प्र1.
कहानी में से वे वाक्य खोजकर लिखिए जिनसे पता चलता है कि— (क) शायद युवक बूढ़े किसान की असलियत पहचान गया था।
उत्तर
ये रहे वे वाक्य (पृष्ठ 109 के अंत में) —
“युवक ने किसान की तरफ़ गौर से देखा। उसके मन में एक संदेह हुआ, क्या यह सुजानसिंह तो नहीं हैं? आवाज़ मिलती है, चेहरा-मोहरा भी वही।”
इनसे कैसे पता चलता है —
- “गौर से देखा” — अब तक वह किसान को केवल एक मुसीबतज़दा आदमी समझ रहा था; इनाम की बात सुनते ही उसने ध्यान से चेहरा पढ़ा।
- “क्या यह सुजानसिंह तो नहीं हैं?” — यह सीधा-सीधा संदेह है, यानी पहचान की शुरुआत।
- “आवाज़ मिलती है, चेहरा-मोहरा भी वही” — यह उसके संदेह का कारण है; उसने दो प्रमाण जोड़े — स्वर और चेहरा।
इसके तुरंत बाद वाला वाक्य इस पहचान को और पक्का करता है — किसान भी उसकी ओर “तीव्र दृष्टि” से देखता है, “शायद उसके दिल के संदेह को भाँप गया” और मुस्कराकर कहावत कह देता है, “गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है।”
संकेत कहाँ छिपा था: किसान ने साधारण धन्यवाद नहीं दिया, बल्कि कहा — “नारायण चाहेंगे तो दीवानी आपको ही मिलेगी।” एक अनजान किसान को यह कैसे पता कि सामने खड़ा आदमी दीवानी का उम्मीदवार है? यही वाक्य युवक के मन में संदेह का बीज बोता है।