मल्हार अध्याय 10 कहानी की रचना

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“लोग पसीने से तर हो गए। खून की गरमी आँख और चेहरे से झलक रही थी।” इन वाक्यों को पढ़कर आँखों के सामने थकान से चूर खिलाड़ियों का चित्र दिखाई देने लगता है। यह चित्रात्मक भाषा है। कहानी को एक बार ध्यान से पढ़िए। आपको इस कहानी में और कौन-कौन सी विशेष बातें दिखाई दे रही हैं? अपने समूह में मिलकर उनकी सूची बनाइए।
उत्तर

‘परीक्षा’ की भाषा में कई विशेष बातें हैं। नीचे उन्हें नाम देकर, पाठ के उदाहरण के साथ सूचीबद्ध किया गया है — अपने समूह की सूची इसी ढाँचे पर बनाइए।

विशेष बातपाठ से उदाहरणवह क्या असर करती है
चित्रात्मक भाषा“लोग पसीने से तर हो गए। खून की गरमी आँख और चेहरे से झलक रही थी।”दृश्य आँखों के सामने खड़ा हो जाता है
उपमा (जैसा / मानो / तरह)“ऐसा जान पड़ता था कि कोई लहर बढ़ती चली आती है”; “रोक लेते थे कि मानो लोहे की दीवार है”खेल का जोश और डटाव एक चित्र बन जाता है
व्यंग्य“गेंद किसी दफ्तर के अप्रेंटिस की तरह ठोकरें खाने लगी”हँसी के साथ समाज पर चोट भी करता है
प्रतीक“इन बगुलों में हंस कहाँ छिपा हुआ है”; “मनुष्यों का वह बूढ़ा जौहरीबिना कुछ कहे पूरी बात कह देता है — दिखावा बनाम असलियत
मुहावरेतहलका मचा देना, नाक में दम होना, हाथों की सफ़ाई, दिन काटना पहाड़ हो जाना, कलेजा धड़कना, नसीब जागनाभाषा छोटी और असरदार हो जाती है
कहावत“गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है।”कहानी का संदेश एक पंक्ति में बाँध देती है
सजीव संवाद“मैं तुम्हारी गाड़ी निकाल दूँ?” — “हुजूर, मैं आपसे कैसे कहूँ?”पात्रों का स्वभाव उनके बोलने से ही खुल जाता है
विरोध की जोड़ी“मगर उन आँखों में सत्कार था, इन आँखों में ईर्ष्या”; “विद्या का कम, परंतु कर्तव्य का अधिक”दो बातों का अंतर एक ही साँस में स्पष्ट हो जाता है
नामों के बदले अक्षरमिस्टर ‘अ’, ‘द’, ‘स’, ‘ज’, ‘ल’बताता है कि ये कोई ख़ास व्यक्ति नहीं — ऐसे लोग हर जगह मिलते हैं
अंत में चौंकाने वाला मोड़जिस ‘किसान’ की गाड़ी निकाली गई, वही परीक्षक सुजानसिंह निकलेपाठक अंत तक बँधा रहता है
समूह-कार्य कैसे कीजिए: सबसे पहले हर सदस्य कहानी के 2–3 पृष्ठ बाँट ले और उनमें से ऐसे वाक्य रेखांकित करे जो कोई चित्र बनाते हों या साधारण बात को नए ढंग से कहते हों। फिर सब वाक्य एक जगह लिखकर ऊपर की तरह श्रेणियों में बाँटिए। इस तरह सूची अपने-आप बन जाएगी।
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