मल्हार अध्याय 9 मेरी समझ से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए— (1) मैं माखन कैसे खा सकता हूँ? इसके लिए श्रीकृष्ण ने क्या तर्क दिया? • मुझे तुम पराया समझती हो। • मेरी माता, तुम बहुत भोली हो। • मुझे यह लाठी-कंबल नहीं चाहिए। • मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं?
उत्तर

सही उत्तर है — मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं? इसी विकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।

ध्यान दीजिए, प्रश्न पूछा गया है — “मैं माखन कैसे खा सकता हूँ?” यानी उत्तर वही होगा जो माखन तक पहुँचने की बात करे। पद में कृष्ण ठीक यही कहते हैं —

“मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।”
अर्थ — मैं तो छोटा-सा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं; इतने ऊँचे टँगे छींके तक मेरा हाथ भला किस तरह पहुँचता?
विकल्पसही / ग़लतकारण
मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं?सही ★यही एकमात्र तर्क है जो बताता है कि माखन तक पहुँचना संभव ही नहीं था। ‘कैसे खा सकता हूँ’ का सीधा उत्तर यही है।
मुझे तुम पराया समझती हो।ग़लतयह उलाहना है, तर्क नहीं। यह बात कृष्ण बाद में कहते हैं — “जिय तेरे कछु भेद उपजि हैं, जानि परायो जायो।” इससे माखन न खाना सिद्ध नहीं होता।
मेरी माता, तुम बहुत भोली हो।ग़लतयह माँ पर टिप्पणी है — कि तुम दूसरों की बातों में आ जाती हो। यह ग्वाल-बालों को दोष देता है, कृष्ण के हाथ की पहुँच को नहीं।
मुझे यह लाठी-कंबल नहीं चाहिए।ग़लतयह तो पद के अंत का रूठना है — “ये ले अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहिं नाच नचायो।” यह तर्क नहीं, नाराज़गी है।
ऐसे प्रश्न कैसे हल करें: पहले प्रश्न का प्रश्नवाचक शब्द पकड़िए — यहाँ वह ‘कैसे’ है। फिर हर विकल्प से पूछिए — क्या यह ‘कैसे’ का उत्तर दे रहा है? जो विकल्प केवल भावना बताए (पराया समझती हो, भोली हो), वह तर्क नहीं होता।
प्र2.
(2) श्रीकृष्ण माँ के आने से पहले क्या कर रहे थे? • गाय चरा रहे थे। • माखन खा रहे थे। • मधुबन में भटक रहे थे। • मित्रों के संग खेल रहे थे।
उत्तर

सही उत्तर है — गाय चरा रहे थे। इसी के सामने तारा (★) बनाइए।

पद की पहली ही पंक्ति में कृष्ण अपना पूरा दिन गिना देते हैं —

“भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो।
चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥”
अर्थ — सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया गया; चार पहर मैं बंसीवट पर बिताकर साँझ ढले घर लौटा।

यानी सुबह से शाम तक उनका काम एक ही था — गायें चराना। घर पर वे थे ही नहीं, इसलिए माखन खाने का सवाल ही नहीं उठता।

विकल्पसही / ग़लतकारण
गाय चरा रहे थे।सही ★“भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो” — गायों के पीछे-पीछे वन में भेजा जाना ही गाय चराना है।
माखन खा रहे थे।ग़लतयह तो वह आरोप है जिसका खंडन पूरा पद कर रहा है — “मैया मैं नहिं माखन खायो।”
मधुबन में भटक रहे थे।ग़लतपद में भटकने की जगह मधुबन नहीं, बंसीवट है — “चार पहर बंसीवट भटक्यो।” मधुबन तो वह वन है जहाँ उन्हें भेजा गया था।
मित्रों के संग खेल रहे थे।ग़लतपद में ग्वाल-बालों का ज़िक्र मित्र के रूप में नहीं, बैर रखने वालों के रूप में है — “ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं।”
ध्यान रखिए: ऐसे प्रश्नों में एक-दो विकल्प जान-बूझकर ‘आधे सही’ रखे जाते हैं। ‘मधुबन में भटक रहे थे’ लगभग सही लगता है, पर पद जगह का नाम बदल देता है। इसीलिए उत्तर चुनने से पहले पंक्ति शब्दशः पढ़िए।
प्र3.
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर

यह चर्चा का प्रश्न है। यहाँ केवल “मैंने यह चुना” कहना काफ़ी नहीं — बताना यह है कि पद की कौन-सी पंक्ति आपके उत्तर का प्रमाण है और बाक़ी विकल्प क्यों नहीं चलते।

अच्छी चर्चा में तीन बातें ज़रूर होनी चाहिए —

  • आपने कौन-सा विकल्प चुना;
  • पद की वह पंक्ति जो आपके उत्तर को सिद्ध करती है;
  • कम-से-कम एक ग़लत विकल्प को हटाने का कारण।

नमूना उत्तर:

“पहले प्रश्न में मैंने चुना — मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं? मेरा प्रमाण यह पंक्ति है — ‘मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।’ प्रश्न ‘कैसे’ पूछ रहा है, और यही एक उत्तर बताता है कि पहुँचना ही असंभव था। ‘मुझे यह लाठी-कंबल नहीं चाहिए’ वाला विकल्प मैंने इसलिए हटाया क्योंकि वह तर्क नहीं, रूठना है।

दूसरे प्रश्न में मैंने चुना — गाय चरा रहे थे। मेरा प्रमाण है — ‘भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो।’ ‘मधुबन में भटक रहे थे’ वाला विकल्प मैंने इसलिए हटाया क्योंकि पद कहता है कि भटकना बंसीवट पर हुआ था, मधुबन में नहीं।”

चर्चा में क्या नया मिलेगा: हो सकता है आपके किसी साथी ने ‘मधुबन में भटक रहे थे’ चुना हो। तब झगड़ने के बजाय दोनों मिलकर पृष्ठ 94 खोलिए और पंक्ति पढ़िए। जिस उत्तर के पीछे पद की पंक्ति खड़ी हो, वही जीतता है — यही इस गतिविधि का असली उद्देश्य है।
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