता है।छीको केहि बिधि पायो” — छींका ऊँचा टँगा होता है, इसीलिए छोटे हाथ वहाँ नहीं पहुँचते। यही कृष्ण का पूरा बचाव है।
7. माता→ 5जन्म देने वाली, उत्पन्न करने वाली, जननी, माँ।“तू माता मन की अति भोरी” — यहाँ ‘माता’ संबोधन है, नाम नहीं। नाम वाला उत्तर (यशोदा) ‘जसोदा’ के हिस्से में जा चुका है।
8. ग्वाल-बाल→ 6गाय पालने वालों के बच्चे, श्रीकृष्ण के संगी साथी।शब्द दो टुकड़ों से बना है — ग्वाल (ग्वाला = गाय पालने वाला) + बाल (बालक)। “ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं।”
‘जसोदा’ और ‘माता’ में उलझन क्यों होती है: दोनों का अर्थ ‘माँ’ ही निकलता है। अंतर यह है कि ‘जसोदा’ एक व्यक्ति का नाम है (इसलिए उसका अर्थ भी नाम बताता है — यशोदा), जबकि ‘माता’ एक संज्ञा है (इसलिए उसका अर्थ भाव बताता है — जन्म देने वाली, जननी)। नाम को नाम से और संज्ञा को परिभाषा से मिलाइए, उलझन ख़त्म।
ध्यान दीजिए: दूसरे स्तंभ का क्रम जान-बूझकर उलट-पुलट रखा गया है, ताकि आप संख्या से संख्या न मिलाएँ बल्कि अर्थ से अर्थ मिलाएँ। कोई भी जोड़ा सीधे क्रम से नहीं मिलता। सही क्रम एक नज़र में — 1→4, 2→1, 3→8, 4→2, 5→7, 6→3, 7→5, 8→6।
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