मल्हार अध्याय 10 खोजबीन

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
कहानी में से वे वाक्य खोजकर लिखिए जिनसे पता चलता है कि— (क) शायद युवक बूढ़े किसान की असलियत पहचान गया था।
उत्तर

ये रहे वे वाक्य (पृष्ठ 109 के अंत में) —

“युवक ने किसान की तरफ़ गौर से देखा। उसके मन में एक संदेह हुआ, क्या यह सुजानसिंह तो नहीं हैं? आवाज़ मिलती है, चेहरा-मोहरा भी वही।

इनसे कैसे पता चलता है —

  • “गौर से देखा” — अब तक वह किसान को केवल एक मुसीबतज़दा आदमी समझ रहा था; इनाम की बात सुनते ही उसने ध्यान से चेहरा पढ़ा।
  • “क्या यह सुजानसिंह तो नहीं हैं?” — यह सीधा-सीधा संदेह है, यानी पहचान की शुरुआत।
  • “आवाज़ मिलती है, चेहरा-मोहरा भी वही” — यह उसके संदेह का कारण है; उसने दो प्रमाण जोड़े — स्वर और चेहरा।

इसके तुरंत बाद वाला वाक्य इस पहचान को और पक्का करता है — किसान भी उसकी ओर “तीव्र दृष्टि” से देखता है, “शायद उसके दिल के संदेह को भाँप गया” और मुस्कराकर कहावत कह देता है, “गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है।”

संकेत कहाँ छिपा था: किसान ने साधारण धन्यवाद नहीं दिया, बल्कि कहा — “नारायण चाहेंगे तो दीवानी आपको ही मिलेगी।” एक अनजान किसान को यह कैसे पता कि सामने खड़ा आदमी दीवानी का उम्मीदवार है? यही वाक्य युवक के मन में संदेह का बीज बोता है।
प्र2.
(ख) नौकरी के लिए आए लोग किसी तरह बस नौकरी पा लेना चाहते थे।
उत्तर

ये रहे वे वाक्य —

1. “लोग समझते थे कि एक महीने का झंझट है, किसी तरह काट लें, कहीं कार्य सिद्ध हो गया तो कौन पूछता है?”
2. “हर एक मनुष्य अपने जीवन को अपनी बुद्धि के अनुसार अच्छे रूप में दिखाने की कोशिश करता था।”
3. “यह भी तो आखिर एक विद्या है। इसे क्यों छिपा रखें। संभव है, कुछ हाथों की सफ़ाई ही काम कर जाए।
4. “सबसे विशेष संख्या ग्रेजुएटों की थी, क्योंकि सनद की कैद न होने पर भी सनद से परदा तो ढका रहता है।

ये वाक्य क्या सिद्ध करते हैं —

  • पहला वाक्य सबसे सीधा प्रमाण है। “कौन पूछता है?” का अर्थ है — नौकरी मिल जाने के बाद फिर वही पुरानी आदतें लौट आएँगी। यानी सुधार दिखावटी था, स्थायी नहीं।
  • दूसरा वाक्य बताता है कि लक्ष्य ‘अच्छा होना’ नहीं, ‘अच्छा दिखना’ था।
  • तीसरा वाक्य दिखाता है कि हॉकी का खेल भी शौक़ से नहीं, नंबर बटोरने की चाल के रूप में खेला जा रहा था।
  • चौथा वाक्य बताता है कि डिग्री तक ज्ञान के लिए नहीं, कमी छिपाने के परदे की तरह लाई गई थी।
Tip: ‘खोजबीन’ वाले प्रश्नों में उत्तर अपने शब्दों में मत लिखिए — पाठ का वाक्य ज्यों-का-त्यों उद्धरण चिह्नों में लिखिए, और नीचे एक पंक्ति में समझाइए कि वह वाक्य प्रश्न की बात को कैसे सिद्ध करता है। परीक्षा में पूरे अंक इसी तरह मिलते हैं।
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